मूंगफली की गुणवत्ता और प्रोसेसिंग को लेकर आई बड़ी खबर!

मूंगफली की नई किस्मों का रास्ता साफ: ICRISAT ने ब्लांचेबिलिटी के जीन का किया खुलासा

हैदराबाद/नई दिल्ली, –कृषि अनुसंधान के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण प्रगति करते हुए International Crops Research Institute for the Semi-Arid Tropics (आईसीआरआईसैट) के वैज्ञानिकों ने मूंगफली की “ब्लांचेबिलिटी” यानी बीज का छिलका आसानी से हटने की क्षमता के पीछे छिपे आनुवंशिक तंत्र को समझने में बड़ी सफलता हासिल की है। यह खोज खाद्य प्रसंस्करण उद्योग के लिए बेहद अहम मानी जा रही है, क्योंकि इससे उत्पाद की गुणवत्ता, लागत और उत्पादन दक्षता पर सीधा असर पड़ेगा।

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खाद्य उद्योग की जरूरत से जुड़ा शोध

आज के समय में मूंगफली का उपयोग चॉकलेट, पीनट बटर, स्नैक बार और कई अन्य प्रोसेस्ड खाद्य उत्पादों में बड़े पैमाने पर किया जाता है। इन सभी उत्पादों के निर्माण से पहले मूंगफली के बीज का बाहरी छिलका हटाना आवश्यक होता है। लेकिन वर्तमान में प्रचलित कई किस्मों में यह प्रक्रिया आसान नहीं होती, जिससे छिलका पूरी तरह नहीं निकलता और उत्पाद की गुणवत्ता प्रभावित होती है।

इसी समस्या के समाधान के लिए आईसीआरआईसैट के वैज्ञानिकों ने गहन अध्ययन किया, जिसके परिणाम प्रतिष्ठित वैज्ञानिक जर्नल Communications Biology और BMC Plant Biology में प्रकाशित हुए हैं।

184 किस्मों पर शोध, मिले सटीक आनुवंशिक संकेत

वैज्ञानिकों ने आईसीआरआईसैट जीनबैंक में संरक्षित 184 मूंगफली किस्मों (एक्सेशन) का विस्तृत विश्लेषण किया। इस अध्ययन के दौरान ब्लांचेबिलिटी से जुड़े कई महत्वपूर्ण जीनोमिक क्षेत्रों की पहचान की गई।

शोध में छह प्रमुख KASP (Kompetitive Allele Specific PCR) जेनेटिक मार्कर को प्रमाणित किया गया, जिनका उपयोग भविष्य में बेहतर किस्मों के विकास में किया जा सकेगा। खास तौर पर “S17_133752226” नामक मार्कर को उच्च ब्लांचेबिलिटी से लगातार जुड़ा पाया गया, जो प्रिसिजन ब्रीडिंग के लिए अत्यंत उपयोगी साबित होगा।

वैज्ञानिकों की प्रतिक्रिया

आईसीआरआईसैट के महानिदेशक Himanshu Pathak ने इस उपलब्धि को उद्योग-उन्मुख शोध का उत्कृष्ट उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि यह कार्य दर्शाता है कि कैसे वैज्ञानिक अनुसंधान सीधे उद्योग की समस्याओं का समाधान प्रदान कर सकता है।

उन्होंने आगे बताया कि संस्थान ने हाल ही में “CATALYST” पहल शुरू की है, जिसका उद्देश्य उद्योग के साथ साझेदारी को मजबूत करना और व्यावहारिक, प्रभावी तथा व्यावसायिक रूप से उपयोगी समाधान विकसित करना है।

वहीं, आईसीआरआईसैट के उपमहानिदेशक (अनुसंधान एवं नवाचार) Stanford Blade ने कहा कि कृषि-खाद्य मूल्य श्रृंखला में निजी क्षेत्र की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने जोर देकर कहा कि फसल सुधार कार्यक्रमों को किसानों, उपभोक्ताओं और उद्योग—तीनों की जरूरतों के अनुरूप होना चाहिए।

बेहतर किस्मों की पहचान और प्रदर्शन

अध्ययन में कई पारंपरिक किस्मों (लैंडरेस) की पहचान की गई, जिनमें ब्लांचेबिलिटी का प्रदर्शन अत्यधिक बेहतर रहा।

  • वर्षा ऋतु में ICG297, ICG11515, ICG14710, ICG15419 जैसी किस्मों ने शानदार प्रदर्शन किया।
  • वहीं, वर्षा के बाद की ऋतु में ICG9507, ICG9315, ICG8106 जैसी किस्में बेहतर साबित हुईं।

इसके अलावा, “स्पेनिश बंच” प्रकार की किस्मों में 60 प्रतिशत से अधिक ब्लांचिंग दक्षता दर्ज की गई, जो उद्योग के लिए अत्यंत उपयोगी है।

शोध में यह भी पाया गया कि “fastigiata” उप-प्रजाति में “hypogaea” की तुलना में अधिक ब्लांचेबिलिटी मौजूद है, जिससे भविष्य में उन्नत किस्मों के विकास की नई संभावनाएं खुलती हैं।

जीन स्तर पर समझ से मिलेगी गति

आईसीआरआईसैट के प्रमुख वैज्ञानिक Manish K. Pandey के अनुसार, यह अध्ययन ब्रीडर्स को एक व्यापक जीनोमिक टूलकिट प्रदान करता है। इससे पहले संस्थान द्वारा उच्च ओलिक एसिड, रस्ट एवं लीफ स्पॉट रोग प्रतिरोध और बीज निष्क्रियता जैसे गुणों पर विकसित तकनीकों ने वैश्विक स्तर पर नई किस्मों के विकास को गति दी है।

उन्होंने कहा कि अब ब्लांचेबिलिटी को भी इस श्रृंखला में शामिल करने से भविष्य की मूंगफली किस्में न केवल अधिक उत्पादन देने वाली और पोषण से भरपूर होंगी, बल्कि उद्योग की जरूरतों के अनुरूप भी होंगी।

राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय सहयोग से सफलता

यह शोध Indian Council of Agricultural Research, Council of Scientific and Industrial Research-यूजीसी, Mars Inc. और Bill & Melinda Gates Foundation सहित कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के सहयोग से पूरा किया गया।

किसानों और उद्योग दोनों को फायदा

विशेषज्ञों के अनुसार, इस खोज से किसानों को ऐसी मूंगफली किस्में मिलेंगी जो बेहतर गुणवत्ता की होंगी और बाजार में अधिक मूल्य प्राप्त करेंगी। वहीं, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग को कच्चे माल की बेहतर गुणवत्ता मिलने से उत्पादन लागत कम होगी और उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार होगा।

अंत में 

मूंगफली के बीज छिलका हटाने की आनुवंशिकी को समझने की यह उपलब्धि कृषि अनुसंधान में एक मील का पत्थर साबित हो सकती है। यह न केवल वैज्ञानिक नवाचार का उदाहरण है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि उद्योग और अनुसंधान संस्थानों के बीच मजबूत साझेदारी भविष्य की कृषि को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बना सकती है।

स्रोत और चित्र सौजन्य:ICRISAT