वैज्ञानिक अनुसंधान में पशु कल्याण को मिली प्राथमिकता!

वैज्ञानिक अनुसंधान में पशु कल्याण पर केंद्र सरकार का बड़ा फोकस!

नई दिल्ली में राष्ट्रीय सम्मेलन, नैतिक और जिम्मेदार रिसर्च मॉडल पर जोर

नई दिल्ली। भारत सरकार के पशुपालन और डेयरी विभाग (डीएएचडी) के अंतर्गत कार्यरत पशुओं पर प्रयोगों के नियंत्रण और पर्यवेक्षण के लिए समिति (सीसीएसईए) ने मंगलवार को “प्रयोगशाला पशु कल्याण: नीतियां और सर्वोत्तम प्रथाएं” विषय पर राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया। इस सम्मेलन का उद्देश्य वैज्ञानिक अनुसंधान में प्रयोग किए जाने वाले पशुओं के संरक्षण, मानवीय व्यवहार और नैतिक उपयोग को सुनिश्चित करना था।

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सम्मेलन में देशभर के वैज्ञानिकों, नीति निर्माताओं, पशु चिकित्सकों, अनुसंधान संस्थानों, विश्वविद्यालयों, संस्थागत पशु आचार समितियों (आईएईसी), भारतीय पशु कल्याण बोर्ड (एडब्ल्यूबीआई) और सरकारी एजेंसियों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान अनुसंधान और पशु कल्याण के बीच संतुलन स्थापित करने पर विस्तार से चर्चा हुई।

वैज्ञानिक प्रगति के साथ करुणा भी जरूरी : राजीव रंजन सिंह

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि केंद्रीय मत्स्यपालन, पशुपालन एवं डेयरी तथा पंचायती राज मंत्री Rajiv Ranjan Singh ने कहा कि वैक्सीन विकास, दवा अनुसंधान और चिकित्सा विज्ञान में पशु-आधारित अनुसंधान की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्होंने कहा कि कोविड-19 महामारी के दौरान वैक्सीन निर्माण में भी इस प्रकार के अनुसंधानों ने अहम योगदान दिया।

हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वैज्ञानिक प्रगति के साथ पशुओं की पीड़ा और तनाव को कम करना उतना ही आवश्यक है। उन्होंने कहा कि अनुसंधान संस्थानों को पशु कल्याण संबंधी दिशानिर्देशों का सख्ती से पालन करना चाहिए।

सीसीएसईए की भूमिका पर दिया विशेष जोर

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सीसीएसईए देशभर के अनुसंधान संस्थानों और एनिमल हाउस की निगरानी कर पशु कल्याण मानकों को लागू करने का कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि समिति का उद्देश्य केवल नियम लागू करना नहीं, बल्कि संस्थानों में संवेदनशील और जिम्मेदार अनुसंधान संस्कृति विकसित करना भी है।

उन्होंने अनुसंधान संस्थानों से अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप सुविधाएं विकसित करने और पशुओं के लिए बेहतर देखभाल व्यवस्था सुनिश्चित करने की अपील की।

डेयरी क्षेत्र और टीकाकरण कार्यक्रमों का भी उल्लेख

अपने संबोधन में मंत्री ने डेयरी क्षेत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत विश्व के सबसे बड़े दुग्ध उत्पादक देशों में शामिल है। यदि पशुधन स्वस्थ रहेगा तो डेयरी क्षेत्र की निर्यात क्षमता और अधिक बढ़ सकती है।

उन्होंने फुट एंड माउथ डिजीज (एफएमडी) जैसी बीमारियों के नियंत्रण के लिए प्रभावी टीकाकरण कार्यक्रमों को मजबूत करने पर बल दिया और कहा कि पशु स्वास्थ्य और अनुसंधान दोनों एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।

अनुसंधान में नैतिकता और जिम्मेदारी जरूरी : एस.पी. सिंह बघेल

केंद्रीय राज्य मंत्री S. P. Singh Baghel ने कहा कि भारत केवल वैज्ञानिक उपलब्धियों तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि ऐसा मॉडल विकसित करना चाहता है जिसमें अनुसंधान के साथ मानवीय मूल्यों और नैतिकता का समावेश हो।

उन्होंने कहा कि किसी भी विकसित समाज की पहचान इस बात से होती है कि वह अपने जीव-जंतुओं और पर्यावरण के प्रति कितना संवेदनशील है। इसलिए वैज्ञानिक समुदाय को अनुसंधान के दौरान जिम्मेदारी और करुणा दोनों का ध्यान रखना चाहिए।

