कृषि सुधारों के लिए केंद्र-राज्य और निजी क्षेत्र की साझेदारी पर जोर!

विकसित भारत के लिए कृषि क्षेत्र में ‘होल ऑफ गवर्नमेंट’ मॉडल जरूरी, अंतर-मंत्रालयी सम्मेलन में बनी कार्ययोजना !!

नई दिल्ली, – कृषि क्षेत्र को अधिक उत्पादक, टिकाऊ और किसान-केंद्रित बनाने के लिए केंद्र सरकार ने विभिन्न मंत्रालयों के बीच समन्वित प्रयासों पर जोर दिया है। कृषि भवन में आयोजित “भारत की कृषि का रूपांतरण – अंतर-मंत्रालयी सम्मेलन” में कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि किसानों की आय बढ़ाने, कृषि क्षेत्र को प्रतिस्पर्धी बनाने और ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को हासिल करने के लिए ‘होल ऑफ गवर्नमेंट’ और ‘होल वैल्यू चेन’ दृष्टिकोण अपनाना समय की आवश्यकता है। सम्मेलन में केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों, राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारियों, कृषि विशेषज्ञों, अनुसंधान संस्थानों तथा अन्य हितधारकों ने भाग लिया। मत्स्यपालन, पशुपालन एवं डेयरी तथा पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह भी वर्चुअल माध्यम से जुड़े।
योजनाएं पर्याप्त, चुनौती प्रभावी क्रियान्वयन की सम्मेलन को संबोधित करते हुए मंत्री ने कहा कि कृषि क्षेत्र में सुधार और आधुनिकीकरण के लिए अनेक योजनाएं पहले से संचालित हैं, लेकिन सबसे बड़ी आवश्यकता उनके प्रभावी क्रियान्वयन की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नीति निर्माण के साथ-साथ जमीनी स्तर पर आने वाली बाधाओं को दूर करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि कृषि विकास केवल सरकार के प्रयासों से संभव नहीं है। इसके लिए राज्यों, कृषि विश्वविद्यालयों, कृषि विज्ञान केंद्रों, निजी क्षेत्र, स्टार्टअप्स और किसान संगठनों के बीच मजबूत साझेदारी विकसित करनी होगी।

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कृषि से बाजार तक पूरी वैल्यू चेन पर फोकस !!

बैठक में फसल उत्पादन के साथ-साथ पोस्ट हार्वेस्ट मैनेजमेंट, भंडारण, प्रसंस्करण और विपणन को मजबूत बनाने पर विशेष चर्चा हुई। मंत्री ने कहा कि फल एवं सब्जियों के खराब होने से किसानों को होने वाले आर्थिक नुकसान को कम करने के लिए मूल्य श्रृंखला विकास को प्राथमिकता दी जा रही है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि बिहार की प्रसिद्ध लीची जैसी फसलों की शेल्फ लाइफ बढ़ाने तथा कृषि क्लस्टर आधारित विकास मॉडल को मजबूत बनाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है, जिससे किसानों को बेहतर मूल्य प्राप्त हो सके।

एग्रीस्टैक और फार्मर आईडी को भूमि रिकॉर्ड से जोड़ने पर जोर !!

डिजिटल कृषि मिशन के तहत विकसित एग्रीस्टैक और फार्मर आईडी जैसी पहलों का उल्लेख करते हुए मंत्री ने कहा कि इनका वास्तविक लाभ तभी मिलेगा जब इन्हें भूमि अभिलेखों और लैंड पार्सल डेटा से पूरी तरह जोड़ा जाएगा। उन्होंने चेताया कि तकनीक का उपयोग केवल डिजिटल समाधान तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उसमें मानवीय दृष्टिकोण और किसानों की वास्तविक जरूरतों को भी शामिल किया जाना चाहिए।

पूर्वोत्तर भारत बनेगा कृषि निर्यात का नया केंद्र !!

सम्मेलन में पूर्वोत्तर राज्यों की कृषि संभावनाओं पर भी विशेष चर्चा हुई। मंत्री ने कहा कि इस क्षेत्र की जलवायु अदरक, हल्दी, कंद फसलों और विशिष्ट मिर्च जैसी उच्च मूल्य वाली फसलों के लिए बेहद अनुकूल है। इन उत्पादों को वैश्विक बाजारों तक पहुंचाने के लिए लॉजिस्टिक्स, भंडारण और निर्यात अवसंरचना विकसित करने की आवश्यकता है। इसी उद्देश्य से पूर्वोत्तर राज्यों के मुख्यमंत्रियों और कृषि मंत्रियों के साथ जल्द क्षेत्रवार विशेष बैठक आयोजित की जाएगी।

सुझावों को तीन श्रेणियों में लागू करने का निर्णय !!

सम्मेलन में प्राप्त सुझावों को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए उन्हें तीन श्रेणियों में विभाजित करने का निर्णय लिया गया—
* शॉर्ट टर्म: ऐसे सुझाव जिन्हें वर्तमान सीजन में मामूली प्रक्रियागत बदलावों के साथ लागू किया जा सकता है।
* मीडियम टर्म: ऐसे सुझाव जिन्हें मौजूदा योजनाओं के माध्यम से बेहतर तरीके से लागू किया जा सकता है।
* लॉन्ग टर्म: ऐसे सुझाव जिनके लिए नई नीतियों, संरचनात्मक सुधारों और विस्तृत प्रक्रियाओं की आवश्यकता होगी।
इसके लिए एक विशेष निगरानी तंत्र स्थापित किया जाएगा जो हर महीने प्रगति की समीक्षा करेगा।

अल नीनो और जल संकट से निपटने की तैयारी !!

मंत्री ने भारत की रिकॉर्ड खाद्यान्न उत्पादन क्षमता, मत्स्य पालन क्षेत्र की प्रगति और कृषि क्षेत्र की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि देश संभावित अल नीनो प्रभाव और जल संकट जैसी चुनौतियों के लिए सतर्क है।
उन्होंने भरोसा जताया कि पर्याप्त खाद्यान्न भंडार, बेहतर संसाधन प्रबंधन और वैज्ञानिक कृषि रणनीतियों के माध्यम से इन चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना किया जा सकेगा।

विकसित भारत के लक्ष्य में कृषि की केंद्रीय भूमिका !!

सम्मेलन के समापन पर मंत्री ने कहा कि कृषि केवल खाद्यान्न उत्पादन का माध्यम नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था, रोजगार, पोषण सुरक्षा और निर्यात वृद्धि का प्रमुख आधार है। उन्होंने सभी मंत्रालयों और संस्थानों से आह्वान किया कि सम्मेलन में प्राप्त सुझावों को समयबद्ध तरीके से लागू कर कृषि क्षेत्र को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जाए, जिससे ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को मजबूती मिल सके।