गन्ना फसल पर ‘चूसक कीटों’ का बढ़ता हमला, सरकार की एडवाइजरी—समय पर नियंत्रण नहीं किया तो पैदावार घटेगा!
📍 लखनऊ | -प्रदेश में तेज गर्मी और शुष्क मौसम के बीच गन्ना फसल पर ग्रीष्मकालीन चूसक कीटों का प्रकोप तेजी से बढ़ने लगा है। इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए गन्ना एवं चीनी विभाग ने किसानों के लिए विस्तृत एडवाइजरी जारी की है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि यदि समय रहते इन कीटों पर नियंत्रण नहीं किया गया तो गन्ने की बढ़वार, उत्पादन और गुणवत्ता तीनों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
🔶 उच्च स्तर से जारी निर्देश, किसानों के हित में पहल
राज्य सरकार ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में गन्ना किसानों के हित को प्राथमिकता देते हुए यह कदम उठाया है। गन्ना मंत्री लक्ष्मी नारायण चौधरी एवं राज्यमंत्री संजय गंगवार के मार्गदर्शन में अपर मुख्य सचिव (चीनी उद्योग एवं गन्ना विकास) वीना कुमारी के निर्देश पर यह एडवाइजरी लागू की गई है।
आयुक्त, गन्ना एवं चीनी विभाग के अनुसार, गन्ना शोध परिषद, शाहजहांपुर के वैज्ञानिकों द्वारा फील्ड सर्वे के बाद यह पाया गया कि कई जिलों में कीटों का प्रकोप तेजी से फैल रहा है।
🔶 कौन-कौन से कीट कर रहे हैं नुकसान?
विशेषज्ञों ने तीन प्रमुख कीटों को गन्ना फसल के लिए सबसे खतरनाक बताया है—
▪️ काला चिकटा (ब्लैक बग)
यह काले रंग का छोटा कीट होता है, जो पत्तियों और गन्ने के गोप के बीच रहकर रस चूसता है। इसके प्रभाव से पत्तियां पीली पड़ जाती हैं और उन पर भूरे धब्बे दिखाई देने लगते हैं। परिणामस्वरूप पौधे की वृद्धि रुक जाती है।
▪️ थ्रिप्स
यह बेहद छोटे (2-3 मिमी) आकार के कीट होते हैं, जो गर्म और शुष्क मौसम में तेजी से फैलते हैं। ये पत्तियों की ऊपरी सतह में अंडे देते हैं और रस चूसकर पत्तियों को सफेद, मुड़ी हुई और चांदी जैसी चमकदार बना देते हैं।
▪️ सैनिक कीट (आर्मी वर्म)
यह पत्तियों को कुतरकर खाने वाला कीट है। इसकी सूंडी अवस्था सबसे ज्यादा नुकसान करती है। ये शाम के समय सक्रिय होकर पत्तियों को तेजी से खाती हैं और दिन में मिट्टी के अंदर छिप जाती हैं, जिससे पहचान करना मुश्किल हो जाता है।
🔶 क्यों बढ़ रहा है प्रकोप?
कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार अप्रैल से जून के बीच का गर्म और शुष्क मौसम इन कीटों के लिए अनुकूल होता है।
इसके अलावा—
- खेतों में नमी की कमी, खरपतवार और सूखी पत्तियों का जमाव, असंतुलित उर्वरकों का प्रयोग, इन सभी कारणों से कीटों का प्रकोप तेजी से बढ़ता है।
🔶 फसल बचाने के लिए अपनाएं ये उपाय
विशेषज्ञों ने किसानों को निम्नलिखित कृषि प्रबंधन अपनाने की सलाह दी है—
- नियमित अंतराल पर सिंचाई करें, ताकि मिट्टी में नमी बनी रहे
- खेत को खरपतवार एवं सूखी पत्तियों से साफ रखें
- संतुलित उर्वरकों का उपयोग करें
- फसल का नियमित निरीक्षण करें और शुरुआती लक्षण दिखते ही कार्रवाई करें
🔶 रासायनिक नियंत्रण: सही समय पर करें छिड़काव
यदि कीटों का प्रकोप अधिक दिखाई दे, तो वैज्ञानिकों ने निम्न कीटनाशकों के प्रयोग की सलाह दी है—
- प्रोफेनोफॉस 40% + साइपरमेथ्रिन 4% EC – 750 मिली प्रति हेक्टेयर
या - इमिडाक्लोप्रिड 17.8% SL – 200 मिली प्रति हेक्टेयर
👉 इन दवाओं को 625 लीटर पानी में मिलाकर प्रति हेक्टेयर छिड़काव करें
👉 छिड़काव का सर्वोत्तम समय सुबह या शाम माना गया है
🔶 विशेषज्ञों की चेतावनी: शुरुआती पहचान ही सबसे बड़ा बचाव
गन्ना शोध परिषद के वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया है कि कीटों की शुरुआती अवस्था में पहचान कर नियंत्रण करना ही सबसे प्रभावी उपाय है। यदि किसान देर करते हैं तो फसल को भारी नुकसान हो सकता है और उत्पादन में गिरावट तय है।
🔶 पैदावार और गुणवत्ता पर सीधा असर
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, चूसक कीट न केवल फसल की बढ़वार रोकते हैं बल्कि गन्ने में शर्करा (रिकवरी) की मात्रा भी कम कर देते हैं। इससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
🔶 किसानों से अपील
विभाग ने गन्ना किसानों से अपील की है कि वे नियमित रूप से अपनी फसल का निरीक्षण करें, वैज्ञानिक सलाह का पालन करें और समय रहते नियंत्रण उपाय अपनाएं, ताकि फसल सुरक्षित रहे और उत्पादन में वृद्धि हो सके।
चित्र: प्रतीकात्मक


























