शिमो, काशिमा, शिरासागी दवाओं के दाम घटे
लखनऊ, 26 अप्रैल प्रदेश के गन्ना किसानों के हित में एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। प्रमुख सचिव, चीनी उद्योग एवं गन्ना विकास, श्रीमती वीणा कुमारी मीणा की अध्यक्षता में आयोजित समीक्षा बैठक में शिमो, काशिमा और शिरासागी उत्पादों की बिक्री दरों में संशोधन कर नई, कम दरें तय की गई हैं। यह बैठक इफको और गन्ना विकास विभाग के संयुक्त तत्वावधान में लाल बहादुर शास्त्री गन्ना किसान संस्थान में सम्पन्न हुई।
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बैठक में बताया गया कि इफको की सहयोगी संस्था द्वारा कीटनाशक दवाओं की दरों में अतिरिक्त छूट प्रदान की गई है ताकि किसानों को उचित मूल्य पर गुणवत्तापूर्ण उत्पाद उपलब्ध हो सकें। उत्तर प्रदेश सहकारी गन्ना समिति संघ ने सभी क्षेत्रीय उप गन्ना आयुक्तों और जिला गन्ना अधिकारियों को संशोधित दरों के संबंध में निर्देश भी जारी कर दिये हैं।
संशोधित दामों का ब्यौरा:
प्रबन्ध निदेशक, उत्तर प्रदेश सहकारी गन्ना समिति संघ ने जानकारी देते हुए बताया कि अब किसानों को निम्न दरों पर दवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी —
शिमो (150 मि.ली.) — पहले ₹1200, अब मात्र ₹885 में।

शिमो (60 मि.ली.) — पहले ₹500, अब ₹390 में।
काशिमा (1000 ग्राम) — पहले ₹180, अब ₹140 में।
काशिमा (4000 ग्राम) — पहले ₹650, अब ₹520 में।
शिरासागी (100 ग्राम) — पहले ₹900, अब ₹755 में।
इतना ही नहीं, इन दवाओं पर किसानों को 50 प्रतिशत अनुदान भी उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे किसानों की लागत में और भी अधिक कमी आएगी।
किसानों को होगा व्यापक लाभ:
प्रमुख सचिव श्रीमती वीणा कुमारी मीणा ने बैठक में कहा कि इस कदम से गन्ना किसानों की आय में वृद्धि होगी और वे समय पर कम लागत में अपने खेतों में कीटनाशक दवाओं का छिड़काव कर सकेंगे। इससे न केवल उत्पादन बढ़ेगा बल्कि कीट व रोगों से फसल को भी बेहतर सुरक्षा मिलेगी।
उन्होंने यह भी बताया कि सभी क्षेत्रीय उप गन्ना आयुक्तों एवं जिला गन्ना अधिकारियों को संशोधित दरों की जानकारी देते हुए निर्देश जारी कर दिये गये हैं कि किसानों तक इसका अधिकतम लाभ पहुँचाया जाए। गन्ना समितियों के माध्यम से इन दवाओं का वितरण किया जाएगा ताकि पारदर्शिता बनी रहे और किसान सही मूल्य पर गुणवत्तापूर्ण उत्पाद प्राप्त कर सकें।
इफको की बड़ी भूमिका:
इफको मेक क्राफ्ट साइंस प्राइवेट लिमिटेड द्वारा उपलब्ध कराई जा रही ये दवाएं उच्च गुणवत्ता की हैं, जो गन्ने की फसल में प्रमुख कीटों पर प्रभावी नियंत्रण करती हैं। आयुक्त / निबंधक, सहकारी गन्ना विकास समितियों ने बताया कि संशोधित दरों से गन्ना किसानों को न केवल कीटनाशक और खाद की खरीद में बचत होगी, बल्कि उनकी आर्थिक स्थिति भी सुदृढ़ होगी। खेती में लगने वाली लागत घटने से किसानों का मुनाफा स्वतः बढ़ेगा।
सरकार की किसान-हितैषी नीति:
प्रदेश सरकार लगातार किसानों की आमदनी बढ़ाने और खेती को लाभकारी बनाने के लिए विभिन्न कदम उठा रही है। इस निर्णय को इसी क्रम में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है। गन्ना किसानों के लिए कीटनाशक दवाओं की कम दर पर उपलब्धता से भविष्य में गन्ना उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि होने की भी संभावना है।
सरकार का उद्देश्य है कि किसान सशक्त बनें, उनकी उत्पादन लागत घटे और वे खेती को एक लाभकारी व्यवसाय के रूप में आगे बढ़ा सकें।


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