गोबर से कमाई का मॉडल, चंदौली में NDDB की अनोखी पहल!

चंदौली में ‘वेस्ट टू वेल्थ’ मॉडल की मिसाल: कृषि मंत्री ने एनडीडीबी के बायोगैस एवं जैविक खाद संयंत्र का किया निरीक्षण

गोबर से बन रही ऊर्जा और आय, 120 घरों तक पाइपलाइन से बायोगैस पहुंचाने की तैयारी

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चंदौली (उत्तर प्रदेश)। प्रदेश के कृषि मंत्री श्री सूर्य प्रताप शाही ने जनपद चंदौली के रामनगर स्थित राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) के मार्गदर्शन में स्थापित बायोगैस एवं जैविक खाद संयंत्र का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने संयंत्र की कार्यप्रणाली, किसानों को मिलने वाले लाभ तथा इसके पर्यावरणीय प्रभावों की जानकारी ली।

प्रतिदिन 5,000 किलो गोबर से तैयार हो रही बायोगैस

संयंत्र की क्षमता 200 क्यूबिक मीटर है, जहां प्रतिदिन लगभग 5,000 किलोग्राम गोबर का उपयोग कर बायोगैस का उत्पादन किया जा रहा है। यह परियोजना उत्तर प्रदेश की अपनी तरह की पहली पहल मानी जा रही है, जिसमें पाइपलाइन ग्रिड के माध्यम से करीब 120 घरों तक सीधे बायोगैस पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ और सुलभ ऊर्जा उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है।

सुधन’ ब्रांड के तहत तैयार हो रही प्रमाणित जैविक खाद

बायोगैस उत्पादन के बाद बचने वाली स्लरी को वैज्ञानिक तरीके से प्रोसेस कर एनडीडीबी के ट्रेडमार्क युक्त प्रमाणित जैविक खाद ‘सुधन’ तैयार की जाती है। यह खाद किसानों को रासायनिक उर्वरकों के विकल्प के रूप में उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे खेती की लागत कम होने के साथ-साथ मिट्टी की गुणवत्ता और उर्वरता में भी सुधार हो रहा है।

डेयरी किसानों को मिल रहा अतिरिक्त आय का स्रोत

संयंत्र के आसपास के डेयरी किसान अपना गोबर इस प्लांट को बेच रहे हैं। इससे उन्हें दूध उत्पादन के अलावा गोबर से भी नियमित अतिरिक्त आय प्राप्त हो रही है। विशेषज्ञों के अनुसार यह मॉडल पशुपालकों की आय बढ़ाने के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूत बना रहा है।

डेयरी उद्योग की ऊर्जा जरूरतें भी होंगी पूरी

यह बायोगैस संयंत्र वाराणसी मिल्क यूनियन के डेयरी प्लांट से मात्र 5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। भविष्य में यहां उत्पादित बायोगैस का उपयोग डेयरी प्लांट की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए किए जाने की योजना है। इससे ऊर्जा लागत में कमी और स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा मिलेगा।

पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता को मिल रहा बढ़ावा

इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य गोबर जैसे जैविक अपशिष्ट को उपयोगी संसाधनों में परिवर्तित कर “वेस्ट टू वेल्थ” मॉडल को साकार करना है। गोबर से निकलने वाली मीथेन गैस को ईंधन में बदलकर ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को कम किया जा रहा है। साथ ही खुले में गोबर के ढेर से होने वाली गंदगी और प्रदूषण पर भी प्रभावी नियंत्रण संभव हो रहा है।

ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ ईंधन की नई पहल

पाइप्ड बायोगैस व्यवस्था के माध्यम से गांवों में स्वच्छ ईंधन उपलब्ध कराने की दिशा में यह परियोजना महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। इससे ग्रामीण परिवारों की लकड़ी और एलपीजी पर निर्भरता कम होगी तथा घरेलू ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती मिलेगी।

सर्कुलर इकोनॉमी’ विजन का सफल उदाहरण

एनडीडीबी का यह संयंत्र “सर्कुलर इकोनॉमी” की अवधारणा का उत्कृष्ट उदाहरण माना जा रहा है, जहां गोबर को कचरा नहीं बल्कि आय, ऊर्जा और कृषि विकास के संसाधन के रूप में उपयोग किया जा रहा है। यह पहल केंद्र सरकार की गोबरधन योजना और आत्मनिर्भर भारत अभियान के उद्देश्यों को भी मजबूती प्रदान करती है।

जानकारों का कहना है कि यदि इस मॉडल को प्रदेश के अन्य डेयरी प्रधान जिलों में भी अपनाया जाए तो किसानों की आय बढ़ाने, जैविक खेती को प्रोत्साहन देने और स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में उल्लेखनीय परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं।