सीफूड निर्यात में भारत की ग्लोबल पकड़ मजबूत!

🐟 भारत का मत्स्य क्षेत्र बना अर्थव्यवस्था का मजबूत स्तंभ, उत्पादन और निर्यात में ऐतिहासिक बढ़त !!

नई दिल्ली। भारत का मत्स्य पालन क्षेत्र अब केवल पारंपरिक आजीविका तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह खाद्य सुरक्षा, रोजगार, निर्यात आय और सतत् विकास का एक प्रमुख इंजन बनकर उभरा है। वर्ष 2015 के बाद केंद्र सरकार द्वारा किए गए ₹39,272 करोड़ के रिकॉर्ड निवेश ने इस क्षेत्र को नई गति दी है, जिससे लाखों मछुआरों और मत्स्य किसानों की आय में सुधार हुआ है।

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📊 3 करोड़ लोगों को रोजगार, उत्पादन में 7% वार्षिक वृद्धि !!

देश में मत्स्य क्षेत्र सीधे तौर पर करीब 3 करोड़ मछुआरों और मत्स्य किसानों को रोजगार देता है, जबकि इसकी वैल्यू चेन में इसका प्रभाव लगभग दोगुना है।
पिछले कुछ वर्षों में उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है—
2019–20: 141.64 लाख टन
2024–25: 197.75 लाख टन
औसत वृद्धि दर: लगभग 7% प्रति वर्ष
यह बदलाव दर्शाता है कि पारंपरिक मत्स्य पालन अब व्यावसायिक और लाभकारी सेक्टर में परिवर्तित हो चुका है।

🌍 ग्लोबल स्तर पर भारत की मजबूत पकड़ !!

भारत आज विश्व का दूसरा सबसे बड़ा जलीय कृषि उत्पादक है और वैश्विक मछली उत्पादन में लगभग 8% योगदान देता है।
देश का सीफूड निर्यात भी लगातार बढ़ रहा है—
2013–14: ₹30,213 करोड़
2024–25: ₹62,408 करोड़
प्रमुख योगदान: ₹43,334 करोड़ का झींगा (श्रिंप) निर्यात

🌐 130 देशों में भारतीय सीफूड की मांग !!

भारत से 350+ प्रकार के सीफूड उत्पाद लगभग 130 देशों में निर्यात किए जा रहे हैं। मुख्य निर्यात बाजार: अमेरिका (36.42% हिस्सा),चीन,यूरोपीय संघ,दक्षिण-पूर्व एशिया,जापान और मध्य पूर्व निर्यात में फ्रोज़न श्रिंप का दबदबा है, जबकि फिश, स्क्विड, कटलफिश और वैल्यू-एडेड प्रोडक्ट्स की हिस्सेदारी भी तेजी से बढ़ रही है।
👉 खास बात: वैल्यू एडेड उत्पादों का हिस्सा 2.5% से बढ़कर 11% हो गया है। 

🚀 पीएम मत्स्य संपदा योजना से तेज विकास !!

सरकार की प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) इस क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव ला रही है। इसके तहत:
गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादन
खारे पानी की जलीय कृषि का विस्तार
नई तकनीकों का उपयोग
रोग प्रबंधन और ट्रेसबिलिटी सिस्टम
कोल्ड चेन और आधुनिक फिशिंग हार्बर का विकास
साथ ही, टूना, सीबास, कोबिया, पम्पानो, मड क्रैब, जीआईएफटी तिलापिया और सीवीड जैसी उच्च मूल्य प्रजातियों को बढ़ावा दिया जा रहा है

📦 ग्लोबल मानकों पर खरा उतर रहा भारत !!

भारत ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी विश्वसनीयता बढ़ाने के लिए कई कदम उठाए हैं—
मरीन मैमल प्रोटेक्शन एक्ट (MMPA) के अनुरूप सुधार
2025 में अमेरिका से “तुल्यता” की स्वीकृति
टर्टल एक्सक्लूडर डिवाइस (TED) का उपयोग
डिजिटल ट्रेसबिलिटी और फूड सेफ्टी सिस्टम
इन प्रयासों से भारत एक जिम्मेदार और अनुपालन करने वाला निर्यातक बनकर उभरा है।

⚡ व्यापार सुगमता में बड़ा सुधार !!

मत्स्य विभाग ने व्यापार को आसान बनाने के लिए—
सैनिटरी इम्पोर्ट परमिट (SIP) को डिजिटल किया
मंजूरी समय 30 दिन से घटाकर 72 घंटे किया
नेशनल सिंगल विंडो सिस्टम से एकीकरण
इससे निवेशकों और निर्यातकों को बड़ा फायदा मिला है।

🔮 अगले 5 साल की रणनीति !!

सरकार आने वाले वर्षों में—
वैल्यू एडेड प्रोडक्ट्स बढ़ाने
नए बाजार (UK, EU, ASEAN, पश्चिम एशिया) खोलने
कोल्ड चेन और सप्लाई चेन मजबूत करने
डिजिटल ट्रेसबिलिटी बढ़ाने
पर फोकस करेगी

🌾 कृषि विशेषज्ञ की राय !!

मत्स्य क्षेत्र किसानों के लिए आय का नया मजबूत विकल्प बनकर उभर रहा है।
कम भूमि में अधिक उत्पादन
कम समय में बेहतर रिटर्न
फसल + मत्स्य एकीकृत मॉडल से दोगुनी आय संभव
👉 विशेष रूप से छोटे और सीमांत किसानों के लिए यह क्षेत्र “आय बढ़ाने का गेम चेंजर” साबित हो सकता है।

चित्र: प्रतीकात्मक