नाबार्ड ने बदली ग्रामीण भारत की तस्वीर, यूपी को 10 वर्षों में मिला ₹1.04 लाख करोड़ पुनर्वित्त: सूर्य प्रताप शाही
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि नाबार्ड (राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक) ने पिछले चार दशकों से अधिक समय में ग्रामीण भारत की अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने में उल्लेखनीय योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि नाबार्ड केवल ऋण वितरण करने वाली संस्था नहीं है, बल्कि कृषि, ग्रामीण अवसंरचना, तकनीक, कौशल विकास, बाजार और सामुदायिक भागीदारी को जोड़कर समग्र ग्रामीण विकास का मॉडल प्रस्तुत कर रही है।
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कृषि मंत्री लखनऊ में आयोजित नाबार्ड के 45वें स्थापना दिवस समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने कृषि, ग्रामीण अवसंरचना और वित्तीय समावेशन के क्षेत्र में नाबार्ड द्वारा किए जा रहे कार्यों की सराहना की तथा कहा कि किसान, किसान उत्पादक संगठन (FPO), स्वयं सहायता समूह (SHG) और सहकारी संस्थाओं को मजबूत बनाने में नाबार्ड की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है।
“उत्तर प्रदेश में कृषि ऋण” पुस्तिका का हुआ विमोचन
समारोह के दौरान “उत्तर प्रदेश में कृषि ऋण – जनपद स्तरीय विश्लेषण” पुस्तिका का भी विमोचन किया गया। कृषि मंत्री ने कहा कि यह दस्तावेज प्रदेश के सभी 75 जिलों में कृषि ऋण की स्थिति, चुनौतियों और संभावनाओं का विस्तृत एवं तथ्यात्मक विश्लेषण प्रस्तुत करता है। इससे भविष्य की कृषि वित्तीय नीतियों और योजनाओं को अधिक प्रभावी बनाने में सहायता मिलेगी।
10 वर्षों में यूपी को मिला ₹1.04 लाख करोड़ से अधिक पुनर्वित्त
सूर्य प्रताप शाही ने बताया कि उत्तर प्रदेश में कृषि ऋण प्रवाह को मजबूत करने के लिए नाबार्ड ने पिछले 10 वर्षों में ₹1,04,710 करोड़ का पुनर्वित्त उपलब्ध कराया है।
इसमें शामिल हैं—
- ₹53,735 करोड़ अल्पकालीन कृषि एवं संबद्ध गतिविधियों के लिए
- ₹18,607 करोड़ कृषि क्षेत्र में पूंजी निर्माण हेतु
- ₹32,693 करोड़ राज्य सहकारी बैंक और जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों को प्रत्यक्ष पुनर्वित्त के रूप में
उन्होंने कहा कि इस वित्तीय सहायता से किसानों को समय पर ऋण उपलब्ध कराने और सहकारी बैंकिंग प्रणाली को मजबूत बनाने में बड़ी मदद मिली है।
ग्रामीण अवसंरचना विकास में नाबार्ड का बड़ा योगदान
कृषि मंत्री ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में आधारभूत संरचना के निर्माण में भी नाबार्ड की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। वर्ष 1995 से अब तक उत्तर प्रदेश में ₹41,650 करोड़ की परियोजनाएं स्वीकृत की गईं, जबकि ₹35,854 करोड़ का वितरण किया गया।
इन परियोजनाओं के माध्यम से—
- 53.86 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बाढ़ सुरक्षा कार्य
- 15.66 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में जलग्रहण विकास
- 58.17 लाख हेक्टेयर सिंचाई क्षमता का सृजन
- 14,634 हेक्टेयर वन विकास
- 757 पशु चिकित्सालयों का निर्माण
- 46,416 किलोमीटर ग्रामीण सड़कें
- 3 लाख मीटर ग्रामीण पुल
- 20,850 मीटर रेलवे ओवरब्रिज
- 198 विद्यालयों का निर्माण
जैसी महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल हुई हैं।
उन्होंने कहा कि यह निवेश केवल ढांचागत विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे किसानों की उत्पादकता, ग्रामीण संपर्क, शिक्षा, पशुपालन और जल प्रबंधन को भी नई मजबूती मिली है।
जनजातीय क्षेत्रों में आजीविका सुधार पर विशेष फोकस
कृषि मंत्री ने बताया कि प्रदेश में अब तक 39 जनजातीय विकास परियोजनाओं को स्वीकृति दी गई है, जिनके लिए ₹104 करोड़ की अनुदान सहायता प्रदान की गई है।
इन परियोजनाओं से—
- 20,729 परिवार लाभान्वित हुए
- 17,354 एकड़ क्षेत्र का विकास हुआ
- 3,375 भूमिहीन परिवारों को आजीविका सहायता मिली
विशेष रूप से ललितपुर और सोनभद्र जैसे पिछड़े और सूखा प्रभावित जिलों में 24 परियोजनाएं संचालित की गई हैं।
बुंदेलखंड में जल संरक्षण से बढ़ी किसानों की आय
सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि प्राकृतिक संसाधन संरक्षण और जलग्रहण विकास कार्यक्रमों के तहत नाबार्ड ने उत्तर प्रदेश में 85 जलग्रहण विकास परियोजनाएं संचालित की हैं। इनमें दो-तिहाई से अधिक परियोजनाएं बुंदेलखंड क्षेत्र में लागू की गई हैं।
इन परियोजनाओं के तहत—
- 279 गांवों और 40 विकास खंडों को शामिल किया गया, लगभग 55 हजार हेक्टेयर क्षेत्र स्वीकृत, 43 हजार हेक्टेयर क्षेत्र का उपचार, 57 हजार परिवार लाभान्वित
परिणामस्वरूप—
- मिट्टी कटाव में 20-30% कमी, पलायन में 10-15% कमी, परिवारों की आय में 20-45% वृद्धि
- सामुदायिक भागीदारी में 40-50% सुधार. दर्ज किया गया है।
किसानों की आय बढ़ाने में निभा रहा अहम रोल
कृषि मंत्री ने कहा कि नाबार्ड की परियोजनाओं के माध्यम से फलोद्यान, इंटरक्रॉपिंग, जल संरक्षण, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन और आजीविका संवर्धन को बढ़ावा मिला है। इससे किसानों की आय बढ़ाने, ग्रामीण रोजगार सृजन और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने में मदद मिल रही है।
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार और नाबार्ड मिलकर किसानों, महिला स्वयं सहायता समूहों, ग्रामीण उद्यमियों और सहकारी संस्थाओं को सशक्त बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रहे हैं। ग्रामीण विकास और आत्मनिर्भर कृषि व्यवस्था के निर्माण में नाबार्ड की भूमिका आने वाले वर्षों में और अधिक महत्वपूर्ण होगी।
