केवीके पोकरण का चार दिवसीय प्रशिक्षण किसानों के लिए बना वरदान!
पोकरण। किसानों को दलहनी फसलों की आधुनिक एवं वैज्ञानिक खेती की जानकारी देने के उद्देश्य से कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके), पोकरण में “दलहन उत्पादन तकनीक” विषय पर चार दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। प्रशिक्षण में क्षेत्र के विभिन्न गांवों से आए किसानों ने सक्रिय भागीदारी निभाई और विशेषज्ञों से उन्नत कृषि तकनीकों की जानकारी प्राप्त की।
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आधुनिक खेती के गुर सिखाए गए
प्रशिक्षण के दौरान सस्य वैज्ञानिक डॉ. के.जी. व्यास ने किसानों को दलहनी फसलों की उन्नत किस्मों, बीजोपचार, समय पर बुवाई, संतुलित उर्वरक प्रबंधन तथा समेकित पोषक तत्व प्रबंधन की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने मूंग की उन्नत किस्म एमएच-1142 तथा मोठ की काजरी मोठ-4 जैसी किस्मों को अपनाने की सलाह दी।
उन्होंने बताया कि खरपतवार नियंत्रण, समेकित कीट एवं रोग प्रबंधन, जल संरक्षण तकनीकों तथा फसल कटाई के बाद उचित प्रबंधन अपनाकर उत्पादन बढ़ाया जा सकता है। वैज्ञानिक अनुशंसाओं के अनुसार खेती करने से न केवल पैदावार में वृद्धि होती है, बल्कि उत्पादन लागत में भी कमी आती है।
कृषि और पशुपालन के एकीकृत मॉडल पर जोर
पशुपालन वैज्ञानिक डॉ. राम निवास ने किसानों को कृषि और पशुपालन के समन्वित मॉडल की उपयोगिता के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि दलहनी फसलों के अवशेष और भूसा पशुओं के लिए पौष्टिक चारे का महत्वपूर्ण स्रोत हैं, जिससे पशुपालन की लागत कम की जा सकती है।
उन्होंने संतुलित पशु पोषण, हरे चारे की उपलब्धता, चारा संरक्षण और पशु स्वास्थ्य प्रबंधन जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की। साथ ही किसानों को बताया कि कृषि और पशुपालन को एक साथ अपनाकर आय के अतिरिक्त स्रोत विकसित किए जा सकते हैं।
प्रदर्शन प्लॉटों का कराया गया भ्रमण
प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को कृषि विज्ञान केंद्र की विभिन्न प्रदर्शन इकाइयों और फसल प्रदर्शन प्लॉटों का भ्रमण भी कराया गया। यहां वैज्ञानिकों ने उन्नत तकनीकों का व्यावहारिक प्रदर्शन किया तथा किसानों की शंकाओं का समाधान किया। इस अवसर पर किसानों ने फसल प्रबंधन से जुड़े कई तकनीकी सवाल पूछे, जिनका विशेषज्ञों ने विस्तार से जवाब दिया।
किसानों ने बताया उपयोगी प्रशिक्षण
प्रतिभागी किसानों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम को अत्यंत लाभकारी बताते हुए कहा कि इससे उन्हें दलहनी फसलों की वैज्ञानिक खेती के बारे में नई जानकारी मिली है। किसानों ने भविष्य में भी ऐसे आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित करने की मांग की।
वैज्ञानिक तकनीकों के प्रसार का आह्वान
कार्यक्रम के समापन पर किसानों से अपील की गई कि वे प्रशिक्षण में प्राप्त वैज्ञानिक जानकारी और उन्नत तकनीकों को अपने खेतों में अपनाएं तथा अन्य किसानों तक भी इनका प्रसार करें। विशेषज्ञों ने कहा कि आधुनिक तकनीकों के व्यापक उपयोग से दलहन उत्पादन बढ़ेगा, मिट्टी की उर्वरता में सुधार होगा और किसानों की आय में भी सकारात्मक वृद्धि होगी।

