भोजपुर में बनेगा 31.21 करोड़ रुपये का इंटीग्रेटेड एक्वा पार्क, पटना में खुलेगा एनएफडीबी क्षेत्रीय केंद्र
पटना/भोजपुर, 14 जून। बिहार के मत्स्य क्षेत्र को आधुनिक तकनीक, बेहतर अवसंरचना और कौशल विकास के माध्यम से नई ऊंचाइयों पर पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया जा रहा है। केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी तथा पंचायती राज मंत्री Rajiv Ranjan Singh तथा बिहार के मुख्यमंत्री Samrat Choudhary 15 जून को भोजपुर जिले में 31.21 करोड़ रुपये की लागत से विकसित होने वाले अत्याधुनिक इंटीग्रेटेड एक्वा पार्क की आधारशिला रखेंगे। इसके साथ ही पटना में राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड (NFDB) के क्षेत्रीय केंद्र का भी उद्घाटन किया जाएगा।
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सरकार का मानना है कि ये दोनों परियोजनाएं बिहार को देश के प्रमुख अंतर्देशीय मत्स्य उत्पादन केंद्रों में स्थापित करने के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार, उद्यमिता और आय वृद्धि के नए अवसर पैदा करेंगी।
मत्स्य क्षेत्र में बिहार की बढ़ती ताकत
बिहार प्राकृतिक जल संसाधनों से समृद्ध राज्य है। यहां लगभग 1.22 लाख हेक्टेयर तालाब एवं पोखर, 64 हजार हेक्टेयर जलाशय, 9.5 लाख हेक्टेयर बाढ़ क्षेत्रीय आर्द्रभूमियां तथा 21 हजार किलोमीटर से अधिक लंबी नदियां और नहरें मौजूद हैं। यही कारण है कि राज्य में रोहू, कतला, मृगल, ग्रास कार्प, सिल्वर कार्प, तिलापिया, पैंगैसियस, मांगुर, पाबदा और सजावटी मछलियों का बड़े पैमाने पर उत्पादन किया जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आधुनिक तकनीकों और वैज्ञानिक प्रबंधन को व्यापक स्तर पर अपनाया जाए तो बिहार देश के सबसे बड़े अंतर्देशीय मत्स्य उत्पादन केंद्रों में शामिल हो सकता है।
11 वर्षों में 900 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश
केंद्र सरकार ने पिछले 11 वर्षों में बिहार के मत्स्य क्षेत्र के विकास के लिए 902.84 करोड़ रुपये की परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इनमें प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) के तहत 579.72 करोड़ रुपये का निवेश शामिल है।
इन निवेशों से राज्य में ब्रूड बैंक, आधुनिक हैचरी, रीसर्कुलेटरी एक्वाकल्चर सिस्टम (RAS), बायोफ्लॉक यूनिट, मत्स्य आहार संयंत्र, कोल्ड-चेन नेटवर्क, परिवहन सुविधाएं और जलीय रोग जांच प्रयोगशालाओं जैसी महत्वपूर्ण अवसंरचनाएं विकसित हुई हैं।
चौथे स्थान पर पहुंचा बिहार
इन योजनाओं का सकारात्मक परिणाम अब स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। बिहार का मछली उत्पादन पिछले एक दशक में दोगुने से अधिक बढ़ चुका है। राज्य अंतर्देशीय मत्स्य उत्पादन में देश में 9वें स्थान से उछलकर चौथे स्थान पर पहुंच गया है।
वर्तमान में बिहार प्रतिवर्ष लगभग 89,600 मीट्रिक टन मछली पड़ोसी राज्यों को भेज रहा है, जिससे राज्य एक शुद्ध मत्स्य निर्यातक के रूप में उभर रहा है। इससे हजारों मत्स्य पालकों और ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है।
आर्द्रभूमियों का होगा वैज्ञानिक उपयोग
राज्य में लगभग 9.5 लाख हेक्टेयर बाढ़ क्षेत्रीय झीलों और अनुपयोगी जल निकायों को शामिल करते हुए एक विशेष आर्द्रभूमि मत्स्य पालन क्लस्टर विकसित किया गया है।
इस पहल के तहत सामुदायिक मत्स्य प्रबंधन, वैज्ञानिक स्टॉकिंग, साझा प्रसंस्करण एवं भंडारण सुविधाओं और बेहतर विपणन व्यवस्था को बढ़ावा दिया जाएगा। इससे प्राकृतिक जल संसाधनों की उत्पादकता में उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है।
क्या होगा इंटीग्रेटेड एक्वा पार्क में खास?
