AI आधारित वेब एप्लिकेशन पर 21 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ
नई दिल्ली, 4 मार्च 2025: कृषि में डिजिटल परिवर्तन को गति देने और आधुनिक तकनीकों को अपनाने के उद्देश्य से भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR)-उन्नत संकाय केंद्र के तत्वावधान में “कृषि में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित वेब एप्लिकेशन विकास के लिए उपकरण और तकनीकों” विषय पर 21 दिवसीय राष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह प्रशिक्षण 4 मार्च से 24 मार्च 2025 तक चलेगा।
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- उद्घाटन समारोह
इस प्रतिष्ठित प्रशिक्षण कार्यक्रम के उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि डॉ. राजबीर सिंह, उप महानिदेशक (कृषि विस्तार), आईसीएआर ने शिरकत की। उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और वेब एप्लिकेशन विकास के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि “डिजिटल तकनीकों के समावेश से कृषि क्षेत्र को नई ऊँचाइयाँ मिल सकती हैं। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम कृषि वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों के लिए नवीनतम तकनीकों को सीखने का एक सुनहरा अवसर है।”
इस अवसर की अध्यक्षता डॉ. राजेंद्र प्रसाद, निदेशक, आईसीएआर-आईएएसआरआई ने की। उन्होंने कहा कि “AI और डेटा विज्ञान आधारित वेब एप्लिकेशन कृषि अनुसंधान और विस्तार सेवाओं को और अधिक प्रभावी बना सकते हैं। ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और शिक्षाविदों को आधुनिक तकनीकों के प्रति जागरूक करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।”
- प्रतिभागियों की सक्रिय भागीदारी
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में आईसीएआर के विभिन्न संस्थानों, कृषि विश्वविद्यालयों और कृषि विज्ञान केंद्रों (KVKs) से वैज्ञानिकों, सहायक प्राध्यापकों और विषय विशेषज्ञों ने भाग लिया। प्रतिभागियों को वेब एप्लिकेशन विकास, मशीन लर्निंग एल्गोरिदम, डेटा एनालिटिक्स और AI आधारित तकनीकों का व्यावहारिक ज्ञान प्रदान किया जाएगा।
- प्रशिक्षण की रूपरेखा
कार्यक्रम के प्रशिक्षण समन्वयक डॉ. शशि दहिया हैं, जबकि सह-समन्वयक के रूप में डॉ. संचित नाहा एवं डॉ. मो. अशरफुल हक अपनी भूमिका निभा रहे हैं। विशेषज्ञ प्रशिक्षकों द्वारा इस दौरान मशीन लर्निंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्लाउड कंप्यूटिंग और कृषि क्षेत्र में इनके अनुप्रयोगों पर विस्तृत प्रशिक्षण दिया जाएगा।
- कृषि क्षेत्र के डिजिटल भविष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम कृषि क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित तकनीकों के उपयोग को बढ़ावा देने और वेब एप्लिकेशन विकास में वैज्ञानिकों को दक्ष बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। यह पहल डिजिटल कृषि को नई दिशा देने और “स्मार्ट एग्रीकल्चर” की अवधारणा को साकार करने में सहायक सिद्ध होगी।