गांवों ने खुद लिखा विकास का नया अध्याय!

जनभागीदारी से बदली तस्वीर: आंध्र प्रदेश के गांव बने जल संरक्षण के मॉडल!

📍 प्रकाशम आंध्र प्रदेश के प्रकाशम जिले के मुरुगुम्मी, मारेला और थंगेला गांव आज जल संरक्षण के क्षेत्र में मिसाल बनकर उभरे हैं। भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय द्वारा संचालित ‘जल संचय जन भागीदारी अभियान’ के तहत इन गांवों में सामुदायिक नेतृत्व वाली वर्षाजल संरक्षण पहलों ने न सिर्फ पानी की समस्या का समाधान किया, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती दी है।

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🌧️ पहले संकट, अब समाधान की कहानी

कुछ वर्ष पहले तक इन गांवों में अनियमित वर्षा, लगातार गिरते भूजल स्तर और बार-बार खराब हो रहे बोरवेल के कारण जल संकट गहरा गया था। इसका सीधा असर खेती और ग्रामीणों की आजीविका पर पड़ रहा था।

लेकिन ग्राम सभाओं, घर-घर जागरूकता अभियान, कलाजाथा, कार्यशालाओं और जमीनी प्रदर्शनों के जरिए समुदाय को जोड़ा गया। किसानों, महिलाओं और युवाओं ने मिलकर जल बजट, फसल योजना और भूजल साझा करने जैसे नवाचार अपनाए, जिससे गांवों में स्वामित्व और जिम्मेदारी की भावना विकसित हुई।

💧पहाड़ी से घाटी’ मॉडल से जल संरक्षण

गांवों में ‘रिज टू वैली’ (पहाड़ी से घाटी) पद्धति अपनाते हुए जल संचयन के कई उपाय किए गए। इनमें रिसाव टैंक, खेत तालाब, कंटूर ट्रेंच, रूफटॉप रेनवॉटर हार्वेस्टिंग और सामुदायिक तालाबों का पुनर्जीवन प्रमुख हैं।

📊 गांववार उपलब्धियां

🔹 मुरुगुम्मी

71 जल संरचनाएं निर्मित

8.11 लाख घन मीटर जल भंडारण क्षमता

264.5 हेक्टेयर भूमि को सिंचाई सुविधा

🔹 मारेला

53 संरचनाएं, 10.04 लाख घन मीटर क्षमता

220.5 हेक्टेयर क्षेत्र में खेती को लाभ

तालाब पुनर्जीवन से 5.95 लाख घन मीटर अतिरिक्त क्षमता

🔹 थंगेला

71 संरचनाएं, 5.89 लाख घन मीटर क्षमता

185.3 हेक्टेयर भूमि को सिंचाई

पारंपरिक जल स्रोतों से 3.98 लाख घन मीटर अतिरिक्त भंडारण

🌱 व्यापक प्रभाव

✔️ भूजल स्तर में सुधार – करीब 5,900 लोगों को लाभ

✔️ कृषि उत्पादकता में वृद्धि – सिंचाई सुविधा बढ़ने से आय में इजाफा

✔️ डेयरी विकास – पानी उपलब्ध होने से पशुपालन को बढ़ावा

✔️ मिट्टी की नमी में सुधार – बेहतर फसल उत्पादन

✔️ पलायन में कमी – गांव में ही रोजगार के अवसर बढ़े

🏆 राष्ट्रीय स्तर पर पहचान

मुरुगुम्मी गांव को वर्ष 2024 के राष्ट्रीय जल पुरस्कार में दूसरा सर्वश्रेष्ठ ग्राम पंचायत का सम्मान मिला। वहीं मारेला को देश के शीर्ष 30 गांवों में शामिल किया गया और थंगेला को राष्ट्रीय स्तर पर नामांकन प्राप्त हुआ।

🧭 सारांश

प्रकाशम जिले के इन गांवों की सफलता यह साबित करती है कि जब समुदाय खुद आगे बढ़कर जल प्रबंधन की जिम्मेदारी लेता है, तो बड़े बदलाव संभव होते हैं। ‘जल संचय जन भागीदारी’ मॉडल आज देश के अन्य जल संकटग्रस्त क्षेत्रों के लिए प्रेरणा बन रहा है और सतत जल सुरक्षा की दिशा में एक मजबूत कदम साबित हो रहा है।