कृषि सौरकरण को बढ़ावा: ICAR-Indian Agricultural Research Institute में राष्ट्रीय मंच, किसानों के लिए नई ऊर्जा क्रांति !!
नई दिल्ली -देश में कृषि को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए ICAR-Indian Agricultural Research Institute (आईएआरआई), नई दिल्ली में “राष्ट्रीय कृषि सौरकरण मंच” का आयोजन किया गया। यह महत्वपूर्ण कार्यक्रम International Water Management Institute (आईडब्ल्यूएमआई) के सहयोग से प्रो. एम.एस. स्वामीनाथन लाइब्रेरी में आयोजित हुआ, जिसमें देशभर के वैज्ञानिक, नीति-निर्माता और कृषि क्षेत्र से जुड़े हितधारकों ने हाइब्रिड मोड में भाग लिया। कार्यक्रम का मुख्य फोकस कृषि में सौर ऊर्जा के उपयोग को तेज़ी से बढ़ाने और इसे राष्ट्रीय स्तर पर लागू करने की रणनीति तैयार करना रहा।
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सामूहिक रणनीति पर जोर !!
आईएआरआई के निदेशक डॉ. च. श्रीनिवास राव ने अपने संबोधन में कहा कि कृषि के सौरकरण को बढ़ाने के लिए एक मजबूत सामूहिक कार्ययोजना की जरूरत है। उन्होंने सिंचाई, कृषि कार्यों और एग्रीवोल्टैक्स जैसे क्षेत्रों को प्राथमिकता देने की बात कही। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि खेतों और घरों की छतों को ऊर्जा उत्पादन केंद्र के रूप में विकसित करना समय की मांग है। साथ ही, छोटे किसानों तक इस तकनीक की पहुंच बढ़ाने और सोलर पैनलों की दक्षता सुधारने पर भी जोर दिया।
जल और ऊर्जा का संतुलन जरूरी !! 
आईडब्ल्यूएमआई के एमेरिटस वैज्ञानिक डॉ. आलोक सिक्का ने कहा कि भारत में कृषि सौरकरण अब एक उन्नत स्तर पर पहुंच चुका है। लेकिन इसके साथ ही भूजल संरक्षण को प्राथमिकता देना बेहद जरूरी है। उन्होंने बताया कि सौर ऊर्जा आधारित प्रणालियां ऐसी व्यवस्था बना सकती हैं, जहां ऊर्जा का सतत उपयोग और पुनः आपूर्ति संभव हो सके। उन्होंने “फूड-वॉटर-एनर्जी-क्लाइमेट” के समग्र दृष्टिकोण पर काम करने की आवश्यकता बताई।
किसान बनेंगे ऊर्जा उत्पादक !!
वाटर टेक्नोलॉजी सेंटर के प्रोजेक्ट डायरेक्टर डॉ. पी.एस. ब्रह्मानंद ने तकनीक आधारित और सहयोगात्मक प्रयासों को आगे बढ़ाने की जरूरत बताई। वहीं, आईडब्ल्यूएमआई के अंतरिम कंट्री प्रतिनिधि डॉ. गोपाल कुमार ने कहा कि सौरकरण के जरिए किसान अब केवल ऊर्जा उपभोक्ता नहीं, बल्कि उत्पादक और भविष्य में विक्रेता भी बन सकते हैं। उन्होंने इसे “विकसित भारत” और नेट-ज़ीरो लक्ष्य हासिल करने की दिशा में अहम कदम बताया।
तकनीकी सत्रों में नवाचार पर चर्चा !! 
मंच पर एग्रीवोल्टैक्स, सिंचाई-ऊर्जा संबंध, सौरकरण के विभिन्न मॉडल और नई तकनीकों पर विस्तृत प्रस्तुतियां दी गईं। वैज्ञानिकों ने बताया कि कैसे सौर ऊर्जा आधारित कृषि मॉडल खेती की लागत घटाने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान दे सकते हैं।
कृषि क्षेत्र में बदलाव की दिशा !!
यह राष्ट्रीय मंच न केवल ज्ञान साझा करने का माध्यम बना, बल्कि विभिन्न संस्थानों के बीच सहयोग को मजबूत करने का अवसर भी प्रदान किया। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सौरकरण को सही रणनीति के साथ लागू किया गया, तो यह भारतीय कृषि को टिकाऊ, लाभकारी और पर्यावरण के अनुकूल बना सकता है।
सारांश !!
कृषि में सौर ऊर्जा का विस्तार आने वाले समय में किसानों की आय बढ़ाने, ऊर्जा संकट कम करने और जलवायु परिवर्तन से निपटने का मजबूत आधार बन सकता है। अब चुनौती इसे जमीनी स्तर तक प्रभावी ढंग से लागू करने की है।
(Source: ICAR-Indian Agricultural Research Institute, New Delhi)