स्मार्ट उर्वरकों से बदलेगी गन्ना खेती की तस्वीर!

गन्ना विकास विभाग और इफको की वर्चुअल कार्यशाला में रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता घटाने पर जोर, 50% अनुदान पर स्प्रेयर उपलब्ध कराने की घोषणा

लखनऊ, 5 जून 2026। उत्तर प्रदेश में गन्ना खेती को अधिक टिकाऊ, पर्यावरण-अनुकूल और लाभकारी बनाने की दिशा में गन्ना विकास विभाग एवं इफको के संयुक्त तत्वावधान में एक महत्वपूर्ण वर्चुअल कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला की अध्यक्षता आयुक्त, गन्ना एवं चीनी, उत्तर प्रदेश ने की। कार्यक्रम में स्मार्ट उर्वरकों, जैव उर्वरकों और वैज्ञानिक कृषि तकनीकों के उपयोग को बढ़ावा देने पर विशेष बल दिया गया।

Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!

रासायनिक उर्वरकों के दुष्प्रभाव कम करने पर जोर !!

कार्यशाला को संबोधित करते हुए आयुक्त ने कहा कि रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से मृदा की उर्वरा शक्ति घट रही है, पर्यावरण प्रदूषित हो रहा है तथा मानव स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। ऐसे में नैनो उर्वरक, जैव उर्वरक एवं अन्य स्मार्ट कृषि उत्पाद भविष्य की आवश्यकता हैं।

उन्होंने प्रदेश की सभी चीनी मिलों को निर्देश दिए कि केवल स्वीकृत एवं अनुशंसित उर्वरकों और कीटनाशकों का ही वितरण किया जाए। किसानों को किसी भी परिस्थिति में अधोमानक अथवा अस्वीकृत कृषि रसायन उपलब्ध न कराए जाएं, अन्यथा संबंधित संस्थाओं के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी।

नैनो यूरिया और नैनो डीएपी से बढ़ेगी उत्पादकता !!

कार्यशाला में इफको के विशेषज्ञों ने नैनो यूरिया प्लस (तरल), नैनो डीएपी (तरल), सागरिका ग्रेन्युल, सागरिका तरल, जैव उर्वरक, वाटर सॉल्युबल फर्टिलाइजर (डब्ल्यूएसएफ) तथा नैचुरल पोटाश जैसे उत्पादों की उपयोगिता पर विस्तार से प्रकाश डाला।

विशेषज्ञों के अनुसार नैनो यूरिया प्लस पौधों को आवश्यक नाइट्रोजन अधिक दक्षता से उपलब्ध कराता है, जिससे फसल विकास के साथ-साथ मृदा स्वास्थ्य में भी सुधार होता है। वहीं नैनो डीएपी के बीज एवं पौध उपचार से अंकुरण क्षमता, जड़ विकास और पौध वृद्धि में उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखी गई है।

प्रत्येक चीनी मिल क्षेत्र में लगेंगे प्रदर्शन प्लॉट !!

किसानों को स्मार्ट उर्वरकों के प्रत्यक्ष लाभ दिखाने के उद्देश्य से आयुक्त ने प्रदेश के प्रत्येक चीनी मिल क्षेत्र में पांच-पांच प्रदर्शन प्लॉट स्थापित करने के निर्देश दिए। फसल की परिपक्वता के समय इन प्लॉटों पर किसान गोष्ठियों का आयोजन कर परिणामों और अनुभवों को साझा किया जाएगा, जिससे अन्य किसान भी नई तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित हों।

15 हजार स्प्रेयर अनुदान पर उपलब्ध होंगे !!

स्मार्ट उर्वरकों के प्रभावी उपयोग को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश की गन्ना समितियों के माध्यम से किसानों को 50 प्रतिशत अनुदान पर 5,000 पावर स्प्रेयर और 10,000 बैटरी स्प्रेयर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए। इससे किसानों को उर्वरकों एवं कृषि रसायनों का वैज्ञानिक ढंग से छिड़काव करने में सुविधा मिलेगी तथा कृषि लागत भी कम होगी।

आत्मनिर्भर भारत के लिए जरूरी स्मार्ट उर्वरक !!

कार्यक्रम में शामिल कृषि वैज्ञानिकों ने बताया कि स्मार्ट उर्वरकों के प्रयोग से उत्पादन लागत में कमी आती है, फसल की गुणवत्ता बेहतर होती है तथा पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में सहायता मिलती है। उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और सतत विकास के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए स्मार्ट एवं जैविक विकल्पों का व्यापक उपयोग आवश्यक है।

एक पेड़ मां के नाम’ अभियान को मिलेगा बढ़ावा !!

विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर कार्यशाला में सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के अंतर्गत पौधारोपण का संकल्प दिलाया गया। गन्ना समितियों, परिषदों, चीनी मिलों तथा क्षेत्रीय कार्यालयों में व्यापक वृक्षारोपण अभियान चलाने का आह्वान किया गया। आयुक्त ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण और कृषि विकास एक-दूसरे के पूरक हैं।

किसानों तक पहुंचेगी वैज्ञानिक जानकारी !!

कार्यशाला में यह निर्णय भी लिया गया कि सभी गन्ना समितियों के गोदामों एवं कार्यालयों पर स्मार्ट उर्वरकों, बायोफर्टिलाइजर एवं बायोपेस्टिसाइड्स के उपयोग संबंधी बैनर, पोस्टर और प्रचार सामग्री प्रदर्शित की जाएगी। साथ ही इफको को प्रत्येक माह ऐसी कार्यशालाएं आयोजित कर किसानों को नवीन कृषि तकनीकों और उत्पादों की अद्यतन जानकारी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए।

बड़ी संख्या में जुड़े किसान और विशेषज्ञ !!

कार्यक्रम में अपर गन्ना आयुक्त (प्रशासन) अभिषेक आनंद, अपर गन्ना आयुक्त (विकास) वी.के. शुक्ल, अपर गन्ना आयुक्त (समितियां) वी.बी. सिंह, अपर गन्ना आयुक्त (क्रय) विश्वेश कनौजिया, इफको के वरिष्ठ अधिकारी, कृषि वैज्ञानिक, प्रगतिशील किसान तथा प्रदेश भर के बड़ी संख्या में गन्ना किसान ऑनलाइन माध्यम से जुड़े। अंत में धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यशाला का समापन हुआ।