वैज्ञानिकों ने बताया कैसे घटेगी रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता!

संतुलित उर्वरक उपयोग और जैविक खेती को बढ़ावा देने हेतु किसान जागरूकता कार्यक्रम आयोजित !!

किसानों को वैज्ञानिकों ने दिए मृदा स्वास्थ्य संरक्षण और जैविक खेती के महत्वपूर्ण सुझाव

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भा.कृ.अनु.प.– भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान द्वारा उर्वरक जागरूकता अभियान के तहत 27 मई 2026 को ग्राम धनापुर, पनियरा में “संतुलित उर्वरक उपयोग एवं जैविक खेती” विषय पर किसान जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में किसानों को आधुनिक एवं टिकाऊ खेती पद्धतियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। कार्यक्रम का नेतृत्व वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. त्रिभुवन चौबे ने किया। इस अवसर पर डॉ. केशव गौतम एवं डॉ. श्रेया पंवार ने किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग, वर्मी कम्पोस्ट, जैव उर्वरकों तथा समन्वित पोषण प्रबंधन की वैज्ञानिक तकनीकों से अवगत कराया। वैज्ञानिकों ने बताया कि लगातार रासायनिक उर्वरकों के असंतुलित प्रयोग से मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है, जिससे उत्पादन लागत बढ़ने के साथ-साथ भूमि की उर्वराशक्ति भी कम हो रही है।

समन्वित पोषण प्रबंधन से बढ़ेगा उत्पादन !!

विशेषज्ञों ने किसानों को समझाया कि जैविक एवं रासायनिक उर्वरकों के संतुलित उपयोग से फसलों की उत्पादकता में वृद्धि की जा सकती है। साथ ही मिट्टी की संरचना, जल धारण क्षमता और सूक्ष्म पोषक तत्वों का संतुलन भी बेहतर बना रहता है। वैज्ञानिकों ने कहा कि समन्वित पोषण प्रबंधन अपनाने से खेती अधिक टिकाऊ और पर्यावरण के अनुकूल बन सकती है।

ट्राइकोडर्मा और जैव उर्वरकों के उपयोग पर जोर !!

कार्यक्रम के दौरान किसानों को ट्राइकोडर्मा एवं अन्य जैव उर्वरकों के प्रयोग की विधि और लाभों के बारे में भी जानकारी दी गई। वैज्ञानिकों ने बताया कि जैव उर्वरक मिट्टी में लाभकारी सूक्ष्मजीवों की संख्या बढ़ाते हैं, जिससे पौधों की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है और रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होती है। इसके अलावा जैविक खेती से प्राप्त उपज स्वास्थ्य के लिए अधिक सुरक्षित एवं गुणवत्तायुक्त मानी जाती है।

किसान-वैज्ञानिक संवाद में उठे कई सवाल !!

कार्यक्रम में आयोजित किसान-वैज्ञानिक संवाद सत्र किसानों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। इस दौरान किसानों ने उर्वरकों के सही उपयोग, मिट्टी परीक्षण, जैविक कीटनाशकों और फसल रोग प्रबंधन से जुड़े सवाल पूछे, जिनका वैज्ञानिकों ने सरल भाषा में समाधान किया। ग्राम प्रधान श्री चंद्रजीत यादव सहित कुल 107 किसानों ने कार्यक्रम में भाग लिया, जिनमें 68 महिला एवं 39 पुरुष किसान शामिल रहे। किसानों ने ऐसे कार्यक्रमों को कृषि के लिए अत्यंत लाभकारी बताते हुए भविष्य में भी नियमित रूप से वैज्ञानिक जागरूकता शिविर आयोजित करने की मांग की।

जैविक खेती की ओर बढ़ता किसानों का रुझान !!

विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती उत्पादन लागत और मिट्टी की घटती उर्वराशक्ति को देखते हुए अब किसान धीरे-धीरे जैविक एवं प्राकृतिक खेती की ओर आकर्षित हो रहे हैं। ऐसे जागरूकता अभियान किसानों को नई तकनीकों से जोड़ने और टिकाऊ कृषि प्रणाली विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

Source:IIVR