पीएम मोदी को मिला ग्लोबल कृषि सम्मान, दुनिया ने माना भारत का कृषि मॉडल!

रोम में गूंजा भारत का कृषि नेतृत्व, एफएओ मुख्यालय में हुआ भव्य सम्मान समारोह

रोम -इटली की राजधानी में संयुक्त राष्ट्र की खाद्य एवं कृषि संस्था Food and Agriculture Organization (FAO) ने भारत के प्रधानमंत्री Narendra Modi को अपने सर्वोच्च सम्मान ‘FAO Agricola Medal’ से सम्मानित किया है। इटली की राजधानी Rome स्थित एफएओ मुख्यालय के ऐतिहासिक प्लेनरी हॉल में आयोजित विशेष समारोह में यह सम्मान प्रदान किया गया।

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यह पुरस्कार भारत में कृषि सुधार, खाद्य सुरक्षा, ग्रामीण विकास और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में किए गए प्रयासों की वैश्विक स्तर पर मान्यता माना जा रहा है। समारोह के दौरान मौजूद अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों ने भारत की कृषि नीतियों और खाद्य प्रबंधन प्रणाली को विकासशील देशों के लिए प्रेरणादायक मॉडल बताया।

एफएओ प्रमुख ने कहा- भारत ने दुनिया को दिखाया समावेशी कृषि विकास का रास्ता

एफएओ के महानिदेशक QU Dongyu ने प्रधानमंत्री मोदी को सम्मानित करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में भारत ने कृषि और खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में कई ऐतिहासिक और परिवर्तनकारी कदम उठाए हैं।

Photo:FAO

उन्होंने कहा कि भारत ने एक ओर कृषि उत्पादकता बढ़ाने पर ध्यान दिया, वहीं दूसरी ओर छोटे किसानों, ग्रामीण समुदायों और गरीब तबकों को योजनाओं के केंद्र में रखा। यही कारण है कि भारत आज वैश्विक कृषि विमर्श में एक मजबूत और प्रभावशाली देश बनकर उभरा है।

QU Dongyu ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने किसानों की आय, खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण विकास को राष्ट्रीय एजेंडा में सर्वोच्च प्राथमिकता दी। एफएओ के अनुसार भारत की कई योजनाएं अब दूसरे देशों के लिए अध्ययन और अनुकरण का विषय बन रही हैं।

80 करोड़ लोगों तक खाद्यान्न पहुंचाने की योजना को मिली बड़ी सराहना

एफएओ प्रमुख ने कोविड महामारी के दौरान भारत द्वारा चलाई गई विशाल खाद्य सुरक्षा योजना का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि महामारी के कठिन दौर में भारत ने लगभग 80 करोड़ लोगों तक मुफ्त खाद्यान्न पहुंचाकर दुनिया के सामने मानवीय संवेदनशीलता और प्रशासनिक क्षमता का उदाहरण पेश किया।

विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी आबादी तक नियमित खाद्यान्न पहुंचाना किसी भी देश के लिए बड़ी चुनौती होती है, लेकिन भारत ने डिजिटल तकनीक और मजबूत वितरण व्यवस्था के जरिए इसे सफल बनाया।

यह योजना केवल राहत कार्यक्रम नहीं रही, बल्कि इसने यह साबित किया कि यदि राजनीतिक इच्छाशक्ति और तकनीकी पारदर्शिता साथ हो तो बड़े पैमाने पर भी सामाजिक सुरक्षा योजनाएं प्रभावी ढंग से लागू की जा सकती हैं।

किसानों को प्रत्यक्ष सहायता और तकनीक आधारित सुधारों की चर्चा

एफएओ ने भारत में किसानों को दी जा रही प्रत्यक्ष आय सहायता योजनाओं की भी सराहना की। संस्था के अनुसार 11 करोड़ से अधिक किसानों तक सीधे आर्थिक सहायता पहुंचाना दुनिया के सबसे बड़े किसान सहायता कार्यक्रमों में शामिल है।

इसके साथ ही कृषि क्षेत्र में डिजिटल प्लेटफॉर्म, किसान डेटाबेस, मौसम आधारित सलाह, ऑनलाइन भुगतान और तकनीक आधारित सेवा वितरण मॉडल को भी वैश्विक स्तर पर सराहा गया।

विशेषज्ञों के अनुसार भारत ने कृषि प्रशासन को धीरे-धीरे डिजिटल और डेटा आधारित बनाकर भ्रष्टाचार कम करने और योजनाओं की पारदर्शिता बढ़ाने में सफलता हासिल की है।

प्राकृतिक खेती और मिलेट्स अभियान को वैश्विक समर्थन

एफएओ महानिदेशक ने भारत के प्राकृतिक खेती और पुनर्योजी कृषि मॉडल की भी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि भारत पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ खेती की दिशा में गंभीर प्रयास कर रहा है, जिसका असर आने वाले वर्षों में वैश्विक कृषि नीतियों पर भी दिखाई देगा।

विशेष रूप से मोटे अनाज यानी मिलेट्स को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने में भारत की भूमिका को बड़ी उपलब्धि बताया गया। भारत के प्रयासों से वर्ष 2023 को ‘अंतरराष्ट्रीय मिलेट वर्ष’ घोषित किया गया था।

