📰 मध्यप्रदेश को ‘मिल्क कैपिटल’ बनाने का रोडमैप: सरकार खरीदेगी पूरा दूध, पशुपालकों को मिलेगा उचित दाम
ग्वालियर-मध्यप्रदेश में डेयरी सेक्टर को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा ऐलान किया है। Mohan Yadav ने साफ कहा है कि अब सरकार पशुपालकों से पूरा दूध खरीदेगी और उन्हें उसका समुचित मूल्य दिलाएगी। यह घोषणा ग्वालियर में आयोजित राज्य स्तरीय पशुपालक एवं दुग्ध उत्पादक सम्मेलन के दौरान की गई, जिसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए गेमचेंजर माना जा रहा है।
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🐄 डेयरी बनेगी ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि पशुपालन और डेयरी को मजबूत कर ही गांवों में स्थायी रोजगार और आय के स्रोत तैयार किए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य मध्यप्रदेश को देश का ‘मिल्क कैपिटल’ बनाना है। इसके लिए आधुनिक तकनीक, बेहतर प्रबंधन और निजी निवेश को बढ़ावा दिया जाएगा।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि डेयरी सेक्टर में निवेश बढ़ने से ग्रामीण युवाओं को गांव में ही रोजगार मिलेगा और पलायन रुकेगा।
💰 पशुपालकों के लिए घोषणाएं
सम्मेलन में कई अहम फैसले लिए गए, जिनसे पशुपालकों की आय बढ़ने की उम्मीद है—
- सरकार गाय और भैंस दोनों का पूरा दूध खरीदेगी
- गौवंश के आहार के लिए सहायता राशि ₹20 से बढ़ाकर ₹40 प्रति पशु
- 25 गायों की गौशाला खोलने पर ₹10 लाख तक सब्सिडी
- हर ब्लॉक में बनेगा एक ‘वृंदावन ग्राम’
- डेयरी क्षेत्र में निवेश बढ़ाकर रोजगार के नए अवसर
🏥 ग्वालियर में पशु स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार
मुख्यमंत्री ने ग्वालियर क्षेत्र के लिए विशेष घोषणाएं करते हुए कहा—
- ग्वालियर में खुलेगा पशु वेलनेस सेंटर, पशु स्वास्थ्य केंद्र का होगा उन्नयन, डबरा में बनेगा नया पशु चिकित्सालय
इन कदमों से पशुपालकों को स्थानीय स्तर पर इलाज और सेवाएं आसानी से मिल सकेंगी।
🚜 किसानों के लिए भी बड़ी राहत
मुख्यमंत्री ने किसानों को भरोसा दिलाते हुए कहा कि यदि विकास कार्यों के लिए जमीन ली जाएगी, तो उन्हें चार गुना मुआवजा दिया जाएगा। साथ ही सरकार गेहूं का “दाना-दाना” खरीदने के लिए भी प्रतिबद्ध है।
📈 डेयरी सेक्टर में तेजी से बढ़ रहा उत्पादन
राज्य में डेयरी सेक्टर की प्रगति पर भी सरकार ने आंकड़े साझा किए—
- दूध संग्रहण 9 लाख लीटर से बढ़कर 12 लाख लीटर प्रतिदिन, लक्ष्य: 50 लाख लीटर प्रतिदिन
- प्रदेश में 5 लाख से अधिक गौवंश का पालन, 1300 नई गौशालाओं का निर्माण
🌱 आत्मनिर्भर गौशालाओं का मॉडल
ग्वालियर की लाल टिपारा गौशाला जैसे मॉडल को उदाहरण बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यहां 10 हजार से अधिक गौवंश से जैविक खाद और CNG का उत्पादन हो रहा है। यह मॉडल पशुपालन को सिर्फ कृषि तक सीमित नहीं, बल्कि ऊर्जा और जैविक उत्पादों से जोड़ता है।
🎯 सरकार का फोकस: “गांव में रोजगार, पशुपालक बने आत्मनिर्भर”
सम्मेलन के दौरान पशुपालकों को विभिन्न योजनाओं से जोड़ते हुए उन्हें डेयरी व्यवसाय अपनाने का संकल्प दिलाया गया। सरकार का साफ संदेश है—
“किसान और पशुपालक मजबूत होंगे, तभी ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।”
🔍 निष्कर्ष
मध्यप्रदेश सरकार की यह पहल केवल दूध खरीदने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक व्यापक रणनीति है—जिसमें आय बढ़ाना, रोजगार सृजन, आधुनिक डेयरी सिस्टम और आत्मनिर्भर गांव शामिल हैं। यदि योजनाएं जमीन पर सही तरीके से लागू होती हैं, तो आने वाले समय में मध्यप्रदेश सच में देश का “मिल्क हब” बन सकता है।
