पोकरण में 15 दिवसीय उर्वरक विक्रेता प्रशिक्षण शिविर संपन्न

किसानों तक ‘संतुलित खाद’ का संदेश ले जाएंगे 35 प्रतिभागी

पोकरण, राजस्थान –कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) पोकरण में खुदरा उर्वरक विक्रय प्राधिकार विषयक 15 दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का मंगलवार को समापन हो गया। कार्यक्रम के अंत में 35 प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए। इस प्रशिक्षण में जैसलमेर के अलावा जोधपुर, फलोदी, बीकानेर, बाड़मेर, सवाई माधोपुर, चूरू, झुंझुनूं और भरतपुर जिलों के प्रतिभागियों ने भाग लिया।

Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!

किसानों और विज्ञान के बीच ‘कड़ी’ बनेंगे विक्रेता

समापन समारोह के मुख्य अतिथि पोकरण विधायक महंत प्रताप पुरी ने कहा कि उर्वरक विक्रेता गांव स्तर पर किसानों के सबसे नजदीकी सलाहकार होते हैं। ऐसे में उनकी भूमिका केवल बिक्री तक सीमित नहीं, बल्कि वैज्ञानिक जानकारी को खेत तक पहुंचाने की भी है। उन्होंने प्रशिक्षणार्थियों से आह्वान किया कि वे कृषि विज्ञान केंद्र से मिले ज्ञान को अधिक से अधिक किसानों तक पहुंचाएं और उन्हें सही उर्वरक उपयोग के लिए प्रेरित करें।

मृदा स्वास्थ्य कार्ड के आधार पर करें उर्वरक उपयोग

महंत प्रताप पुरी ने कहा कि “मनुष्य और मिट्टी दोनों का स्वास्थ्य सही रखना जरूरी है।” इसके लिए किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड बनवाकर उसी के अनुसार संतुलित उर्वरकों का उपयोग करना चाहिए। सही समय, सही मात्रा और सही तरीके से खाद देने पर फसल उत्पादन बढ़ेगा और लागत में भी कमी आएगी।

‘फर्स्ट फ्रेंड’ हैं उर्वरक विक्रेता

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए केंद्र प्रभारी डॉ. दशरथ प्रसाद ने कहा कि खुदरा उर्वरक विक्रेता गांवों में किसानों के ‘प्रथम मित्र’ होते हैं। ऐसे में उन्हें पारदर्शिता और जिम्मेदारी के साथ काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि कृषि में उत्पादकता और किसानों की आय बढ़ाने के लिए इनपुट उपयोग दक्षता, उन्नत तकनीक और मशीनीकरण को अपनाना जरूरी है।

आत्मनिर्भरता के बाद अब गुणवत्ता पर फोकस

डॉ. प्रसाद ने कहा कि देश खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भर हो चुका है, लेकिन अब गुणवत्ता सुधार पर ध्यान देना समय की मांग है। यदि गुणवत्ता पर ध्यान नहीं दिया गया तो इसका सीधा असर मानव स्वास्थ्य पर पड़ सकता है।

प्रशिक्षण में क्या-क्या सिखाया गया

15 दिन के इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रतिभागियों को उर्वरकों के संतुलित उपयोग, मृदा परीक्षण, पोषक तत्व प्रबंधन, फसलवार सिफारिशें, उर्वरक गुणवत्ता नियंत्रण और संबंधित नियमों की जानकारी दी गई। व्यावहारिक सत्र और विशेषज्ञ व्याख्यान के जरिए प्रतिभागियों की समझ को मजबूत किया गया।

प्रतिभागियों ने बताया—‘ज्ञानवर्धक और उपयोगी’

प्रशिक्षण पूरा करने के बाद प्रतिभागियों ने इसे बेहद उपयोगी और ज्ञानवर्धक बताया। उनका कहना था कि इस प्रशिक्षण से उन्हें किसानों को बेहतर सलाह देने और अपने व्यवसाय को वैज्ञानिक तरीके से आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।

इस प्रशिक्षण को सफल बनाने में कृषि वैज्ञानिक डॉ. सुनील शर्मा, डॉ. के. जी. व्यास और डॉ. रामनिवास ढाका की महत्वपूर्ण भूमिका रही। अंत में केंद्र अध्यक्ष डॉ. दशरथ प्रसाद ने सभी अतिथियों, प्रतिभागियों और स्टाफ का आभार व्यक्त किया।