भोजपुर के वनसौर फिश सीड फार्म में स्थापित होने वाला इंटीग्रेटेड एक्वा पार्क पूर्वी भारत के आधुनिक मत्स्य प्रशिक्षण और उत्पादन केंद्रों में से एक होगा।
इस परियोजना में शामिल होंगे:
- कार्प एवं कैटफिश हैचरी
- ब्रूडर इन्क्यूबेशन यूनिट
- बायोफ्लॉक प्रणाली
- आरएएस आधारित मत्स्य उत्पादन इकाइयां
- फिश फीड मिल
- जल गुणवत्ता एवं रोग परीक्षण प्रयोगशालाएं
- क्वारंटीन सुविधाएं
- 50 बिस्तरों वाला प्रशिक्षण एवं आवासीय हॉस्टल
यह पार्क गुणवत्तापूर्ण मत्स्य बीज उत्पादन, आधुनिक तकनीकों के प्रदर्शन और युवाओं के कौशल विकास का प्रमुख केंद्र बनेगा।
किसानों और युवाओं को मिलेगा सीधा लाभ
एनएफडीबी के सहयोग से यहां संरचित प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए जाएंगे, जिनमें मत्स्य पालकों, महिला स्वयं सहायता समूहों और ग्रामीण युवाओं को आधुनिक मत्स्य पालन की तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
विशेषज्ञों के अनुसार गुणवत्तापूर्ण बीज, वैज्ञानिक प्रबंधन और आधुनिक उत्पादन प्रणालियों के प्रयोग से किसानों की उत्पादन लागत घटेगी तथा प्रति इकाई उत्पादन और आय में वृद्धि होगी।
पटना का एनएफडीबी केंद्र बनेगा पूर्वी भारत का नॉलेज हब
पटना में स्थापित होने वाला एनएफडीबी क्षेत्रीय केंद्र बिहार सहित पूरे पूर्वी भारत के लिए तकनीकी और संस्थागत सहायता केंद्र के रूप में कार्य करेगा।
यह केंद्र आरएएस, बायोफ्लॉक, केज कल्चर, प्रिसिजन एक्वाकल्चर जैसी उन्नत तकनीकों को बढ़ावा देने के साथ-साथ परियोजनाओं की निगरानी, प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन और उद्यमिता विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा नया आधार
जानकारों का कहना है कि इंटीग्रेटेड एक्वा पार्क और एनएफडीबी क्षेत्रीय केंद्र मिलकर उत्पादन, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन, विपणन और निर्यात की एक मजबूत श्रृंखला तैयार करेंगे। इससे बिहार में मत्स्य क्षेत्र केवल उत्पादन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि एक संगठित एग्री-बिजनेस मॉडल के रूप में विकसित होगा।
सारांश
बिहार में स्थापित होने जा रही ये दोनों परियोजनाएं राज्य के मत्स्य क्षेत्र को तकनीक आधारित, रोजगारोन्मुख और निर्यात सक्षम बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकती हैं। यदि इनका प्रभावी क्रियान्वयन हुआ तो आने वाले वर्षों में बिहार देश की “ब्लू इकोनॉमी” का एक प्रमुख केंद्र बनकर उभर सकता है, जिससे लाखों मत्स्य पालकों और ग्रामीण परिवारों की आय में स्थायी वृद्धि का मार्ग प्रशस्त होगा।
फीचर चित्र: प्रतीकात्मक
