पूसा में सजा आमों का रंगारंग उत्सव, विविध किस्मों और प्रतियोगिताओं ने मोहा मन
आम की विविधता, बागवानी विरासत और कृषि नवाचार का अनूठा संगम
पूसा (समस्तीपुर)। डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा में आयोजित आम उत्सव आम की विविधता, स्वाद और भारतीय बागवानी परंपरा के भव्य प्रदर्शन का साक्षी बना। इस आयोजन ने न केवल आम प्रेमियों को आकर्षित किया, बल्कि किसानों, शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों को भी आम उत्पादन एवं बागवानी क्षेत्र की नवीन संभावनाओं से परिचित कराया।
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कार्यक्रम में मुख्य अतिथि डॉ. वी.के. मिश्रा की उपस्थिति तथा विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. पी.एस. पांडेय के मार्गदर्शन ने आयोजन की गरिमा को और बढ़ाया। उन्होंने आम उत्पादन, संरक्षण और मूल्य संवर्धन के क्षेत्र में अनुसंधान एवं नवाचार की आवश्यकता पर बल दिया।
आकर्षण का केंद्र बनी आम की उत्कृष्ट किस्मों की प्रदर्शनी
उत्सव के दौरान विभिन्न रंग, आकार, स्वाद और सुगंध वाली आम की अनेक उन्नत एवं पारंपरिक किस्मों की प्रदर्शनी लगाई गई। प्रदर्शनी में मौजूद आम की दुर्लभ और लोकप्रिय प्रजातियों ने आगंतुकों का विशेष ध्यान आकर्षित किया। विशेषज्ञों ने किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले आम उत्पादन, बाग प्रबंधन और बाजार संभावनाओं से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां भी प्रदान कीं।
आम खाने की प्रतियोगिता में दिखा उत्साह
आयोजन की सबसे रोचक गतिविधियों में से एक आम खाने की प्रतियोगिता रही, जिसमें प्रतिभागियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। प्रतियोगिता ने कार्यक्रम में मनोरंजन और उत्साह का माहौल पैदा कर दिया। दर्शकों ने भी प्रतियोगियों का उत्साहवर्धन करते हुए आयोजन का भरपूर आनंद लिया।
किसानों की मेहनत और बागवानी विरासत को मिला सम्मान
विश्वविद्यालय प्रशासन ने बताया कि आम उत्सव केवल स्वाद का उत्सव नहीं है, बल्कि यह किसानों की मेहनत, भारतीय बागवानी की समृद्ध विरासत और कृषि क्षेत्र में हो रहे नवाचारों को सम्मान देने का एक महत्वपूर्ण मंच भी है। ऐसे आयोजन किसानों को नई तकनीकों और बेहतर किस्मों की जानकारी देकर उनकी आय बढ़ाने में सहायक सिद्ध हो सकते हैं।
भारतीय संस्कृति और कृषि की पहचान है आम
विशेषज्ञों के अनुसार आम को केवल “फलों का राजा” कहना पर्याप्त नहीं है, क्योंकि यह भारतीय संस्कृति, कृषि परंपरा और प्रकृति से जुड़े भावनात्मक संबंधों का भी प्रतीक है। देश के विभिन्न राज्यों में उगाई जाने वाली सैकड़ों किस्में भारत की समृद्ध जैव विविधता और बागवानी क्षमता को दर्शाती हैं।
आम उत्सव ने एक बार फिर यह साबित किया कि कृषि विश्वविद्यालय केवल शिक्षा और अनुसंधान के केंद्र ही नहीं, बल्कि किसानों, वैज्ञानिकों और समाज को जोड़ने वाले सशक्त मंच भी हैं। यह आयोजन आम उत्पादन और बागवानी क्षेत्र के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ कृषि आधारित उद्यमिता को भी नई दिशा देने वाला साबित हुआ।
चित्र: सौजन्य सोशल मीडिया
