आईसीएआर–सीआईएएच, बीकानेर में राष्ट्रीय शुष्क उद्यानिकी सम्मेलन संपन्न, जलवायु अनुकूल तकनीकों पर जोर!
बीकानेर, राजस्थान। –शुष्क और अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में उद्यानिकी विकास को नई दिशा देने के उद्देश्य से आईसीएआर–केंद्रीय शुष्क बागवानी संस्थान (CIAH), बीकानेर में तीन दिवसीय राष्ट्रीय शुष्क उद्यानिकी सम्मेलन का सफल आयोजन किया गया। “शुष्क उद्यानिकी पर राष्ट्रीय सम्मेलन: जैव विविधता और जलवायु अनुकूलनशीलता द्वारा टिकाऊ भविष्य का सृजन” विषय पर यह सम्मेलन 26 से 28 फरवरी 2026 तक भारतीय शुष्क बागवानी सोसायटी द्वारा संस्थान के सहयोग से आयोजित किया गया।
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सम्मेलन में देश के विभिन्न राज्यों से आए वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं, नीति-निर्माताओं, कृषि विशेषज्ञों और संस्थागत प्रतिनिधियों ने भाग लेकर शुष्क और अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में उद्यानिकी के विकास से जुड़ी नई तकनीकों, शोध परिणामों और रणनीतियों पर व्यापक चर्चा की।
उद्घाटन सत्र में विशेषज्ञों ने रखे विचार
सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में डॉ. संजय कुमार सिंह मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इस अवसर पर मंच पर डॉ. आर. रवि बाबू, डॉ. प्रदीप कुमार, डॉ. वी.बी. पटेल, डॉ. जगदीश राणे और डॉ. पी.एल. सरोज विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद थे। सम्मेलन के आयोजन सचिव डॉ. ए.के. सिंह और डॉ. एम.के. जाटव ने कार्यक्रम की रूपरेखा और उद्देश्य पर प्रकाश डाला।
विशेषज्ञों ने अपने संबोधन में कहा कि जलवायु परिवर्तन के दौर में शुष्क और अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में उद्यानिकी आधारित खेती किसानों की आय बढ़ाने और कृषि को टिकाऊ बनाने का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकती है।
कई संस्थानों की भागीदारी
सम्मेलन में देश के विभिन्न कृषि विश्वविद्यालयों, अनुसंधान संस्थानों तथा शिक्षण संस्थाओं से आए वैज्ञानिकों, शिक्षकों और शोधार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इसके साथ ही राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड), राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड तथा कई सरकारी और निजी संस्थानों के प्रतिनिधियों की भागीदारी ने शुष्क उद्यानिकी क्षेत्र में बहु-संस्थागत सहयोग की आवश्यकता को रेखांकित किया।
शोध पत्रों और नई तकनीकों की प्रस्तुति
तीन दिवसीय सम्मेलन के दौरान वैज्ञानिकों और शोधार्थियों द्वारा कई महत्वपूर्ण शोध पत्र और पोस्टर प्रस्तुत किए गए। इनमें शुष्क क्षेत्रों के लिए उपयुक्त फसल प्रबंधन, जल संरक्षण तकनीक, उन्नत किस्मों के विकास, जैव विविधता संरक्षण तथा किसानों की आय बढ़ाने से संबंधित नवाचारों पर विशेष जोर दिया गया।
उत्कृष्ट शोध कार्यों के लिए प्रतिभागियों को सर्वश्रेष्ठ मौखिक प्रस्तुति और सर्वश्रेष्ठ पोस्टर प्रस्तुति पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
किसान–वैज्ञानिक संवाद बना आकर्षण
सम्मेलन के दौरान एक विशेष किसान–वैज्ञानिक संवाद सत्र का आयोजन किया गया। इस सत्र में डॉ. जे.आर. खोजा और डॉ. प्रदीप कुमार ने किसानों से सीधे संवाद कर शुष्क क्षेत्रों में उद्यानिकी आधारित मूल्य श्रृंखला को मजबूत करने, आधुनिक तकनीकों को अपनाने और उत्पादन बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की।
प्रगतिशील किसानों को “उद्यान श्री” सम्मान
सम्मेलन के प्लेनरी सत्र में डॉ. बी.डी. शर्मा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जबकि डॉ. जयदीप डोग्ने विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस अवसर पर शुष्क और अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में उद्यानिकी के विकास में उल्लेखनीय योगदान देने वाले कई प्रगतिशील किसानों को “उद्यान श्री” पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
सतत उद्यानिकी विकास पर जोर
सम्मेलन के समापन सत्र में विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि शुष्क और अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में सतत उद्यानिकी विकास को बढ़ावा देने के लिए अनुसंधान, तकनीकी नवाचार, संस्थागत सहयोग और किसानों के साथ समन्वय को और अधिक मजबूत करना होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैज्ञानिक शोध, आधुनिक तकनीकों और किसानों के अनुभवों को एक मंच पर लाया जाए तो शुष्क क्षेत्रों में भी उद्यानिकी खेती के माध्यम से किसानों की आय और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिल सकती है।