पशु स्वास्थ्य को नई दिशा: ‘वन हेल्थ’ मॉडल पर राष्ट्रीय मंथन !!
नई दिल्ली, – देश में पशु स्वास्थ्य व्यवस्था को और मजबूत बनाने के उद्देश्य से सशक्तिकरण समिति फॉर एनिमल हेल्थ (ECAH) की 10वीं बैठक राजधानी नई दिल्ली में आयोजित हुई। यह बैठक पशुपालन एवं डेयरी विभाग (DAHD) के अंतर्गत हुई, जिसकी अध्यक्षता भारत सरकार के मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार प्रो. अजय कुमार सूद ने की। बैठक में नीति निर्माण से जुड़े शीर्ष वैज्ञानिकों, स्वास्थ्य विशेषज्ञों और विभिन्न संस्थानों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। इसमें सचिव स्तर के अधिकारी और शोध संस्थानों के प्रमुख शामिल रहे, जिससे यह साफ संकेत मिला कि सरकार पशु स्वास्थ्य को अब बहु-आयामी दृष्टिकोण से देख रही है।
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‘रोग नियंत्रण’ से ‘उन्मूलन’ की ओर बढ़ता भारत !!
बैठक के दौरान यह स्पष्ट किया गया कि भारत अब केवल पशु रोगों के नियंत्रण तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि उनका पूर्ण उन्मूलन लक्ष्य है। खासतौर पर फुट एंड माउथ डिजीज (FMD) और पेस्ट डेस पेटिट्स रुमिनेंट्स (PPR) जैसे प्रमुख रोगों पर फोकस बढ़ाया गया है।
सरकार के अनुसार, 2020 से अब तक FMD के खिलाफ 133 करोड़ से अधिक टीकाकरण किए जा चुके हैं। इसका परिणाम यह रहा कि देश में इस रोग के प्रकोप में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। वहीं PPR के मामलों में भी भारी कमी आई है—2019 में 98 प्रकोप से घटकर 2025 में केवल 29 रह गए हैं।
डिजिटल प्लेटफॉर्म से बढ़ी पारदर्शिता !!
पशुपालन विभाग ने NDLM और “भारत पशुधन” जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए टीकाकरण प्रक्रिया को पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। इन प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से टीकों के वितरण और सत्यापन की निगरानी अब अधिक सटीक हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह डिजिटल बदलाव भविष्य में पशु स्वास्थ्य प्रबंधन को पूरी तरह तकनीक-आधारित बना सकता है। 
प्रयोगशालाओं और निगरानी तंत्र को मिला बल !!
बैठक में महामारी कोष परियोजना के तहत देशभर में प्रयोगशालाओं के सुदृढ़ीकरण पर भी जोर दिया गया। केंद्रीय और क्षेत्रीय स्तर पर आधुनिक रोग निदान प्रयोगशालाओं के निर्माण और उन्नयन से रोगों की पहचान और रोकथाम में तेजी आई है। इसके साथ ही निगरानी प्रणाली को और मजबूत बनाने के लिए डेटा-आधारित दृष्टिकोण अपनाने पर सहमति बनी।
दवा और वैक्सीन अनुमोदन प्रक्रिया हुई तेज !!
नियामक सुधारों के तहत पशु चिकित्सा दवाओं और टीकों की मंजूरी प्रक्रिया को तेज करने के लिए कदम उठाए गए हैं। NANDI-SUGAM पोर्टल के साथ एकीकरण से अनुमोदन में लगने वाला समय काफी कम हुआ है, जिससे उद्योग और किसानों दोनों को फायदा मिल रहा है।
पशु चारा और पोल्ट्री सेक्टर पर भी फोकस !!
समिति ने पशु चारा विनियमन के लिए राष्ट्रीय ढांचा तैयार करने की जरूरत पर बल दिया, ताकि गुणवत्ता और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। वहीं पोल्ट्री क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय मानकों (WOAH) के अनुरूप “कम्पार्टमेंटलाइजेशन” को बढ़ावा देने पर चर्चा हुई, जिससे जैव-सुरक्षा मजबूत होगी और निर्यात के अवसर बढ़ेंगे।
भविष्य की प्राथमिकताएं: तैयारियां और साझेदारी !!
बैठक में भविष्य के लिए कई अहम बिंदुओं पर जोर दिया गया:
विदेशी FMD उपभेदों और अफ्रीकी स्वाइन फीवर से निपटने की तैयारी
पशु स्वास्थ्य अवसंरचना का डिजिटल मैपिंग
राष्ट्रीय स्तर पर मॉक ड्रिल का आयोजन
वैक्सीन और डायग्नोस्टिक्स में पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप
इसके साथ ही “वन हेल्थ” फ्रेमवर्क के तहत मानव, पशु और पर्यावरणीय स्वास्थ्य डेटा को एकीकृत करने की दिशा में भी काम तेज करने पर सहमति बनी।
किसान-केंद्रित और निर्यातोन्मुखी दृष्टिकोण !!
समिति ने स्पष्ट किया कि भारत एक ऐसी पशु स्वास्थ्य प्रणाली विकसित करना चाहता है जो पारदर्शी, किसान-केंद्रित और वैश्विक मानकों के अनुरूप हो। इसका उद्देश्य न केवल किसानों की आय बढ़ाना है, बल्कि देश की निर्यात क्षमता को भी मजबूत करना है।
सारांश:
नई दिल्ली में हुई यह बैठक केवल समीक्षा भर नहीं थी, बल्कि यह संकेत है कि भारत अब पशु स्वास्थ्य के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की ओर बढ़ रहा है—जहां तकनीक, नीति और वैज्ञानिक दृष्टिकोण का संगम भविष्य की दिशा तय करेगा।
फीचर चित्र: प्रतीकात्मक AI