September 21, 2026 12:02 PM

Krishi Times

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गन्ना किसानों के लिए अलर्ट, कीट नियंत्रण जरूरी

गन्ना फसल पर कीटों का हमला, बचाव के लिए अभी सतर्क होने का समय

लखनऊ, 17 अप्रैल –उत्तर प्रदेश में गन्ना किसानों के लिए इस समय सतर्कता बेहद जरूरी हो गई है। खेतों में अंकुर बेधक (अर्ली शूट बोरर) और चोटी बेधक (टॉप बोरर) कीटों का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है। गन्ना आयुक्त ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि यदि अभी सही कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले महीनों में उत्पादन पर गंभीर असर पड़ सकता है।

🔍 कैसे पहचानें कीटों का हमला?

अंकुर बेधक कीट अप्रैल से जून के बीच सक्रिय रहता है। इसकी सूंडी गन्ने के अंदर घुसकर पौधे के बीच वाले हिस्से को नुकसान पहुंचाती है, जिससे “डेड हार्ट” यानी बीच की पत्तियां सूख जाती हैं और आसानी से निकल जाती हैं।

वहीं चोटी बेधक की मादा तितली रात के समय पत्तियों पर अंडे देती है। इन अंडों से निकलने वाली सूंडियां पत्तियों और शीर्ष भाग को खाकर पौधे को कमजोर कर देती हैं, जिससे “बंची टॉप” जैसी झाड़ीदार संरचना बन जाती है।

⚠️ तीसरी पीढ़ी सबसे खतरनाक

विशेषज्ञों के मुताबिक चोटी बेधक की तीसरी पीढ़ी जून के तीसरे सप्ताह में आती है और यह सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाती है। ऐसे में अभी अंडों और सूंडियों को नष्ट करना बेहद जरूरी है ताकि आगे होने वाले बड़े नुकसान से बचा जा सके।

🛡️ बचाव के प्रभावी उपाय

कृषि विभाग ने किसानों को कुछ महत्वपूर्ण उपाय अपनाने की सलाह दी है:

  • अंडों और सूंडियों का नाश: पत्तियों के नीचे मौजूद अंड समूह और संक्रमित हिस्सों को तोड़कर नष्ट करें या पशु चारे में उपयोग करें।
  • जैविक नियंत्रण: ट्राइकोकार्ड (50 हजार वयस्क/हेक्टेयर) का हर 15 दिन में प्रयोग करें।
  • रासायनिक नियंत्रण:
    • फिप्रोनिल + इमिडाक्लोप्रिड (500 ग्राम)
    • या क्लोरेन्ट्रेनिलीप्रोल + थायोमेथाक्सम (600 ग्राम)
      को 1000 लीटर पानी में मिलाकर ड्रेंचिंग करें और सिंचाई करें।
  • फेरोमोन ट्रैप: खेत में 25-30 मीटर की दूरी पर ट्रैप लगाकर वयस्क कीटों को नियंत्रित करें।
  • जड़ों में दवा का प्रयोग: क्लोरेन्ट्रेनिलीप्रोल 18.5% एससी (150 मिली/एकड़) को पानी में घोलकर जड़ों के पास डालें।

🌱 समय पर कार्रवाई ही बचाव

गन्ना विकास विभाग ने स्पष्ट किया है कि शुरुआती चरण में कीट नियंत्रण करने से फसल को बड़े नुकसान से बचाया जा सकता है। किसानों को सलाह दी गई है कि वे नियमित रूप से खेतों का निरीक्षण करें और जैसे ही लक्षण दिखाई दें, तुरंत नियंत्रण उपाय अपनाएं।

📢 डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी जानकारी

किसानों की सुविधा के लिए विस्तृत एडवाइजरी गन्ना शोध परिषद और गन्ना विकास विभाग के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी उपलब्ध कराई गई है।

सारांश

गन्ना किसानों के लिए यह समय अलर्ट रहने का है। थोड़ी सी लापरवाही भारी नुकसान में बदल सकती है, जबकि समय पर उठाए गए कदम फसल को सुरक्षित रख सकते हैं।