धान की खेती से सिर्फ अनाज ही नहीं, बल्कि कार्बन क्रेडिट से भी कमाई होगी!

भारत के किसानों से कार्बन क्रेडिट खरीदेगी Amazon, 280 करोड़ का समझौता

नई दिल्ली  –अमेरिकी ई-कॉमर्स दिग्गज Amazon ने भारत में कृषि क्षेत्र से जुड़े अब तक के सबसे बड़े कार्बन क्रेडिट सौदों में से एक पर हस्ताक्षर किए हैं। जानकारी के अनुसार, कंपनी ने लगभग 30 मिलियन डॉलर (करीब 280 करोड़ रुपये) का समझौता Good Rice Alliance के साथ किया है, जिसके तहत भारतीय किसानों द्वारा उत्पन्न कार्बन क्रेडिट खरीदे जाएंगे।

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यह डील भारत में अपनी तरह की पहली और वैश्विक स्तर पर भी सबसे बड़ी कृषि-आधारित कार्बन क्रेडिट खरीद में से एक मानी जा रही है। अब तक ऐसे बड़े समझौते मुख्य रूप से नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में होते रहे हैं।

किसानों और पर्यावरण दोनों को फायदा

Good Rice Alliance वर्तमान में भारत के 35,000 हेक्टेयर क्षेत्र में फैले 13,000 से अधिक छोटे किसानों के साथ काम कर रहा है। यह संगठन किसानों को टिकाऊ धान उत्पादन तकनीकों को अपनाने के लिए प्रशिक्षण, तकनीकी सहायता और वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान करता है।

इस पहल में जर्मनी की कंपनी Bayer की प्रमुख भूमिका है, साथ ही Temasek की इकाई GenZero और Shell की Nature-Based Solutions भी इसमें साझेदार हैं।

मीथेन उत्सर्जन में बड़ी कटौती का लक्ष्य

पारंपरिक धान की खेती में खेतों को लगातार पानी से भरा जाता है, जिससे वैश्विक मीथेन उत्सर्जन का 8-10% हिस्सा पैदा होता है। भारत, जो दुनिया का सबसे बड़ा धान उत्पादक है, मीथेन उत्सर्जन में तीसरे स्थान पर है।

नई तकनीकों—जैसे Alternate Wetting and Drying (AWD) और Direct Seeded Rice (DSR)—को अपनाने से खेतों में पानी का उपयोग कम होगा और मीथेन उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी आएगी।

विशेषज्ञों के अनुसार, मीथेन एक “सुपर प्रदूषक” है, जिसकी ग्लोबल वार्मिंग क्षमता कार्बन डाइऑक्साइड से 27 गुना अधिक है। ऐसे में इसके उत्सर्जन में कमी जलवायु परिवर्तन को धीमा करने में अहम भूमिका निभा सकती है।

अमेज़न के नेट-ज़ीरो लक्ष्य की ओर कदम

इस समझौते के तहत शुरुआती चरण में 6.85 लाख मीट्रिक टन कार्बन-डाइऑक्साइड-समतुल्य (CO₂e) क्रेडिट कवर किए जाएंगे। यह कदम Amazon के वैश्विक उत्सर्जन को संतुलित करने और नेट-ज़ीरो लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

ग्लोबल ट्रेंड: टेक कंपनियों का झुकाव

दुनियाभर में बड़ी टेक कंपनियां अपने कार्बन फुटप्रिंट को कम करने के लिए ऐसे समझौतों की ओर बढ़ रही हैं। हाल ही में Microsoft ने सॉयल कार्बन क्रेडिट के लिए 171-228 मिलियन डॉलर का करार किया, जबकि Meta ने फॉरेस्ट्री क्रेडिट के लिए 16 मिलियन डॉलर तक का सौदा किया है। Shell भी हर साल बड़ी मात्रा में कार्बन क्रेडिट खरीदने वाली कंपनियों में शामिल है।

भारत में कार्बन मार्केट को मिलेगा बढ़ावा

भारत फिलहाल अपने पहले औपचारिक कार्बन ट्रेडिंग कार्यक्रम को लॉन्च करने के अंतिम चरण में है। अभी देश में अधिकांश कार्बन ट्रेडिंग स्वैच्छिक आधार पर होती है, लेकिन इस तरह के बड़े अंतरराष्ट्रीय समझौते आने वाले समय में भारतीय कार्बन बाजार को नई दिशा दे सकते हैं।

सारांश

यह सौदा न केवल भारतीय किसानों की आय बढ़ाने का माध्यम बनेगा, बल्कि जलवायु परिवर्तन से लड़ाई में भारत की भूमिका को भी मजबूत करेगा। टिकाऊ खेती और वैश्विक निवेश का यह मेल आने वाले समय में कृषि क्षेत्र के लिए नई संभावनाएं खोल सकता है।