3R सिद्धांत” अपनाने पर जोर

राज्य मंत्री ने वैज्ञानिक समुदाय से “3R सिद्धांत” — रिप्लेसमेंट (विकल्प), रिडक्शन (संख्या में कमी) और रिफाइनमेंट (प्रक्रियाओं में सुधार) — को तेजी से अपनाने की अपील की।

उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीकों और वैकल्पिक शोध विधियों को बढ़ावा देकर प्रयोगशाला पशुओं पर निर्भरता कम की जा सकती है। इससे अनुसंधान अधिक नैतिक और मानवीय बनेगा।

विज्ञान और संवेदनशीलता साथ-साथ चलें : जॉर्ज कुरियन

केंद्रीय राज्य मंत्री George Kurian ने कहा कि विज्ञान और तकनीक का वास्तविक उद्देश्य मानवता और जीव-जंतुओं के जीवन को बेहतर बनाना है।

उन्होंने कहा कि यदि वैज्ञानिक प्रगति संवेदनशीलता और नैतिक मूल्यों से दूर हो जाए, तो उसका सकारात्मक प्रभाव सीमित हो जाता है। इसलिए भारत को ऐसा अनुसंधान मॉडल विकसित करना होगा जिसमें नवाचार और करुणा दोनों साथ-साथ चलें।

स्वास्थ्य चुनौतियों के बीच बढ़ा वैज्ञानिक अनुसंधान का महत्व

पशुपालन एवं डेयरी विभाग के सचिव Naresh Pal Gangwar ने कहा कि भारत तेजी से विकास की ओर बढ़ रहा है और इसके साथ स्वास्थ्य क्षेत्र में नई चुनौतियां भी सामने आ रही हैं।

उन्होंने कहा कि नई बीमारियों, वैक्सीन अनुसंधान और जैव-प्रौद्योगिकी के विस्तार के कारण वैज्ञानिक अनुसंधान का महत्व पहले से कहीं अधिक बढ़ गया है। ऐसे में वैज्ञानिक उपलब्धियों और पशु कल्याण के बीच संतुलन बनाए रखना बेहद आवश्यक है।

तकनीकी सत्र में विशेषज्ञों ने साझा किए सुझाव

सम्मेलन के दौरान “पशुओं पर अनुसंधान की नीतियां और सर्वोत्तम प्रथाएं एवं उनका कल्याण” विषय पर तकनीकी सत्र आयोजित किया गया। इसमें प्रयोगशाला पशु विज्ञान के विशेषज्ञों और पशु चिकित्सकों ने विस्तृत विचार-विमर्श किया।

विशेषज्ञों ने कहा कि आधुनिक अनुसंधान संस्थानों में पशुओं के लिए बेहतर आवास, स्वच्छता, पोषण और स्वास्थ्य निगरानी की व्यवस्था अनिवार्य होनी चाहिए। इसके अलावा पशुओं के दर्द और तनाव को कम करने के लिए नई तकनीकों को अपनाने की आवश्यकता है।

संस्थानों की समस्याओं और चुनौतियों पर खुली चर्चा

सम्मेलन के अंत में आयोजित इंटरैक्टिव सत्र में विभिन्न संस्थानों के प्रतिनिधियों ने प्रयोगशाला पशुओं के रखरखाव, प्रशिक्षण और नियामक प्रक्रियाओं से जुड़ी चुनौतियों को सामने रखा।

कई प्रतिभागियों ने कहा कि छोटे अनुसंधान संस्थानों में आधुनिक सुविधाओं और प्रशिक्षित कर्मचारियों की कमी एक बड़ी समस्या है। इस पर सीसीएसईए के सदस्यों ने सुझाव देते हुए कहा कि संस्थानों को नियमित प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रमों पर अधिक ध्यान देना चाहिए।

भारत को वैश्विक रिसर्च मानकों के अनुरूप बनाने की पहल

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में बायोमेडिकल रिसर्च, फार्मास्युटिकल उद्योग और वैक्सीन निर्माण तेजी से विस्तार कर रहे हैं। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकार्य नैतिक और वैज्ञानिक मानकों का पालन बेहद जरूरी हो गया है।

यह सम्मेलन भारत को “जिम्मेदार वैज्ञानिक अनुसंधान” के वैश्विक मॉडल के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे न केवल अनुसंधान की गुणवत्ता बढ़ेगी, बल्कि भारतीय संस्थानों की अंतरराष्ट्रीय विश्वसनीयता भी मजबूत होगी।