भारत की ब्लू इकोनॉमी को मिलेगी युवाओं से नई उड़ान!

80वें स्वतंत्रता दिवस पर मत्स्य विभाग ने किया मछुआरों और मत्स्य पालकों का सम्मान, विकसित भारत 2047 में ब्लू इकोनॉमी की भूमिका पर जोर!

नई दिल्ली  -मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के अंतर्गत मत्स्य विभाग ने 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर देशभर से आए मछुआरों, मत्स्य पालकों और मत्स्य क्षेत्र से जुड़े हितधारकों के साथ राष्ट्रीय राजधानी में विशेष समारोह आयोजित किया। कार्यक्रम का आयोजन “वंदे मातरम् के 150 वर्ष” तथा “विकसित भारत 2047 के लिए युवा शक्ति” विषयों के अनुरूप किया गया, जिसमें स्वतंत्रता संग्राम की प्रेरणादायक विरासत और राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका को रेखांकित किया गया।

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मत्स्य क्षेत्र बना ग्रामीण अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार

कार्यक्रम में बताया गया कि भारत का मत्स्य पालन एवं जलीय कृषि क्षेत्र देश की अर्थव्यवस्था और ग्रामीण आजीविका का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बन चुका है। वर्तमान में यह क्षेत्र लगभग 3 करोड़ मछुआरों और मत्स्य पालकों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार उपलब्ध करा रहा है। भारत आज विश्व का दूसरा सबसे बड़ा मछली उत्पादक देश है और वैश्विक उत्पादन में उसकी हिस्सेदारी लगभग 8 प्रतिशत है।

भारत जलीय कृषि उत्पादन में भी दूसरे स्थान पर है, जबकि झींगा उत्पादन एवं निर्यात में अग्रणी देशों में शामिल है। विशेषज्ञों के अनुसार मत्स्य क्षेत्र का विस्तार न केवल किसानों की आय बढ़ाने में सहायक है, बल्कि देश की खाद्य एवं पोषण सुरक्षा को भी मजबूत कर रहा है।

39 हजार करोड़ रुपये से अधिक का निवेश, योजनाओं ने बदली तस्वीर

वर्ष 2015 के बाद केंद्र सरकार ने मत्स्य क्षेत्र के विकास के लिए 39,272 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया है। इस दौरान नीली क्रांति योजना, मत्स्य पालन एवं जलीय कृषि अवसंरचना विकास कोष (FIDF), प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) तथा प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि सह-योजना (PM-MKSSY) जैसी पहलें शुरू की गईं।

इन योजनाओं के माध्यम से मत्स्य उत्पादन बढ़ाने, आधुनिक अवसंरचना विकसित करने, कोल्ड चेन नेटवर्क मजबूत करने, मूल्य संवर्धन को बढ़ावा देने और निर्यात क्षमता बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया गया है।

युवा शक्ति से मिलेगी ब्लू इकोनॉमी को नई गति

कार्यक्रम में इस बात पर विशेष बल दिया गया कि विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने में युवा मछुआरों और मत्स्य उद्यमियों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होगी। आधुनिक मत्स्य पालन तकनीकों, डिजिटल ट्रेसबिलिटी, कोल्ड-चेन प्रबंधन, ब्रांडिंग, विपणन और निर्यात जैसे क्षेत्रों में युवाओं की बढ़ती भागीदारी से भारतीय ब्लू इकोनॉमी को नई ऊर्जा मिल रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि नवाचार और तकनीक आधारित मत्स्य पालन भविष्य में ग्रामीण रोजगार और निर्यात आय दोनों को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

पीएम-एमकेएसएसवाई लाभार्थियों ने साझा की सफलता की कहानियां

लाल किले पर आयोजित राष्ट्रीय समारोह के बाद मत्स्य विभाग ने प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि सह-योजना (PM-MKSSY) के लाभार्थियों और उनके परिवारों के साथ संवाद कार्यक्रम आयोजित किया। इस दौरान विभिन्न राज्यों के लाभार्थियों ने बताया कि सरकारी सहायता मिलने के बाद उनकी आय में वृद्धि हुई, आधुनिक तकनीकों को अपनाने में मदद मिली और नए रोजगार के अवसर सृजित हुए।

कार्यक्रम में शामिल प्रमुख लाभार्थियों में असम के नितुल चंद्र दास, ओडिशा के सुरेश चंद्र राउत, महाराष्ट्र के एकनाथ राम मुकाने, उत्तर प्रदेश के आकाश सिंह और बिहार की मीशा सिंह शामिल रहे। इन लाभार्थियों को राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केंद्र में आयोजित “एट होम” समारोह में भी आमंत्रित किया गया था।

डिजिटल पहचान और वित्तीय पहुंच पर विशेष फोकस

मत्स्य विभाग के अनुसार पीएम-एमकेएसएसवाई का प्रमुख उद्देश्य मत्स्य क्षेत्र की संरचनात्मक चुनौतियों को दूर करना है। इसके तहत राष्ट्रीय मत्स्य डिजिटल प्लेटफॉर्म (NFDP) के माध्यम से मछुआरों और मत्स्य पालकों की डिजिटल पहचान तैयार की जा रही है, जिससे योजनाओं का लाभ सीधे लाभार्थियों तक पहुंच सके।

यह योजना मत्स्य पालकों, मछुआरों, सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों को कार्यशील पूंजी सहित संस्थागत वित्त उपलब्ध कराने में भी मदद करती है। इसके साथ ही मत्स्य बीमा, प्रदर्शन आधारित अनुदान, गुणवत्ता आश्वासन और मूल्य श्रृंखला सुदृढ़ीकरण जैसे प्रावधान भी शामिल हैं।

6000 करोड़ रुपये की योजना से मिलेगा क्षेत्र को नया विस्तार

केंद्र सरकार ने फरवरी 2024 में पीएमएमएसवाई के अंतर्गत प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि सह-योजना को मंजूरी दी थी। वित्त वर्ष 2023-24 से 2026-27 तक लागू होने वाली इस योजना पर लगभग 6000 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। योजना का उद्देश्य मत्स्य क्षेत्र को अधिक संगठित, तकनीक आधारित और प्रतिस्पर्धी बनाना है।

इसके दायरे में मछुआरे, मत्स्य श्रमिक, मत्स्य विक्रेता, स्वयं सहायता समूह, मत्स्य उत्पादक संगठन (FFPO), स्टार्टअप, सहकारी समितियां तथा मत्स्य एवं जलीय कृषि क्षेत्र से जुड़े सूक्ष्म और लघु उद्यम शामिल हैं।

विकसित भारत 2047 के लक्ष्य में मत्स्य क्षेत्र की अहम भूमिका

स्वतंत्रता दिवस समारोह में मत्स्य विभाग ने दोहराया कि सतत नीतिगत समर्थन, आधुनिक अवसंरचना, तकनीकी नवाचार और समावेशी कल्याणकारी उपायों के माध्यम से मत्स्य क्षेत्र को और मजबूत बनाया जाएगा। कार्यक्रम में मछुआरों, मत्स्य पालकों और युवाओं की सक्रिय भागीदारी ने यह स्पष्ट किया कि भारत की ब्लू इकोनॉमी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में यह क्षेत्र आने वाले वर्षों में महत्वपूर्ण योगदान देगा।

मत्स्य क्षेत्र का तेज़ी से हो रहा विस्तार न केवल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती दे रहा है, बल्कि विकसित भारत 2047 के सपने को साकार करने की दिशा में भी एक मजबूत आधार तैयार कर रहा है।