लोकल से ग्लोबल: झारखंड के आमों ने दुबई में बनाई पहचान!

झारखंड के किसानों को निर्यात का तोहफा, आमों की विदेशी मांग बढ़ी!

गुमला/देवघर। झारखंड के जनजातीय क्षेत्रों में उगाए गए आम्रपाली आम अब अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी मिठास और गुणवत्ता का परचम लहरा रहे हैं। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) ने 3 जुलाई 2026 को झारखंड के आकांक्षी जिले गुमला और देवघर से 2 मीट्रिक टन उच्च गुणवत्ता वाले आम्रपाली आमों के दुबई निर्यात को सफलतापूर्वक सुगम बनाया। यह खेप दुबई स्थित लुलु स्टोर्स में खुदरा बिक्री के लिए भेजी गई है।

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महिला किसान उत्पादक कंपनियों से खरीदे गए आम

निर्यात की गई खेप में शामिल आम झारखंड राज्य आजीविका संवर्धन सोसाइटी (जेएसएलपीएस) द्वारा प्रोत्साहित महिला-नेतृत्व वाली किसान उत्पादक कंपनियों (एफपीसी) से प्राप्त किए गए। इनमें गुमला जिले की एपीईडीए-पंजीकृत एमवीएम बाघिमा पलकोट उत्पादक कंपनी लिमिटेड और रायडीह कृषि उत्पादक कंपनी लिमिटेड से एक मीट्रिक टन आम खरीदे गए, जबकि शेष एक मीट्रिक टन आम देवघर जिले की मोहनपुर आजीविका महिला किसान उत्पादक सोसाइटी से लिए गए।

बिरसा हरित ग्राम योजना का दिखा सकारात्मक प्रभाव

इन आमों का उत्पादन उन बागों में हुआ है जिन्हें जनजातीय महिला किसानों ने बिरसा हरित ग्राम योजना के तहत विकसित किया है। यह योजना मनरेगा के साथ समन्वय स्थापित कर झारखंड सरकार द्वारा संचालित की जा रही है। योजना का उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को बागवानी आधारित आजीविका से जोड़कर उनकी आय में स्थायी वृद्धि सुनिश्चित करना है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार से किसानों की आय में  उछाल

इस निर्यात पहल का सबसे बड़ा लाभ किसानों को बेहतर मूल्य के रूप में मिला है। महिला-नेतृत्व वाले एफपीसी के सदस्यों को स्थानीय बाजारों की तुलना में लगभग 180 प्रतिशत अधिक मूल्य प्राप्त हुआ। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसानों को निर्यात बाजारों तक नियमित पहुंच मिलती रही तो उनकी आय में कई गुना वृद्धि संभव है।

भाग लेने वाली प्रत्येक एफपीसी में 1,500 से अधिक शेयरधारक जुड़े हुए हैं और सामूहिक रूप से ये संगठन 50,000 से अधिक किसानों का प्रतिनिधित्व करते हैं। ऐसे में इस पहल का सकारात्मक प्रभाव हजारों ग्रामीण परिवारों तक पहुंच रहा है।

एपीईडीए के प्रशिक्षण कार्यक्रमों का मिला लाभ

निर्यात के लिए केवल उत्पादन ही नहीं, बल्कि गुणवत्ता मानकों को पूरा करना भी आवश्यक होता है। इसी उद्देश्य से एपीईडीए ने मई 2026 में गुमला जिले के पालकोट क्षेत्र में किसान उत्पादक कंपनियों के सदस्यों और निदेशकों के लिए विशेष क्षमता निर्माण कार्यक्रम आयोजित किया था। इसमें अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों, फसल कटाई के बाद प्रबंधन, पैकेजिंग, ग्रेडिंग और निर्यात प्रक्रियाओं की विस्तृत जानकारी दी गई।

इसके अलावा सितंबर 2025 में देवघर जिले के बसवरिया गांव में महिला उद्यमियों, स्वयं सहायता समूहों और किसान संगठनों के लिए निर्यात उन्मुख प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित किया गया था, जिसमें करीब 105 प्रतिभागियों ने भाग लिया था।

ग्रामीण उत्पादकों को वैश्विक बाजार से जोड़ने की मिसाल

निर्यात खेप को संबंधित जिलों के उपायुक्त, उप विकास आयुक्त, एपीईडीए, जेएसएलपीएस और अन्य विभागों के अधिकारियों की उपस्थिति में हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। यह आयोजन केंद्र और राज्य सरकार, जिला प्रशासन, महिला किसान समूहों, निर्यातकों तथा विकास भागीदारों के बीच सफल समन्वय का प्रतीक माना जा रहा है।

झारखंड के बागवानी उत्पादों के लिए खुल रहे नए अवसर

विशेषज्ञों का कहना है कि झारखंड की जलवायु आम, लीची, अमरूद और अन्य फल फसलों के लिए अनुकूल है। यदि किसानों को गुणवत्तापूर्ण उत्पादन, आधुनिक पैकेजिंग और निर्यात संबंधी प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाए तो राज्य देश के प्रमुख कृषि निर्यात केंद्रों में शामिल हो सकता है। आम्रपाली आमों का यह निर्यात न केवल झारखंड की बागवानी क्षमता को वैश्विक पहचान दिला रहा है, बल्कि महिला किसानों और जनजातीय समुदायों के लिए आय बढ़ाने का नया रास्ता भी खोल रहा है।

यह उपलब्धि दर्शाती है कि संगठित किसान समूह, सरकारी योजनाएं और निर्यात एजेंसियों का सहयोग मिलकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे सकते हैं तथा ‘लोकल टू ग्लोबल’ की अवधारणा को वास्तविक रूप दे सकते हैं।