किसानों के लिए सुरक्षा कवच बना बीमा!
जयपुर, 18 अप्रैल -राजस्थान में खेती-किसानी से जुड़े जोखिमों को कम करने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा आर्थिक कदम उठाया है। खरीफ 2025 सीजन के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत 1150.04 करोड़ रुपये की राज्यांश राशि जारी कर दी गई है, जिससे लाखों किसानों को राहत मिलने की उम्मीद है।
कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल ने बताया कि इस फैसले से राज्य के 2.17 करोड़ बीमाधारक किसानों को सीधे तौर पर लाभ मिलेगा और प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान के खिलाफ उनकी आर्थिक सुरक्षा मजबूत होगी।
त्वरित दावों के भुगतान पर फोकस
सरकार ने स्पष्ट किया है कि खरीफ 2025 के तहत किसानों को देय लगभग 2237 करोड़ रुपये के बीमा दावों का जल्द भुगतान सुनिश्चित किया जाएगा।
मंत्री के अनुसार, दावों के निपटान में देरी न हो, इसके लिए प्रक्रिया को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाएगा, ताकि प्रभावित किसान परिवारों को समय पर वित्तीय सहारा मिल सके।
बीमा सुरक्षा का व्यापक दायरा
फसल बीमा योजना के तहत किसानों को कई स्तरों पर सुरक्षा दी जा रही है:
- बुआई न हो पाने की स्थिति में कवरेज, खड़ी फसल को प्राकृतिक आपदाओं से नुकसान, कटाई के बाद 14 दिनों तक पोस्ट-हार्वेस्ट नुकसान का बीमा
सरकार तकनीकी माध्यमों से पारदर्शी और तेज सत्यापन प्रक्रिया लागू कर रही है, जिससे किसी भी किसान को भुगतान में देरी न झेलनी पड़े।
खरीफ 2025: आंकड़ों में पूरी तस्वीर
- किसानों द्वारा जमा प्रीमियम: 466.14 करोड़ रुपये, राज्य सरकार का अंशदान: 1150.04 करोड़ रुपये, केंद्र सरकार का अंशदान: 1150.04 करोड़ रुपये
इस संयुक्त व्यवस्था से किसानों पर प्रीमियम का बोझ काफी हद तक कम हुआ है।
सरकार की प्राथमिकता: आय सुरक्षा और जोखिम प्रबंधन
कृषि मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार किसानों की आय बढ़ाने और खेती को जोखिम मुक्त बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। फसल बीमा योजना को मजबूत बनाकर हर पात्र किसान तक इसका लाभ पहुंचाना सरकार की शीर्ष प्राथमिकताओं में शामिल है।
किसानों के लिए क्यों अहम है यह फैसला
विशेषज्ञ मानते हैं कि समय पर बीमा दावों का भुगतान न केवल किसानों की आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित करता है, बल्कि अगली फसल के लिए उनकी तैयारी को भी मजबूत बनाता है। ऐसे में यह पहल राज्य के कृषि क्षेत्र में भरोसा और स्थायित्व बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
सारांश:
राजस्थान सरकार का यह निर्णय केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह खेती को सुरक्षित और टिकाऊ बनाने की दिशा में एक ठोस नीति संकेत भी है। आने वाले समय में इसका असर किसानों की आय और कृषि निवेश दोनों पर सकारात्मक रूप से दिख सकता है।


























