शिलॉन्ग में डेयरी सेक्टर को मजबूती देने की पहल: NDDB का तीन दिवसीय विशेष प्रशिक्षण सम्पन्न !!
शिलॉन्ग/मेघालय -देश में डेयरी उद्योग को आधुनिक तकनीकों और वैश्विक गुणवत्ता मानकों के अनुरूप विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) के मानसिंह इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रेनिंग, मेहसाणा द्वारा शिलॉन्ग में तीन दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम ईस्ट खासी हिल्स डिस्ट्रिक्ट कोऑपरेटिव मिल्क यूनियन लिमिटेड में सम्पन्न हुआ, जिसमें 20 प्रतिभागियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम ‘डेयरी प्लांट ऑपरेशन एवं क्वालिटी मैनेजमेंट सिस्टम’ विषय पर केंद्रित रहा, जिसका उद्देश्य डेयरी संयंत्रों के संचालन को अधिक कुशल, सुरक्षित और लाभकारी बनाना था।
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कच्चे दूध की गुणवत्ता से लेकर प्रोसेसिंग तक व्यापक प्रशिक्षण !!
कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने कच्चे दूध की गुणवत्ता, उसकी रासायनिक एवं भौतिक विशेषताओं, और गुणवत्ता बनाए रखने के वैज्ञानिक तरीकों पर विस्तार से जानकारी दी। प्रतिभागियों को यह समझाया गया कि दूध की गुणवत्ता ही पूरे डेयरी उत्पादों की विश्वसनीयता की नींव होती है। इसके साथ ही दूध प्रसंस्करण (Milk Processing) को अधिक कुशल बनाने, ऊर्जा और संसाधनों के बेहतर उपयोग तथा लागत में कमी लाने के उपायों पर भी गहन चर्चा की गई। प्रशिक्षकों ने बताया कि सही तकनीकों के उपयोग से डेयरी यूनिट्स अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ मुनाफे में भी वृद्धि कर सकती हैं।
खाद्य सुरक्षा कानूनों की जानकारी पर जोर !!
प्रशिक्षण कार्यक्रम में खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम (FSSAI), 2006 के प्रावधानों पर विशेष सत्र आयोजित किए गए। इसमें डेयरी उत्पादों की गुणवत्ता, पैकेजिंग, लेबलिंग और उपभोक्ता सुरक्षा से जुड़े नियमों की जानकारी दी गई।
विशेषज्ञों ने कहा कि वर्तमान समय में उपभोक्ता स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ी है, ऐसे में FSSAI के मानकों का पालन करना डेयरी उद्योग के लिए अनिवार्य हो गया है।
स्वच्छता, हाइजीन और GMP का महत्व !!
कार्यक्रम के दौरान व्यक्तिगत स्वच्छता, प्लांट हाइजीन, सैनिटेशन और गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिस (GMP) के महत्व को भी विस्तार से समझाया गया। ‘क्लीन-इन-प्लेस’ (CIP) सिस्टम के जरिए मशीनों और पाइपलाइनों की स्वचालित सफाई की तकनीक पर भी प्रशिक्षण दिया गया, जिससे उत्पादन प्रक्रिया में संक्रमण (Contamination) के जोखिम को कम किया जा सके।
ISO मानकों और तकनीकी प्रबंधन पर गहन सत्र !!
प्रशिक्षण में ISO 9001 (क्वालिटी मैनेजमेंट सिस्टम) और ISO 22000 (फूड सेफ्टी मैनेजमेंट सिस्टम) जैसे अंतरराष्ट्रीय मानकों की जानकारी दी गई। इसके अलावा डेयरी प्लांट में उपयोग होने वाले इलेक्ट्रिकल सिस्टम—जैसे इलेक्ट्रिकल डिस्ट्रीब्यूशन, स्विचगियर, पावर कंट्रोल सेंटर (PCC) और मोटर कंट्रोल सेंटर (MCC)—के संचालन और रखरखाव पर भी विशेषज्ञों ने व्यावहारिक मार्गदर्शन दिया।
प्रैक्टिकल ट्रेनिंग: मशीनों पर हाथों-हाथ अनुभव !!
इस कार्यक्रम की सबसे बड़ी विशेषता इसका व्यावहारिक (हैंड्स-ऑन) प्रशिक्षण रहा। प्रतिभागियों को सैशे पैकेजिंग मशीनों के संचालन और रखरखाव का सीधा अनुभव दिया गया। इससे प्रशिक्षुओं को न केवल तकनीकी ज्ञान मिला, बल्कि वास्तविक कार्य परिस्थितियों में मशीनों को संचालित करने का आत्मविश्वास भी बढ़ा।
पूर्वोत्तर में डेयरी विकास को मिलेगा बढ़ावा !!
विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम पूर्वोत्तर राज्यों में डेयरी उद्योग के विकास को नई गति देंगे। इससे स्थानीय सहकारी समितियों की कार्यक्षमता बढ़ेगी और किसानों को बेहतर मूल्य मिलने की संभावना भी मजबूत होगी। डेयरी क्षेत्र के जानकारों के अनुसार, अगर तकनीक, गुणवत्ता और प्रबंधन तीनों पर समान रूप से ध्यान दिया जाए, तो भारत का डेयरी सेक्टर न केवल घरेलू जरूरतों को पूरा कर सकता है, बल्कि निर्यात के क्षेत्र में भी बड़ी भूमिका निभा सकता है।
किसानों और सहकारी संस्थाओं के लिए फायदेमंद पहल !!
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम सहकारी डेयरी संस्थाओं के कर्मचारियों और तकनीकी स्टाफ के लिए अत्यंत लाभकारी साबित हुआ। इससे उनकी क्षमता में वृद्धि होगी, जिससे वे अपने-अपने क्षेत्रों में बेहतर सेवाएं दे सकेंगे। अंततः इसका सीधा लाभ दुग्ध उत्पादकों—यानी किसानों—को मिलेगा, जिनकी आय और उत्पादन दोनों में सुधार की संभावना है।