आम महोत्सव 2026: बिहार बनेगा कृषि निर्यात का नया हब!

आमों की मिठास पहुंची दुनिया तक, निर्यात और तकनीक के दम पर बदल रही किसानों की तकदीर!

पटना। बिहार की बागवानी अब नई उड़ान भर रही है। कभी स्थानीय मंडियों तक सीमित रहने वाले राज्य के प्रसिद्ध आम अब दुबई और अमेरिका जैसे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी मौजूदगी दर्ज करा रहे हैं। राजधानी पटना स्थित बामेती परिसर में आयोजित तीन दिवसीय ‘आम महोत्सव-2026’ के उद्घाटन अवसर पर यह तस्वीर और स्पष्ट हुई, जब कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने बिहार को कृषि निर्यात के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई।

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उन्होंने बताया कि बिहार के जर्दालु, बम्बइया और दूधिया मालदह आम की बढ़ती मांग विदेशों में राज्य के किसानों के लिए नए अवसर लेकर आई है। हाल ही में 19 मीट्रिक टन आम से भरे दो कंटेनर दुबई भेजे गए हैं, जबकि पांच अन्य कंटेनर निर्यात के लिए तैयार हैं। इसके अलावा बांका जिले से 8.5 मीट्रिक टन जीआई टैग प्राप्त जर्दालु और दूधिया मालदह आम अमेरिका भेजे गए हैं। यह उपलब्धि दर्शाती है कि बिहार के फल अब वैश्विक गुणवत्ता मानकों पर खरे उतर रहे हैं।

लीची और आम ने बढ़ाया बिहार का निर्यात दायरा

राज्य की पहचान केवल आम तक सीमित नहीं है। बिहार की प्रसिद्ध शाही लीची भी विदेशी बाजारों में अपनी मिठास बिखेर रही है। हाल ही में 10 मीट्रिक टन शाही लीची दुबई निर्यात की गई है। वैज्ञानिकों द्वारा विकसित नई भंडारण तकनीक के कारण अब लीची को लगभग 45 दिनों तक सुरक्षित रखा जा सकता है। इससे किसानों को बेहतर बाजार और अधिक मूल्य मिलने की संभावना बढ़ी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि कृषि उत्पादों की शेल्फ लाइफ बढ़ाने वाली तकनीकें आने वाले वर्षों में बिहार के फल उत्पादकों के लिए गेम चेंजर साबित हो सकती हैं।

बागवानी बन रही किसानों की आय का मजबूत आधार

कृषि मंत्री ने कहा कि पारंपरिक खेती के साथ बागवानी, फल और फूलों की खेती किसानों के लिए नियमित आय का भरोसेमंद माध्यम बन रही है। उन्होंने इसे किसानों का “एटीएम” बताते हुए कहा कि यह क्षेत्र सालभर कमाई के अवसर उपलब्ध कराता है।

सरकार किसानों को सीधे निर्यात बाजार से जोड़ने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। बिहटा स्थित अत्याधुनिक एक्सपोर्ट पैक हाउस को आवश्यक स्वीकृतियां मिल चुकी हैं, जबकि एपीडा की सक्रिय भागीदारी से निर्यात प्रक्रिया को और सरल बनाया जा रहा है। उद्देश्य यह है कि किसान अपनी उपज का लाभ सीधे प्राप्त करें और बिचौलियों पर निर्भरता कम हो।

आम महोत्सव में पहली बार एआई तकनीक का प्रदर्शन

इस बार का आम महोत्सव केवल स्वाद और प्रदर्शनियों तक सीमित नहीं है, बल्कि आधुनिक तकनीक का भी संगम बन गया है। महोत्सव में पहली बार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित तकनीक का लाइव प्रदर्शन किया जा रहा है, जिसके माध्यम से किसान आम के पौधों में लगने वाले रोगों और कीटों की शुरुआती अवस्था में पहचान कर सकते हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, एआई आधारित निगरानी प्रणाली किसानों को समय पर उपचार संबंधी सलाह देने में मदद करेगी, जिससे उत्पादन लागत घटेगी और फलों की गुणवत्ता में सुधार होगा।

महोत्सव में आम की सैकड़ों किस्मों की प्रदर्शनी, किसानों के लिए तकनीकी सत्र, युवाओं के लिए ज्ञानवर्धक कार्यक्रम और बच्चों के लिए रोचक प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया है, जिससे यह आयोजन कृषि और जनजागरूकता का अनूठा मंच बन गया है।

प्राकृतिक खेती पर जोर, स्वाद और मिट्टी दोनों बचाने की अपील

समारोह में कृषि मंत्री ने किसानों से प्राकृतिक खेती अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि अत्यधिक रासायनिक उर्वरकों के उपयोग ने मिट्टी की गुणवत्ता और फलों के प्राकृतिक स्वाद दोनों को प्रभावित किया है।

उन्होंने कहा कि पुराने समय के आमों की मिठास आज भी लोगों की स्मृतियों में जीवित है, क्योंकि तब खेती मुख्यतः प्राकृतिक तरीकों से की जाती थी। यदि आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित भोजन, स्वस्थ मिट्टी और स्वच्छ पर्यावरण देना है तो कृषि को टिकाऊ और प्रकृति-अनुकूल बनाना होगा।

कृषि रोडमैप से नई पहचान बना रहा बिहार

कार्यक्रम में उपस्थित जनप्रतिनिधियों और कृषि विशेषज्ञों ने भी बिहार की कृषि प्रगति को सराहा। वक्ताओं ने कहा कि राज्य का कृषि रोडमैप किसानों को नई तकनीक, बेहतर बाजार और आधुनिक सुविधाओं से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

विशेषज्ञों ने दीघा क्षेत्र के प्रसिद्ध मालदह और सीपिया आम के संरक्षण, नई किस्मों के विकास और वैज्ञानिक अनुसंधान को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया। उनका मानना है कि यदि स्थानीय किस्मों को वैज्ञानिक समर्थन और वैश्विक बाजार उपलब्ध कराया जाए तो बिहार देश के प्रमुख कृषि निर्यातक राज्यों में शामिल हो सकता है।

हजारों किसानों, कृषि वैज्ञानिकों, उद्यमियों और आम नागरिकों की मौजूदगी में शुरू हुआ यह महोत्सव केवल फलों का उत्सव नहीं, बल्कि बिहार की बदलती कृषि अर्थव्यवस्था और वैश्विक पहचान की नई कहानी भी है।