राजस्थान में पशुपालकों को राहत, मोबाइल वेटनरी सेवाएं होंगी और तेज!

मंगला पशु बीमा योजना और मोबाइल वेटनरी सेवाओं पर सख्ती: लक्ष्य पूरे नहीं करने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई, कॉल सेंटर की क्षमता बढ़ेगी!

जयपुर, 22 जुलाई। राजस्थान सरकार ने पशुपालकों को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराने और पशुधन सुरक्षा योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सख्त कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। पशुपालन, गोपालन, डेयरी एवं देवस्थान मंत्री जोराराम कुमावत ने बुधवार को एक ओर जहां मंगला पशु बीमा योजना की प्रगति की समीक्षा की, वहीं जामडोली स्थित मोबाइल वेटनरी यूनिट के कॉल सेंटर का औचक निरीक्षण कर व्यवस्थाओं में सुधार के निर्देश दिए।

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शासन सचिवालय में आयोजित उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में मंत्री ने मंगला पशु बीमा योजना के लक्ष्यों में पिछड़ रहे जिलों और अधिकारियों पर नाराजगी जताते हुए स्पष्ट किया कि पशुपालकों के हितों से जुड़ी योजनाओं में लापरवाही किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने बीमा लक्ष्यों से पीछे चल रहे जिलों के संयुक्त निदेशकों के विरुद्ध राजस्थान सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमों के तहत 17 सीसी के अंतर्गत चार्जशीट जारी करने के निर्देश दिए।

विशेष शिविर लगाकर पूरा होगा बीमा लक्ष्य

मंत्री ने विभाग को मंगला पशु बीमा योजना के शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल करने के लिए विशेष शिविर आयोजित करने के निर्देश दिए। साथ ही बीमित पशु की मृत्यु की स्थिति में पोस्टमार्टम के समय संबंधित पशु चिकित्सक और बीमा सर्वेयर दोनों की उपस्थिति अनिवार्य कर दी गई है, ताकि दावों के निस्तारण में पारदर्शिता बनी रहे और किसी प्रकार की अनियमितता की संभावना न रहे।

उन्होंने विभागीय अधिकारियों को लंबित बीमा दावों और पॉलिसियों का शीघ्र निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए।

गौशालाओं के पशुओं की पहचान के लिए अलग रंग के टैग

बैठक में गौशालाओं में बीमित पशुओं की सही पहचान सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक गौशाला के पशुओं के टैग अलग-अलग रंगों में जारी करने का निर्णय लिया गया। इससे पशुओं की पहचान और रिकॉर्ड प्रबंधन अधिक व्यवस्थित हो सकेगा।

जोधपुर संभाग के बालोतरा, बाड़मेर और जैसलमेर जिलों में भेड़, बकरी और ऊंटों के बीमा तथा पाली, जालोर और सिरोही जिलों में गाय एवं भैंसों के बीमा कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए गए। इन जिलों को निर्धारित 42 लाख पशुओं के बीमा लक्ष्य को जल्द पूरा करने के लिए पाबंद किया गया है।

मोबाइल वेटनरी कॉल सेंटर पर औचक निरीक्षण

इसी दिन मंत्री ने जामडोली स्थित मोबाइल वेटनरी यूनिट के कॉल सेंटर का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान पांच कॉलिंग एक्जीक्यूटिव ड्यूटी से अनुपस्थित पाए गए, जिस पर उन्होंने तत्काल अनुशासनात्मक कार्रवाई के निर्देश दिए।

मंत्री ने कहा कि पशुपालकों की शिकायतों और पशु चिकित्सा संबंधी कॉल्स के त्वरित समाधान के लिए कॉल सेंटर की क्षमता बढ़ाना आवश्यक है। इसी उद्देश्य से कॉलिंग एक्जीक्यूटिव के पदों की संख्या 44 से बढ़ाकर 60 करने का निर्णय लिया गया है।

पारदर्शी निगरानी के लिए नया मॉनिटरिंग सिस्टम

कॉल सेंटर की कार्यप्रणाली को अधिक जवाबदेह और पारदर्शी बनाने के लिए पशुपालन विभाग के दो अधिकारियों की नियमित ड्यूटी लगाने के निर्देश दिए गए हैं। ये अधिकारी कर्मचारियों की उपस्थिति, कॉल रिस्पॉन्स और शिकायत निस्तारण की दैनिक निगरानी करेंगे।

मोबाइल वेटनरी यूनिट के लिए नए दिशा-निर्देश

पशुओं के उपचार की गुणवत्ता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए मोबाइल वेटनरी यूनिटों को नए दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। अब प्रत्येक मोबाइल वैन को उपचार के बाद पशुपालक से रजिस्टर में हस्ताक्षर करवाने होंगे। प्रत्येक यूनिट में उपचार और सेवाओं का रिकॉर्ड रखने के लिए निर्धारित प्रपत्र और रजिस्टर का संधारण अनिवार्य किया जाएगा।

साथ ही यदि किसी कारण से कोई कॉल लंबित रह जाती है, तो उसे अगले दिन की प्राथमिक सूची में शामिल कर हर हाल में पशु का उपचार सुनिश्चित किया जाएगा।

पशुपालकों के लिए क्या होगा लाभ?

विशेषज्ञों का मानना है कि मंगला पशु बीमा योजना की प्रभावी निगरानी, लंबित दावों के शीघ्र निस्तारण और मोबाइल वेटनरी सेवाओं की क्षमता बढ़ने से राज्य के लाखों पशुपालकों को सीधा लाभ मिलेगा। पशुधन की मृत्यु या बीमारी की स्थिति में आर्थिक सुरक्षा मजबूत होगी, जबकि घर-घर पशु चिकित्सा सेवाओं की उपलब्धता बढ़ने से दुग्ध उत्पादन और पशुपालन आधारित आय में भी सुधार की संभावना है।

मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य पशुपालकों को समयबद्ध, पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण सेवाएं उपलब्ध कराना है तथा सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना सर्वोच्च प्राथमिकता है।