September 22, 2026 3:19 AM

Krishi Times

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रबी फसलों की बुवाई 208 लाख हेक्टेयर पार, गेहूं–दलहन–तिलहन में भी बढ़ोतरी!

दलहन, तिलहन और मोटे अनाज में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी

नई दिल्ली- कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने 11 नवम्बर 2025 तक रबी फसलों की बुवाई प्रगति रिपोर्ट जारी की है। रिपोर्ट के अनुसार, इस वर्ष रबी फसलों की कुल बुवाई 208.19 लाख हेक्टेयर पहुंच गई है, जो पिछले वर्ष के 188.73 लाख हेक्टेयर की तुलना में 19.46 लाख हेक्टेयर अधिक है।

गेहूं, दलहन और तिलहन की बुवाई में वृद्धि

मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, देश में प्रमुख रबी फसल गेहूं की बुवाई में इस वर्ष उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

  • गेहूं की बुवाई 66.23 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गई है, जो पिछले वर्ष के 56.55 लाख हेक्टेयर से 9.68 लाख हेक्टेयर अधिक है।

  • धान (रबी सीजन) की बुवाई भी बढ़कर 7.44 लाख हेक्टेयर हो गई है, जो पिछले वर्ष 6.82 लाख हेक्टेयर थी।

दलहन क्षेत्र में 52.82 लाख हेक्टेयर कवरेज

दलहन फसलों की बुवाई इस वर्ष बढ़कर 52.82 लाख हेक्टेयर हो गई है, जबकि पिछले वर्ष यह आंकड़ा 48.93 लाख हेक्टेयर था।

चना: 37.43 लाख हेक्टेयर, मसूर: 6.83 लाख हेक्टेयर, Field Pea: 4.75 लाख हेक्टेयर

कुलथ: 0.97 लाख हेक्टेयर (पिछले वर्ष समान)
कुछ फसलों—उड़द, मूंग, लथyrus एवं अन्य दालों में हल्की कमी दर्ज की गई है।

श्रीअन्न एवं मोटे अनाज में 15.53 लाख हेक्टेयर बुवाई

सरकार द्वारा प्रोत्साहित श्रीअन्न (मिलेट्स) एवं मोटे अनाज की बुवाई में भी बढ़त दर्ज हुई है।
इस श्रेणी में कुल 15.53 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बुवाई हुई, जो पिछले वर्ष 13.50 लाख हेक्टेयर थी।

  • ज्वार: 8.82 लाख हेक्टेयर

  • बाजरा: 0.04 लाख हेक्टेयर

  • रागी: 0.49 लाख हेक्टेयर

  • Small Millets: 0.11 लाख हेक्टेयर

  • मक्का: 4.26 लाख हेक्टेयर

  • जौ: 1.83 लाख हेक्टेयर

तिलहन फसलों का क्षेत्र 66.17 लाख हेक्टेयर पहुंचा

तिलहन क्षेत्र में भी इस वर्ष उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है।
तिलहन की कुल बुवाई 66.17 लाख हेक्टेयर रही, जो पिछले वर्ष 62.93 लाख हेक्टेयर थी।

  • सरसों एवं रेपसीड: 64.23 लाख हेक्टेयर (3.71 लाख हेक्टेयर की बढ़ोतरी)

  • सूरजमुखी, कुसुम, तिल में हल्की बढ़त

  • मूंगफली व अलसी के क्षेत्र में कमी दर्ज की गई है।

कुल मिलाकर रबी बुवाई में रफ्तार तेज

सभी प्रमुख रबी फसलों—गेहूं, दलहन, तिलहन और मोटे अनाज—में इस वर्ष बुवाई का क्षेत्र बढ़ा है।
कृषि मंत्रालय के अनुसार यह वृद्धि बेहतर मौसम, समय पर बुवाई तथा किसानों में बढ़ती जागरूकता का परिणाम है।