NDDB और WAMUL ने चलाया जागरूकता अभियान, ‘वन हेल्थ’ और एथ्नोवेटरिनरी मेडिसिन पर दिया जोर !!
नगांव (असम)। डेयरी क्षेत्र में पशु स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा को मजबूत बनाने की दिशा में राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) ने वेस्ट असम मिल्क प्रोड्यूसर्स कोऑपरेटिव यूनियन लिमिटेड (WAMUL) के सहयोग से नगांव में एक विशेष किसान जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया। यह कार्यक्रम “डेयरी इंटीग्रेटेड सेफ्टी एंड हेल्थ एक्शन (DISHA) प्रोजेक्ट” के तहत आयोजित किया गया, जिसमें एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR), एथ्नोवेटरिनरी मेडिसिन (EVM) और ‘वन हेल्थ’ अवधारणा पर विस्तार से चर्चा की गई। कार्यक्रम का उद्देश्य पशुपालकों को एंटीबायोटिक दवाओं के जिम्मेदार उपयोग, पशुओं में रोग नियंत्रण, जूनोटिक बीमारियों की रोकथाम, स्वच्छ डेयरी प्रबंधन तथा टिकाऊ पशु स्वास्थ्य पद्धतियों के प्रति जागरूक करना था। विशेषज्ञों ने बताया कि बिना आवश्यकता के एंटीबायोटिक उपयोग से दवाओं के प्रति प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो रही है, जो पशु और मानव दोनों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकती है।
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वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित EVM पर विशेष फोकस !!
कार्यक्रम में वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित एथ्नोवेटरिनरी मेडिसिन (EVM) को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि पारंपरिक और स्थानीय ज्ञान पर आधारित EVM पद्धतियां पशुओं के प्राथमिक उपचार और रोग-निवारण में प्रभावी साबित हो रही हैं, जिससे एंटीबायोटिक दवाओं की अनावश्यक खपत कम की जा सकती है।
112 प्रतिभागियों ने लिया हिस्सा !! 
इस जागरूकता कार्यक्रम में कुल 112 प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिनमें पशुपालक किसान, पशु चिकित्सा विशेषज्ञ और पुरबी डेयरी के छह पशु चिकित्सक शामिल रहे। NDDB के वरिष्ठ प्रबंधक (पशु स्वास्थ्य) डॉ. पंकज दत्ता ने तकनीकी सत्रों का संचालन करते हुए AMR, EVM, जूनोटिक रोगों तथा ‘वन हेल्थ’ दृष्टिकोण की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि “वन हेल्थ” अवधारणा मानव, पशु और पर्यावरणीय स्वास्थ्य को एक-दूसरे से जुड़ा मानती है और सामूहिक प्रयासों से ही रोग नियंत्रण संभव है।
किसानों के साथ हुई संवादात्मक चर्चा !!
कार्यक्रम के दौरान किसानों के साथ संवादात्मक सत्र आयोजित किए गए, जिनमें एंटीबायोटिक दवाओं के विवेकपूर्ण उपयोग, इलाज से पहले पशु चिकित्सक की सलाह लेने, निर्धारित दवा कोर्स पूरा करने, दूध निकासी अवधि (Milk Withdrawal Period) की जानकारी तथा EVM आधारित निवारक स्वास्थ्य प्रबंधन को अपनाने पर चर्चा हुई।
विशेषज्ञों ने बताया कि दूध उत्पादन प्रणाली में सुरक्षित दवा उपयोग न केवल पशु स्वास्थ्य बल्कि उपभोक्ताओं की खाद्य सुरक्षा के लिए भी अत्यंत आवश्यक है।
सामुदायिक जागरूकता से टिकाऊ पशुपालन को बढ़ावा !!
कार्यक्रम में यह संदेश दिया गया कि गांव स्तर पर जागरूकता और किसानों की सक्रिय भागीदारी से ही एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस जैसी वैश्विक चुनौती का प्रभावी समाधान संभव है। साथ ही, टिकाऊ पशुपालन और सुरक्षित डेयरी उत्पादन के लिए वैज्ञानिक एवं पारंपरिक दोनों प्रकार की स्वास्थ्य पद्धतियों का संतुलित उपयोग आवश्यक है।
Source: NDDB

