AI आधारित RAISE ऐप से होगी फसल समस्याओं की पहचान!

खेत बचाओ अभियान: आंध्र प्रदेश के बापटला में किसानों को मृदा परीक्षण, IPM और AI आधारित RAISE ऐप का प्रशिक्षण

बापटला (आंध्र प्रदेश), कृषि वैज्ञानिकों और कृषि विभाग के संयुक्त प्रयास से आंध्र प्रदेश के बापटला जिले के अमृतलूरु मंडल के इंटूरु गांव में “खेत बचाओ अभियान” (Khet Bachao Abhiyan-KBA) के अंतर्गत किसान जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों को मृदा परीक्षण आधारित उर्वरक प्रबंधन, खरीफ पूर्व हरी खाद फसलों के महत्व तथा रासायनिक कीटनाशकों के विवेकपूर्ण उपयोग के प्रति जागरूक करना था।

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मृदा परीक्षण आधारित खेती पर दिया गया जोर

कार्यक्रम के दौरान कृषि वैज्ञानिक डॉ. ब्रजेन्द्र ने किसानों को रैपिड सॉयल टेस्टिंग किट के उपयोग का प्रदर्शन किया और खेतों की मिट्टी में प्रमुख पोषक तत्वों की स्थिति का आकलन करने की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का उपयोग करने से उत्पादन लागत घटती है, मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है और फसलों की उत्पादकता में वृद्धि होती है।

खरीफ से पहले हरी खाद फसलों को अपनाने की अपील

वैज्ञानिकों ने किसानों को खरीफ सीजन से पूर्व ढैंचा, सनहेम्प जैसी हरी खाद फसलों की खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने बताया कि हरी खाद फसलें मिट्टी में जैविक कार्बन बढ़ाने, पोषक तत्वों की उपलब्धता सुधारने तथा रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

धान किसानों के लिए उपयोगी साबित हो रहा RAISE मोबाइल ऐप

डॉ. बी. सैलजा ने किसानों को Rice AI Stress Evaluator (RAISE) मोबाइल एप्लीकेशन के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित ऐप धान की फसलों में विभिन्न प्रकार के तनावों और समस्याओं की पहचान करने में सहायता करता है। कार्यक्रम के दौरान 60 किसानों के मोबाइल फोन में यह ऐप इंस्टॉल कराया गया, जिससे वे समय रहते फसल संबंधी समस्याओं की पहचान कर उचित समाधान प्राप्त कर सकेंगे।

संतुलित उर्वरक उपयोग और खरपतवार प्रबंधन पर प्रशिक्षण

डॉ. बी. श्रीदेवी ने धान की खेती में रासायनिक उर्वरकों के संतुलित एवं आवश्यकता आधारित उपयोग पर बल दिया। उन्होंने किसानों को समेकित खरपतवार प्रबंधन (Integrated Weed Management) की तकनीकों से अवगत कराते हुए बताया कि वैज्ञानिक तरीकों को अपनाकर खरपतवार नियंत्रण की लागत कम की जा सकती है और फसल उत्पादन बढ़ाया जा सकता है।

समेकित कीट प्रबंधन से घटेगा रासायनिक कीटनाशकों का उपयोग

डॉ. सीएच. पद्मावती ने धान की फसल में लगने वाले प्रमुख कीटों और उनके नियंत्रण के लिए समेकित कीट प्रबंधन (IPM) तकनीकों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि फेरोमोन ट्रैप, जैविक नियंत्रण एजेंटों तथा नियमित निगरानी जैसी तकनीकों को अपनाकर रासायनिक कीटनाशकों के उपयोग को काफी हद तक कम किया जा सकता है, जिससे पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य दोनों सुरक्षित रहते हैं।

किसानों और कृषि अधिकारियों की रही सक्रिय भागीदारी

कार्यक्रम में जिला कृषि अधिकारी ए. लक्ष्मी, मंडल कृषि अधिकारी हेमंत भारत कुमार, डीपीएम-एपीसीएनएफ मधु मोहन, पीएसीएस अध्यक्ष कटरागड्डा लक्ष्मी प्रसाद, पीएसीएस के सीईओ राजेंद्र रेड्डी, कृषि विस्तार अधिकारी डी. माधवी तथा कृषि सहायक वेंकट तिरुपति राव एवं लंका प्रियंका सहित कई कृषि अधिकारी उपस्थित रहे।

इस जागरूकता कार्यक्रम में कुल 60 किसानों ने भाग लिया, जिनमें 35 महिला एवं 25 पुरुष किसान शामिल थे। किसानों ने मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन, आधुनिक कृषि तकनीकों और टिकाऊ खेती के उपायों को लेकर विशेष रुचि दिखाई।

टिकाऊ खेती की दिशा में महत्वपूर्ण पहल

विशेषज्ञों के अनुसार, “खेत बचाओ अभियान” जैसी पहलें किसानों को टिकाऊ कृषि पद्धतियों से जोड़ने, मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, उत्पादन लागत में कमी तथा पर्यावरण-अनुकूल खेती को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। ऐसे कार्यक्रम कृषि क्षेत्र में वैज्ञानिक सोच और तकनीकी नवाचारों के प्रसार को भी गति प्रदान कर रहे हैं।