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि मिलेट्स न केवल पोषण से भरपूर हैं बल्कि कम पानी और कठिन जलवायु परिस्थितियों में भी बेहतर उत्पादन देते हैं। ऐसे में जलवायु परिवर्तन की चुनौती के बीच भारत का यह अभियान भविष्य की खाद्य सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर को बताया विकासशील देशों के लिए मॉडल

एफएओ ने भारत की डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना यानी Digital Public Infrastructure की भी सराहना की। QU Dongyu ने कहा कि भारत ने तकनीक को केवल शहरी विकास तक सीमित नहीं रखा बल्कि ग्रामीण और कृषि क्षेत्रों तक पहुंचाया।

आधार, डिजिटल भुगतान, प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण और डिजिटल सेवा प्लेटफॉर्म जैसी व्यवस्थाओं ने करोड़ों लोगों तक सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत का यह मॉडल अफ्रीका और एशिया के कई विकासशील देशों के लिए उपयोगी साबित हो सकता है, जहां बड़ी आबादी अब भी पारंपरिक प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर निर्भर है।

प्रधानमंत्री मोदी बोले- यह सम्मान भारत के किसानों और वैज्ञानिकों को समर्पित

सम्मान ग्रहण करने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह पुरस्कार किसी एक व्यक्ति का सम्मान नहीं बल्कि भारत के करोड़ों किसानों, कृषि वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और ग्रामीण समुदायों की मेहनत का वैश्विक सम्मान है।

Photo:FAO

उन्होंने कहा कि भारतीय किसान सीमित संसाधनों के बावजूद देश और दुनिया की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत कृषि क्षेत्र में नवाचार, टिकाऊ खेती और पोषण सुरक्षा को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।

उन्होंने एफएओ के योगदान की भी सराहना करते हुए कहा कि संस्था ने पिछले आठ दशकों में वैश्विक स्तर पर भूख और गरीबी मिटाने के लिए उल्लेखनीय कार्य किया है।

भारत-एफएओ संबंधों का किया उल्लेख

प्रधानमंत्री मोदी ने भारत और एफएओ के लंबे संबंधों का जिक्र करते हुए कहा कि दोनों के बीच सहयोग लगातार मजबूत हुआ है। उन्होंने कहा कि भारत केवल एफएओ से सहयोग लेने वाला देश नहीं, बल्कि वैश्विक कृषि एजेंडा को दिशा देने वाला साझेदार भी है।

प्रधानमंत्री ने दो भारतीय हस्तियों का विशेष उल्लेख किया। इनमें विकासशील देशों से एफएओ के पहले महानिदेशक रहे Binay Ranjan Sen और हरित क्रांति के जनक M. S. Swaminathan शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि इन दोनों महान व्यक्तित्वों ने वैश्विक कृषि नीतियों और खाद्य सुरक्षा की सोच को नई दिशा देने में अहम भूमिका निभाई।

‘फोर बेटर्स’ विजन को बताया भविष्य का रास्ता

प्रधानमंत्री मोदी ने एफएओ के ‘Four Betters’ विजन — बेहतर उत्पादन, बेहतर पोषण, बेहतर पर्यावरण और बेहतर जीवन — की सराहना करते हुए कहा कि यही भविष्य की टिकाऊ कृषि व्यवस्था का आधार है।

उन्होंने कहा कि दुनिया को अब केवल अधिक उत्पादन की नहीं बल्कि पोषण, पर्यावरण संरक्षण और समावेशी विकास की दिशा में संतुलित कृषि मॉडल की आवश्यकता है।

अंतरराष्ट्रीय समुदाय की मौजूदगी में हुआ समारोह

इस अवसर पर कई देशों के राजदूत, एफएओ सदस्य देशों के प्रतिनिधि, संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारी और विभिन्न अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद रहे। समारोह में International Fund for Agricultural Development (IFAD) और World Food Programme (WFP) के अधिकारियों ने भी भाग लिया।

भारतीय प्रतिनिधिमंडल और संयुक्त राष्ट्र संस्थाओं में कार्यरत भारतीय अधिकारियों ने भी इस अवसर को भारत के लिए गौरवपूर्ण क्षण बताया।

वैश्विक कृषि राजनीति में भारत की बढ़ती भूमिका

विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी को मिला यह सम्मान केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं बल्कि भारत की बढ़ती वैश्विक कृषि ताकत की पहचान है।

पिछले कुछ वर्षों में भारत ने खाद्यान्न उत्पादन, डिजिटल कृषि, पोषण सुरक्षा, जलवायु अनुकूल खेती और दक्षिण-दक्षिण सहयोग जैसे क्षेत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई है। इसके कारण वैश्विक मंचों पर भारत की विश्वसनीयता और प्रभाव लगातार बढ़ा है।

विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले समय में भारत वैश्विक कृषि नीति निर्माण, खाद्य सुरक्षा सहयोग और टिकाऊ खेती के मॉडल में और बड़ी भूमिका निभा सकता है।

Source: FAO Photo credit FAO