जलवायु परिवर्तन के अनुरूप खेती के उपाय पर चर्चा
नई दिल्ली – भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईएआरआई), नई दिल्ली के जल प्रौद्योगिकी केंद्र में किसानों के लिए सात दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम राष्ट्रीय सुनियोजित कृषि और बागवानी समिति (एनसीपीएएच) द्वारा प्रायोजित और सुनियोजित कृषि विकास केंद्र (पीएफडीसी) के तत्वावधान में आयोजित किया गया। प्रशिक्षण का उद्देश्य किसानों को सुनियोजित कृषि प्रौद्योगिकियों से परिचित कराना और उन्हें आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना था।
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उद्घाटन समारोह
3 फरवरी 2025 को कार्यक्रम का उद्घाटन संयुक्त निदेशक (प्रसार), आईएआरआई, डॉ. आर. एन. पडारिया द्वारा किया गया। अपने उद्घाटन भाषण में उन्होंने कहा कि किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने पर जोर देना चाहिए ताकि वे अपनी आय में वृद्धि कर सकें। उन्होंने इस बात पर भी बल दिया कि जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने और खेती की दक्षता बढ़ाने के लिए वैज्ञानिक तरीकों को अपनाना आवश्यक है।
जल प्रौद्योगिकी केंद्र के परियोजना निदेशक डॉ. पी.एस. ब्रह्मानंद ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए बताया कि इस सात दिवसीय प्रशिक्षण में आधुनिक खेती, जल प्रबंधन, ड्रिप एवं स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणाली, ग्रीनहाउस तकनीक, बागवानी और जल संरक्षण उपायों पर विस्तृत जानकारी दी गई।
प्रशिक्षण सत्रों की मुख्य झलकियां
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में राजस्थान, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के 28 लघु एवं सीमांत किसानों ने भाग लिया। पूरे सप्ताह विभिन्न कृषि विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों द्वारा अलग-अलग सत्रों में महत्वपूर्ण विषयों पर प्रशिक्षण दिया गया, जिसमें निम्नलिखित मुख्य बिंदु शामिल थे –
- आधुनिक सिंचाई तकनीकें – सिंचाई विशेषज्ञ डॉ. मनोज खन्ना ने जलवायु परिवर्तन को ध्यान में रखते हुए ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणाली को अपनाने के लाभ बताए। उन्होंने कम पानी में अधिक उत्पादन प्राप्त करने की रणनीतियों पर भी चर्चा की।
- सुनियोजित कृषि तकनीकें – किसानों को ग्रीनहाउस एवं पॉलीहाउस खेती, हाई-टेक नर्सरी, वर्टिकल फार्मिंग जैसी नई तकनीकों के बारे में जानकारी दी गई।
- मृदा एवं जल प्रबंधन – विशेषज्ञों ने मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने, जल संरक्षण के उपायों और जैविक खेती को अपनाने की प्रक्रिया को विस्तार से समझाया।
- बाजार और विपणन रणनीतियां – किसानों को उत्पाद विपणन और मूल्य संवर्धन के महत्व के बारे में जागरूक किया गया ताकि वे अपनी उपज का सही मूल्य प्राप्त कर सकें।
- डिजिटल तकनीकों का उपयोग – स्मार्ट कृषि, मोबाइल एप्लिकेशन और सैटेलाइट आधारित फसल निगरानी पर भी जानकारी दी गई।

प्रशिक्षण के दौरान किसानों की सहभागिता
एनसीपीएएच के संयुक्त परियोजना निदेशक डॉ. कृष्ण कौशल ने किसानों से आग्रह किया कि वे प्रशिक्षण के दौरान अधिक से अधिक प्रश्न पूछें और सीखी हुई तकनीकों को अपने खेतों में लागू करें। प्रशिक्षण के दौरान किसानों ने सक्रिय रूप से भाग लिया और अपने अनुभव साझा किए।
समापन समारोह और प्रमाण पत्र वितरण
9 फरवरी 2025 को कार्यक्रम के समापन समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर संयुक्त निदेशक (अनुसंधान), आईएआरआई, डॉ. विश्वनाथन चिन्नुसामी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि आत्मनिर्भरता और खाद्य सुरक्षा के लिए किसानों को सुनियोजित कृषि प्रौद्योगिकियों और उन्नत जल प्रबंधन तकनीकों को अपनाना होगा। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि किसानों और वैज्ञानिकों को मिलकर संयुक्त प्रयास करने की जरूरत है ताकि कम पानी में अधिक उपज प्राप्त की जा सके।
अंत में, प्रशिक्षण पूरा करने वाले किसानों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए। कार्यक्रम में भाग लेने वाले किसानों ने इसे अत्यधिक लाभकारी बताया और भविष्य में भी ऐसे प्रशिक्षण सत्रों में भाग लेने की इच्छा व्यक्त की। इस सफल आयोजन के लिए सभी विशेषज्ञों और किसानों को धन्यवाद दिया गया और कार्यक्रम का समापन हुआ।
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