पशुधन स्वास्थ्य सुधारने के लिए सरकार के अहम कदम

मुर्गीपालन में एंटीबायोटिक दवाओं का उपयोग

नई दिल्ली: भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) ने खाद्य पशुओं, विशेष रूप से मुर्गीपालन में एंटीमाइक्रोबियल प्रतिरोध (एएमआर) की निगरानी के लिए संकलित डेटा जारी किया है। यह जानकारी भारतीय मत्स्य और पशु एंटीमाइक्रोबियल प्रतिरोध नेटवर्क (आईएनएफएएआर) की वार्षिक रिपोर्ट के तहत प्रकाशित की गई है, जो जनता के लिए सुलभ है।

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आईसीएआर-भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) द्वारा किए गए एक अध्ययन में कृषि जलवायु क्षेत्रों, रोगजनक फ़ाइलोटाइप और मेजबान विशेषताओं सहित विभिन्न कारकों की जांच की गई। अध्ययन में मशीन लर्निंग एल्गोरिदम का उपयोग कर मुर्गीपालन में एएमआर के प्रमुख कारकों की पहचान की गई।

सरकार द्वारा उठाए गए प्रमुख कदम:
  1. टीकाकरण कार्यक्रम: पशुधन स्वास्थ्य और रोग नियंत्रण कार्यक्रम (एलएचडीसीपी) के तहत सरकार राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को 100% केंद्रीय सहायता प्रदान कर रही है। खुरपका-मुंहपका (एफएमडी), ब्रुसेलोसिस, पीपीआर, क्लासिकल स्वाइन फीवर (सीएसएफ) और लम्पी त्वचा रोग जैसी बीमारियों के खिलाफ टीकाकरण को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
  2. पशु चिकित्सा उपचार दिशानिर्देश: पशुधन और मुर्गीपालन के लिए मानक पशु चिकित्सा उपचार दिशानिर्देश (एसवीटीजी) विकसित किए गए हैं, जिससे एंटीमाइक्रोबियल दवाओं के उचित उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है।
  3. कुक्कुट रोग कार्य योजना: जैव सुरक्षा उपायों, निगरानी और टीकाकरण प्रोटोकॉल को मजबूत किया गया है ताकि मुर्गीपालन क्षेत्र में रोग प्रबंधन को प्रभावी बनाया जा सके।

    प्रतीकात्मक चित्र
  4. राष्ट्रीय डिजिटल पशुधन मिशन: भारत पशुधन एप्लिकेशन के तहत 29 सामान्य पशु रोगों के प्रबंधन के लिए एथनो-पशु चिकित्सा (ईवीएम) का उपयोग किया जा रहा है।
  5. नियामक समिति का गठन: पशु स्वास्थ्य-नियामक पर अधिकार प्राप्त समिति बनाई गई है, जो एंटीबायोटिक दवाओं और टीकों के आयात एवं निर्माण से संबंधित प्रस्तावों की समीक्षा कर रही है।
  6. राष्ट्रीय कार्य योजना: एएमआर की रोकथाम के लिए सरकार ने स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय (एमओएच एंड एफडब्ल्यू) के साथ मिलकर राष्ट्रीय कार्य योजना तैयार की है।
  7. एंटीबायोटिक दवाओं पर नियंत्रण: खाद्य उत्पादक जानवरों में एंटीबायोटिक दवाओं के विवेकपूर्ण उपयोग के लिए राज्यों को दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। कोलिस्टिन और उसके फॉर्मूलेशन के निर्माण, बिक्री और वितरण पर प्रतिबंध लगाया गया है।
  8. दवाओं के नियमन: केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) ने एंटीबायोटिक दवाओं के आयात, निर्माण और वितरण के लिए कड़े नियम लागू किए हैं।
  9. मुर्गीपालन कल्याण नियम: सरकार ने ‘पशु क्रूरता निवारण (अंडा देने वाली मुर्गियाँ) नियम, 2023’ अधिसूचित किए हैं, जिसमें मुर्गियों को मृत चूजों के अवशेष खिलाने, एंटीमाइक्रोबियल विकास प्रमोटरों के उपयोग और मोल्टिंग को प्रेरित करने के लिए फ़ीड निकासी पर प्रतिबंध लगाया गया है।

केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी राज्य मंत्री, प्रो. एस.पी. सिंह बघेल ने यह जानकारी राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में दी। उन्होंने कहा कि एएमआर की बढ़ती चुनौती को देखते हुए सरकार सक्रिय रूप से कदम उठा रही है ताकि पशुधन और मानव स्वास्थ्य दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।