किसानों के लिए मेगा पैकेज: एक दिन में चार बड़ी कृषि योजनाओं की होगी शुरुआत!
नई दिल्ली/तारकेश्वर (पश्चिम बंगाल)। देश के करोड़ों किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 20 जून 2026 को पश्चिम बंगाल के हुगली जिले स्थित तारकेश्वर से प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN) योजना की 23वीं किस्त जारी करेंगे। इस अवसर पर देशभर के 9 करोड़ 44 लाख से अधिक किसानों के बैंक खातों में 18,880 करोड़ रुपये से अधिक की राशि सीधे हस्तांतरित की जाएगी। इनमें 2 करोड़ 18 लाख से अधिक महिला किसान भी शामिल हैं।
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केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय तथा पश्चिम बंगाल सरकार के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम को देशभर के कृषि विज्ञान केंद्रों, कृषि विश्वविद्यालयों, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ), कृषि मंडियों, पीएम किसान समृद्धि केंद्रों और ग्राम पंचायत स्तर तक लाइव प्रसारित किया जाएगा। अनुमान है कि एक करोड़ से अधिक किसान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से इस कार्यक्रम से जुड़ेंगे।
पीएम-किसान के तहत कुल वितरण राशि ₹4.46 लाख करोड़ के पार
23वीं किस्त जारी होने के साथ ही फरवरी 2019 में शुरू हुई पीएम-किसान योजना के अंतर्गत किसानों को वितरित की गई कुल राशि 4.46 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो जाएगी। यह योजना देश के छोटे एवं सीमांत किसानों को प्रतिवर्ष 6,000 रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान कर कृषि क्षेत्र को मजबूती देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
पश्चिम बंगाल के 45 लाख किसानों को मिलेगा लाभ
योजना की 23 वीं किस्त में पश्चिम बंगाल में 45 लाख 35 हजार से अधिक लाभार्थियों को 907 करोड़ 21 लाख रुपये से अधिक की राशि अंतरित की जाएगी, जिससे राज्य में 2019 में योजना शुरू आरंभ होने के बाद से कुल वितरण 15,055 करोड़ रुपये से अधिक हो जाएगा।
“पीएम-किसान उत्सव दिवस” के रूप में मनाया जाएगा कार्यक्रम
किसानों में जागरूकता बढ़ाने और केंद्र व राज्य सरकार की कृषि योजनाओं की जानकारी पहुंचाने के उद्देश्य से देशभर में इस दिन को “पीएम-किसान उत्सव दिवस” के रूप में मनाया जाएगा। राज्य, जिला, ब्लॉक और ग्राम पंचायत स्तर पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
पश्चिम बंगाल में फसल बीमा योजना का होगा शुभारंभ
प्रधानमंत्री इस अवसर पर पश्चिम बंगाल में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) और पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना का भी शुभारंभ करेंगे। वर्ष 2026-27 में इस योजना के तहत लगभग 1.10 करोड़ किसानों को बीमा सुरक्षा प्रदान करने का लक्ष्य रखा गया है।
करीब 30 लाख हेक्टेयर कृषि क्षेत्र को कवर करते हुए 28,140 करोड़ रुपये के बीमित मूल्य की फसलों को सुरक्षा मिलेगी। किसानों पर प्रीमियम का बोझ कम रखने के लिए केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर लगभग 777 करोड़ रुपये की प्रीमियम सब्सिडी प्रदान करेंगी।
डिजिटल कृषि मिशन के तहत एग्रीस्टैक लॉन्च

कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री डिजिटल कृषि मिशन के अंतर्गत पश्चिम बंगाल में एग्रीस्टैक का शुभारंभ करेंगे। यह डिजिटल प्लेटफॉर्म किसानों को उर्वरक वितरण, किसान क्रेडिट कार्ड, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT), न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीद और अन्य कृषि सेवाओं तक एकीकृत एवं पारदर्शी पहुंच उपलब्ध कराएगा।
2,817 करोड़ रुपये की लागत वाले डिजिटल कृषि मिशन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), अंतरिक्ष तकनीक और डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना का उपयोग कर किसानों को आधुनिक सेवाओं से जोड़ने की व्यवस्था की गई है।
राष्ट्रीय प्राकृतिक कृषि मिशन को मिलेगी गति
प्रधानमंत्री पश्चिम बंगाल में राष्ट्रीय प्राकृतिक कृषि मिशन (NMNF) का भी शुभारंभ करेंगे। वर्ष 2026-27 में राज्य में 17,300 हेक्टेयर क्षेत्र में 346 प्राकृतिक कृषि क्लस्टर स्थापित किए जाएंगे, जिससे 43,250 किसानों को सीधा लाभ मिलेगा।
इस मिशन के तहत रसायन-मुक्त खेती, जैविक संसाधनों के उपयोग, मृदा स्वास्थ्य सुधार, लागत में कमी और जलवायु परिवर्तन के प्रति कृषि की सहनशीलता बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जाएगा।
धन-धान्य कृषि योजना से पिछड़े जिलों को मिलेगा बल
प्रधानमंत्री पश्चिम बंगाल में प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के कार्यान्वयन का भी शुभारंभ करेंगे। यह योजना पुरुलिया, दार्जिलिंग, अलीपुरद्वार और झाड़ग्राम जैसे अपेक्षाकृत पिछड़े जिलों में कृषि उत्पादकता बढ़ाने, फसल विविधीकरण, सिंचाई सुविधाओं के विस्तार और कृषि अवसंरचना को मजबूत बनाने पर केंद्रित होगी।
इस योजना का उद्देश्य कम उत्पादकता और सीमित संस्थागत ऋण वाले क्षेत्रों में कृषि विकास को गति देना तथा किसानों की आय बढ़ाना है।
कृषि क्षेत्र के लिए बहुआयामी पहल
विशेषज्ञों का मानना है कि पीएम-किसान की 23वीं किस्त के साथ फसल बीमा, डिजिटल कृषि मिशन, प्राकृतिक खेती और धन-धान्य कृषि योजना जैसे कार्यक्रमों का एक साथ शुभारंभ कृषि क्षेत्र में व्यापक बदलाव लाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। इससे किसानों को आर्थिक सहायता, तकनीकी सुविधा, जोखिम सुरक्षा और टिकाऊ कृषि मॉडल का लाभ मिलेगा।
