ग्रामीण हाट से डिजिटल मंडी तक, बदल रही बिहार की कृषि व्यवस्था!

20 बाजार ई-नाम से जुड़े, 34 और बाजारों को जोड़ने की तैयारी; किसानों को बेहतर मूल्य और सुविधाएं देने की पहल

पटना: –बिहार में कृषि क्षेत्र को आधुनिक और सशक्त बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। कृषि विभाग द्वारा राज्य के कृषि बाजारों के आधुनिकीकरण का अभियान तेजी से चलाया जा रहा है, जिसके तहत किसानों को बेहतर विपणन सुविधाएं और पारदर्शी व्यवस्था उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।

Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!

कृषि विभाग के अनुसार राज्य के कुल 53 कृषि उपज बाजार प्रांगणों के आधुनिकीकरण एवं समुचित विकास का कार्य किया जा रहा है। इन बाजारों में आधारभूत ढांचे को मजबूत करने के साथ-साथ आधुनिक सुविधाएं विकसित की जा रही हैं ताकि किसानों को अपनी उपज बेचने में किसी प्रकार की परेशानी न हो।

ई-नाम से जुड़ रहे बाजार

राज्य के 20 बाजार प्रांगणों को राष्ट्रीय कृषि बाजार (ई-नाम) प्लेटफॉर्म से जोड़ा जा चुका है। इससे किसानों को डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से अपनी उपज की ऑनलाइन बोली लगाने और देशभर के खरीदारों से बेहतर दाम मिलने की सुविधा मिल रही है। वहीं सरकार की योजना है कि 34 अन्य बाजार प्रांगणों को भी जल्द ई-नाम से जोड़ा जाए, जिससे कृषि व्यापार को और पारदर्शी बनाया जा सके।

ग्रामीण हाटों के विकास पर भी जोर

कृषि विभाग के साथ-साथ पंचायती राज विभाग और ग्रामीण विकास विभाग के समन्वय से राज्य में ग्रामीण हाटों के सर्वांगीण विकास का कार्य भी किया जा रहा है। इसके तहत गांव स्तर पर किसानों और छोटे उत्पादकों के लिए बेहतर बाजार व्यवस्था तैयार की जा रही है, जिससे स्थानीय उत्पादों की बिक्री को बढ़ावा मिलेगा।

किसानों को मिलेगा सीधा लाभ

जानकारों का मानना है कि कृषि बाजारों के आधुनिकीकरण और ई-नाम से जुड़ने से किसानों को बिचौलियों पर निर्भरता कम होगी। डिजिटल प्रणाली के माध्यम से किसानों को पारदर्शी मूल्य निर्धारण, तेज भुगतान और व्यापक बाजार की सुविधा मिलेगी। इससे राज्य की कृषि अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।

कुल मिलाकर, बिहार सरकार की यह पहल किसानों को आधुनिक बाजार व्यवस्था से जोड़ने और कृषि व्यापार को तकनीक आधारित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।