जलवायु-स्मार्ट धान किस्मों के विकास और प्रसार पर वैश्विक मंथन, ICRISAT–IRRI वेबिनार में 520 से अधिक विशेषज्ञ शामिल!
जलवायु परिवर्तन, भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं और बढ़ती खाद्य मांग के कारण वैश्विक खाद्य प्रणालियों पर बढ़ते दबाव के बीच, अंतर्राष्ट्रीय अर्ध-शुष्क उष्णकटिबंधीय फसल अनुसंधान संस्थान (ICRISAT) और अंतर्राष्ट्रीय धान अनुसंधान संस्थान (IRRI) ने धान अनुसंधान एवं नवाचार को गति देने के उद्देश्य से एक अंतरराष्ट्रीय वेबिनार का आयोजन किया। 23 जुलाई 2026 को आयोजित इस वेबिनार में दुनिया भर से 520 से अधिक वैज्ञानिकों, नीति-निर्माताओं और कृषि क्षेत्र के विशेषज्ञों ने भाग लिया।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!
वेबिनार का मुख्य उद्देश्य वैश्विक दक्षिण (Global South) के देशों में उन्नत एवं जलवायु-सहिष्णु धान किस्मों के विकास, परीक्षण और किसानों तक उनकी तेज़ पहुंच सुनिश्चित करने के लिए सहयोग को मजबूत करना था। कार्यक्रम में ऐसी नवीन तकनीकों और रणनीतियों को प्रस्तुत किया गया जो धान प्रजनन (Rice Breeding) की प्रक्रिया को तेज कर रही हैं, क्षेत्रीय बीज प्रणालियों को सुदृढ़ बना रही हैं और नई किस्मों को कम समय में किसानों तक पहुंचाने में मदद कर रही हैं।
धान अनुसंधान में नई तकनीकों पर जोर
वेबिनार में IRRI के विशेषज्ञों ने राइस स्पीड ब्रीडिंग (Rice Speed Breeding), सीड्स विदाउट बॉर्डर्स (Seeds Without Borders) तथा अफ्रीका के लिए बाजार-आधारित धान किस्म विकास (Market-Driven Rice Variety Development for Africa) जैसे नवाचारों पर विस्तार से जानकारी दी। इन पहलों को धान अनुसंधान और बीज वितरण प्रणाली में परिवर्तनकारी कदम माना जा रहा है, जो नई किस्मों के विकास की अवधि को कम करने के साथ-साथ किसानों की बदलती जरूरतों के अनुरूप किस्मों के चयन में मदद कर रही हैं।
विशेषज्ञों ने इस बात पर भी बल दिया कि वैज्ञानिक संस्थानों, सरकारों और क्षेत्रीय साझेदारों के बीच मजबूत सहयोग के बिना खाद्य सुरक्षा की वर्तमान चुनौतियों का समाधान संभव नहीं है। जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने के लिए बड़े पैमाने पर जलवायु-सहिष्णु फसलों का विकास और उनका तेजी से प्रसार आवश्यक है।
नवाचार का उद्देश्य लोगों के जीवन में बदलाव लाना: डॉ. हिमांशु पाठक
ICRISAT के महानिदेशक डॉ. हिमांशु पाठक ने कहा कि किसी भी नवाचार की वास्तविक सफलता उसकी खोज में नहीं, बल्कि लोगों के जीवन में उसके प्रभाव में निहित होती है।
उन्होंने कहा, “आज जिन चुनौतियों का सामना दुनिया कर रही है, वे साझा हैं और उनके समाधान भी साझा प्रयासों से ही संभव हैं। ISSCA वेबिनार श्रृंखला CGIAR की सहयोगात्मक भावना तथा ICRISAT और IRRI की मजबूत साझेदारी का प्रतीक है। यह साझेदारी सीमाओं के पार ज्ञान के आदान-प्रदान को गति दे रही है और यह सुनिश्चित कर रही है कि नवाचार उन लोगों तक पहुंचे जिन्हें इसकी सबसे अधिक आवश्यकता है।”
ग्लोबल सहयोग से तेज होगी कृषि नवाचार की गति
IRRI की महानिदेशक डॉ. यवोन पिंटो ने कहा कि ISSCA जैसी पहलें यह दिखाती हैं कि वैज्ञानिकों और संस्थानों को एक मंच पर लाकर कृषि नवाचार को कितनी तेजी से आगे बढ़ाया जा सकता है।
उन्होंने कहा, “नवाचार की गति केवल वैज्ञानिक उत्कृष्टता पर निर्भर नहीं करती, बल्कि इस बात पर भी निर्भर करती है कि ज्ञान को संस्थानों और देशों के बीच कितनी प्रभावी ढंग से साझा किया जाता है। ISSCA ऐसा मंच प्रदान करता है जो शोध सहयोग को मजबूत करने और वास्तविक प्रभाव वाले अनुसंधान को आगे बढ़ाने में मदद करता है।”
प्रशिक्षण, पुरस्कार और ड्राईलैंड कांग्रेस 2026 की जानकारी
वेबिनार के दौरान प्रतिभागियों को ISSCA की आगामी पहलों के बारे में भी जानकारी दी गई। इनमें अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम, ISSCA अवार्ड्स, ISSCA ग्लोबल कैंडिडेट पूल तथा ड्राईलैंड कांग्रेस 2026 जैसी पहलें शामिल हैं। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य वैश्विक कृषि अनुसंधान समुदाय के बीच सहयोग बढ़ाना, क्षमता निर्माण को प्रोत्साहित करना और कृषि नवाचारों के प्रसार को गति देना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन और खाद्य सुरक्षा जैसी चुनौतियों के दौर में ऐसे वैश्विक सहयोग कृषि क्षेत्र को अधिक टिकाऊ, उत्पादक और भविष्य के लिए तैयार बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
