केंद्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान में होगा बड़े स्तर पर वृक्षारोपण!

मथुरा में हरित विकास की बड़ी पहल, केंद्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान और सामाजिक वानिकी प्रभाग के बीच एमओयू

पर्यावरण संरक्षण को लेकर उठाया गया महत्वपूर्ण कदम

मथुरा, 22 मई 2026। पर्यावरण संरक्षण, जलवायु संतुलन और सतत विकास को बढ़ावा देने की दिशा में केंद्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। संस्थान ने सामाजिक वानिकी प्रभाग के साथ एक अहम समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस साझेदारी का उद्देश्य संस्थान परिसर और आसपास के क्षेत्रों में हरित आवरण बढ़ाकर पर्यावरणीय संतुलन को मजबूत करना है।

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“एक पेड़ माँ के नाम” अभियान को मिलेगा बल

यह समझौता केंद्र और राज्य सरकार द्वारा संचालित पर्यावरणीय अभियानों को मजबूती प्रदान करेगा। विशेष रूप से “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान, भूमि क्षरण नियंत्रण, कार्बन सिंक निर्माण, जैव विविधता संरक्षण और स्थानीय सूक्ष्म जलवायु सुधार जैसे राष्ट्रीय लक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए इस पहल को आगे बढ़ाया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि तेजी से बढ़ते तापमान और प्रदूषण की चुनौतियों के बीच इस प्रकार की पहल समय की आवश्यकता बन चुकी है।

संस्थान उपलब्ध कराएगा भूमि, सामाजिक वानिकी करेगा देखरेख

एमओयू के तहत केंद्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान वृक्षारोपण के लिए बड़े पैमाने पर भूमि उपलब्ध कराएगा। वहीं सामाजिक वानिकी प्रभाग वैज्ञानिक एवं तकनीकी मानकों के अनुरूप पौधारोपण, सिंचाई, पौधों की सुरक्षा, पौध प्रतिस्थापन और आगामी 10 वर्षों तक रखरखाव का कार्य करेगा। अधिकारियों के अनुसार केवल पौधे लगाने तक सीमित रहने के बजाय उन्हें जीवित रखने और विकसित करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

स्थानीय जलवायु के अनुरूप होगा पौधों का चयन

परियोजना के तहत ऐसे पौधों की प्रजातियों का चयन किया जाएगा जो स्थानीय जलवायु और पारिस्थितिकी के अनुकूल हों। इससे क्षेत्र में हरित क्षेत्र का विस्तार होने के साथ-साथ जैव विविधता संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा। पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार स्थानीय प्रजातियों के पौधे मिट्टी संरक्षण, वर्षा जल संचयन और कार्बन अवशोषण क्षमता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

पर्यावरण संरक्षण के प्रति संस्थान की प्रतिबद्धता

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. मनीष कुमार चेटली ने कहा कि संस्थान कृषि एवं पशुपालन अनुसंधान के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और हरित विकास के प्रति भी पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि यह परियोजना परिसर में हरित क्षेत्र के विस्तार, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और स्वच्छ वातावरण के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

उन्होंने कहा कि आज के समय में केवल उत्पादन बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि प्राकृतिक संसाधनों को संरक्षित रखना भी उतना ही जरूरी है। इस पहल से संस्थान के वैज्ञानिकों, कर्मचारियों और विद्यार्थियों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता और जिम्मेदारी की भावना भी विकसित होगी।

वृक्षारोपण सामाजिक जिम्मेदारी भी: वेंकटा श्रीकर पटेल

वेंकटा श्रीकर पटेल ने अपने संबोधन में कहा कि वृक्षारोपण केवल पर्यावरणीय आवश्यकता नहीं, बल्कि सामाजिक उत्तरदायित्व भी है। उन्होंने कहा कि यह संयुक्त अभियान क्षेत्र में कार्बन अवशोषण क्षमता बढ़ाने, मिट्टी एवं जल संरक्षण को मजबूत करने और क्षेत्रीय पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ बनाने में सहायक सिद्ध होगा।

उन्होंने यह भी बताया कि परियोजना के तहत पौधों की दीर्घकालिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए समय-समय पर तकनीकी निरीक्षण और निगरानी की व्यवस्था की जाएगी, ताकि पौधों की जीवित रहने की दर अधिकतम बनी रहे।