लखनऊ कृषि सम्मेलन 2026: खेती को नई दिशा, समग्र विकास के लिए केंद्र-राज्य मिलकर बनाएंगे रोडमैप
लखनऊ, 24अप्रैल। उत्तर भारत की खेती-किसानी को नई दिशा देने के उद्देश्य से आयोजित उत्तर क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन में कृषि विकास, किसान कल्याण और फसल विविधीकरण को लेकर एक स्पष्ट और परिणामोन्मुख रोडमैप सामने आया। सम्मेलन के समापन सत्र में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि अब खेती से जुड़े मुद्दे केवल बैठकों तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि उन पर समयबद्ध कार्ययोजना बनाकर नियमित समीक्षा की जाएगी।
उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र को आगे बढ़ाने के लिए केंद्र और राज्यों को “टीम इंडिया” की भावना से मिलकर काम करना होगा। किस राज्य में किस दल की सरकार है, यह महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि सभी सरकारों का साझा लक्ष्य किसानों का कल्याण, खेती की उन्नति और कृषि क्षेत्र की मजबूती होना चाहिए।
किसान हित के मुद्दों पर हर तीन महीने में समीक्षा
सम्मेलन में उठाए गए सभी मुद्दों पर ठोस कार्ययोजना तैयार करने और हर तीन महीने में उसकी समीक्षा करने का निर्णय लिया गया। राज्यों से कहा गया कि वे कृषि, बागवानी, बीज, खरीद व्यवस्था और किसान कल्याण से जुड़े अपने प्रस्ताव समय पर केंद्र को भेजें, ताकि योजनाओं की स्वीकृति और पहली किस्त जारी करने में देरी न हो।
मंत्री ने स्पष्ट किया कि योजनाओं के बजट का समय पर उपयोग बेहद जरूरी है, क्योंकि खर्च की गति का सीधा असर भविष्य के बजट और अगली किस्तों पर पड़ता है।
बीज, मिट्टी और उर्वरक पर साफ फोकस
सम्मेलन में अच्छी खेती की बुनियाद के रूप में उच्च गुणवत्ता वाले बीज पर विशेष जोर दिया गया। ब्रीडर सीड, फाउंडेशन सीड और सर्टिफाइड सीड की पूरी श्रृंखला को मजबूत बनाने की बात कही गई। साथ ही राज्यों से नई किस्मों को केवल जारी करने तक सीमित न रखकर उन्हें खेत तक पहुंचाने की प्रभावी व्यवस्था विकसित करने को कहा गया।
मृदा स्वास्थ्य को खेती की दीर्घकालिक सफलता का आधार बताते हुए सॉइल हेल्थ कार्ड को व्यवहारिक बनाने, जिलेवार मिट्टी की जानकारी साझा करने और किसानों तक वैज्ञानिक सलाह पहुंचाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
उर्वरकों के संतुलित उपयोग पर बोलते हुए कहा गया कि किसान मिट्टी की वास्तविक जरूरत के अनुसार ही खाद का प्रयोग करें, ताकि लागत घटे और उत्पादन बेहतर हो।
नकली बीज-खाद पर सख्ती
सम्मेलन में नकली बीज, नकली खाद और घटिया कीटनाशकों के खिलाफ सख्त अभियान चलाने का संदेश भी दिया गया। प्रयोगशालाओं के बेहतर उपयोग, समयबद्ध सैंपल जांच और दोषियों के खिलाफ प्रभावी कानूनी कार्रवाई की आवश्यकता पर बल दिया गया।
यह भी संकेत दिया गया कि सीड एक्ट और पेस्टिसाइड एक्ट में कठोर प्रावधान लाने की तैयारी की जा रही है, ताकि किसानों के साथ धोखाधड़ी करने वालों पर कड़ा शिकंजा कसा जा सके।
छोटे किसानों के लिए इंटीग्रेटेड फार्मिंग मॉडल
सम्मेलन में छोटे और सीमांत किसानों की आय बढ़ाने के लिए इंटीग्रेटेड फार्मिंग मॉडल को आगे बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया। इसमें फसल पैदावार के साथ पशुपालन, मछली पालन, मधुमक्खी पालन, बागवानी और वृक्ष आधारित खेती को जोड़ने की रणनीति पर चर्चा हुई।
विशेषज्ञों ने माना कि कम जोत वाले किसानों के लिए यही मॉडल अधिक लाभकारी साबित हो सकता है।
दलहन-तिलहन में आत्मनिर्भरता लक्ष्य
खाद्यान्न उत्पादन में रिकॉर्ड उपलब्धियों के बावजूद दलहन और तिलहन में आत्मनिर्भरता को सम्मेलन का प्रमुख एजेंडा बनाया गया। भरोसेमंद खरीद व्यवस्था, पारदर्शिता और सरकारी वादों के अक्षरशः पालन पर जोर दिया गया।
सरकार की रणनीति छह प्रमुख बिंदुओं पर आधारित बताई गई—
उत्पादन बढ़ाना, लागत घटाना, उचित मूल्य दिलाना, नुकसान की भरपाई, विविधीकरण और बाजार से जोड़ना।
डिजिटल कृषि और फार्मर आईडी पर जोर
सम्मेलन में डिजिटल कृषि, किसान क्रेडिट कार्ड और फार्मर आईडी को लेकर भी व्यापक चर्चा हुई। फार्मर आईडी के माध्यम से किसानों की जमीन, खसरा नंबर, पशुधन और योजनाओं से जुड़ी जानकारी एक मंच पर उपलब्ध कराने की योजना को कृषि शासन में बड़ा बदलाव बताया गया।
इससे किसानों को योजनाओं का लाभ अधिक तेज, पारदर्शी और लक्षित तरीके से मिल सकेगा।
प्राकृतिक खेती और टिकाऊ कृषि पर चर्चा
सम्मेलन में प्राकृतिक खेती को भी कृषि के भविष्य के रूप में प्रस्तुत किया गया। असंतुलित रासायनिक उपयोग से मिट्टी और मानव स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव को देखते हुए प्राकृतिक कृषि मिशन को तेजी से आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया।
संक्रमण काल में किसानों को आर्थिक सहायता देने की व्यवस्था पर भी चर्चा हुई, ताकि वे इस बदलाव को सहज रूप से अपना सकें।
उत्तर भारत के लिए नई नीति दिशा
लखनऊ सम्मेलन से यह स्पष्ट संदेश निकला कि अब उत्तर भारत की खेती को क्षेत्रीय जरूरतों, जलवायु, जल उपलब्धता और स्थानीय फसली परिस्थितियों के आधार पर आगे बढ़ाया जाएगा। खरीफ और रबी सीजन की रणनीति के साथ-साथ कृषि प्रसंस्करण, निर्यात, बागवानी और वैल्यू एडिशन पर भी समन्वित प्रयास किए जाएंगे।
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि इस सम्मेलन से निकलने वाला रोडमैप आने वाले समय में किसानों की आय, उत्पादन और टिकाऊ खेती के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।


























