आगरा में बनेगा आलू-शकरकंद अनुसंधान का बड़ा केंद्र, भारत की वैश्विक कृषि साझेदारी को मिलेगी नई दिशा
नई दिल्ली। भारत आलू और शकरकंद जैसी महत्वपूर्ण फसलों में अनुसंधान, उन्नत किस्मों और आधुनिक ब्रीडिंग तकनीकों के जरिए वैश्विक नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इसी क्रम में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अंतरराष्ट्रीय आलू केंद्र (CIP) के महानिदेशक डॉ. सिमोन हेक के नेतृत्व वाले प्रतिनिधिमंडल के साथ कृषि भवन, नई दिल्ली में उच्चस्तरीय बैठक की। बैठक में उत्तर प्रदेश के आगरा में स्थापित हो रहे सीसार्क (CSARC) केंद्र की प्रगति, आधुनिक ब्रीडिंग तकनीक, जर्मप्लाज्म, जलवायु-सहिष्णु फसलों और किसानों की आय बढ़ाने के उपायों पर विस्तार से चर्चा हुई।
बैठक में कृषि सचिव अतीश चंद्रा, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के महानिदेशक डॉ. एम. एल. जाट और आगरा स्थित CSARC के क्षेत्रीय निदेशक डॉ. सुधांशु सिंह सहित कृषि और अंतरराष्ट्रीय आलू केंद्र के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
वैश्विक हित में काम कर रहा भारत
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत का कृषि विजन केवल देश या दक्षिण एशिया तक सीमित नहीं है। भारत कृषि अनुसंधान, खाद्य सुरक्षा और पोषण के क्षेत्र में ऐसी साझेदारियों को आगे बढ़ाना चाहता है, जिनका लाभ वैश्विक स्तर पर किसानों और उपभोक्ताओं तक पहुंचे।
उन्होंने कहा कि CIP जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के साथ सहयोग से भारत आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक ज्ञान और बेहतर आनुवंशिक संसाधनों को किसानों तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठा सकता है।
ICAR और CIP के काम में नहीं हो दोहराव
बैठक में कृषि मंत्री ने ICAR और CIP के बीच कार्यों के स्पष्ट विभाजन पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि दोनों संस्थाओं द्वारा किए जा रहे अनुसंधान में अनावश्यक दोहराव नहीं होना चाहिए। उपलब्ध संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करते हुए ऐसे क्षेत्रों पर ध्यान दिया जाए, जहां नया और उपयोगी नवाचार विकसित किया जा सके।
उन्होंने विशेष रूप से कहा कि आगरा स्थित केंद्र के माध्यम से विश्वस्तरीय जर्मप्लाज्म भारत में लाया जाना चाहिए। इसके आधार पर भारतीय कृषि-जलवायु परिस्थितियों के अनुरूप नई और बेहतर किस्मों का विकास किया जा सकेगा। इसका सीधा फायदा आलू उत्पादक किसानों को बेहतर उत्पादन, गुणवत्ता और बाजार मूल्य के रूप में मिल सकता है।
हाइब्रिड आलू तकनीक से बदल सकती है बीज उत्पादन व्यवस्था
CIP महानिदेशक डॉ. सिमोन हेक ने बताया कि आगरा में स्थापित किया जा रहा दक्षिण एशिया क्षेत्रीय केंद्र भारत के साथ-साथ नेपाल, बांग्लादेश और भूटान जैसे देशों के लिए वैज्ञानिक सहयोग का महत्वपूर्ण मंच बन सकता है।
केंद्र में हाइब्रिड आलू तकनीक, बायोफोर्टिफाइड फसलें और जलवायु-सहिष्णु किस्मों पर काम किए जाने की संभावना है। हाइब्रिड तकनीक के विस्तार से आलू की बीज उत्पादन प्रणाली को अधिक वैज्ञानिक और कुशल बनाने में मदद मिल सकती है। इससे गुणवत्तापूर्ण रोपण सामग्री की उपलब्धता बढ़ने और निजी क्षेत्र के निवेश को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।
शकरकंद को ‘सुपरफूड’ के रूप में बढ़ावा देने पर जोर
बैठक में शकरकंद के पोषण और आर्थिक महत्व पर भी विशेष चर्चा हुई। ऑरेंज-फ्लेश्ड बायोफोर्टिफाइड शकरकंद की उन्नत किस्मों को भारतीय किसानों तक पहुंचाने की योजना पर विचार किया गया। ऐसी किस्मों में आयरन, जिंक और विटामिन-ए जैसे पोषक तत्वों की उपलब्धता अधिक हो सकती है।
कृषि मंत्री ने शकरकंद को केवल पारंपरिक फसल के रूप में देखने के बजाय इसे आधुनिक ‘सुपरफूड’ के रूप में विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। इसके लिए उत्पादन के साथ-साथ ब्रांडिंग, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और बाजार निर्माण पर भी ध्यान देना जरूरी है। 
इस दिशा में काम होने से शकरकंद की मांग शहरी और ग्रामीण दोनों बाजारों में बढ़ सकती है। साथ ही छोटे और सीमांत किसानों को बेहतर बाजार और मूल्य प्राप्त करने के अवसर मिल सकते हैं।
किसानों की आय और पोषण सुरक्षा पर एक साथ फोकस
आलू और शकरकंद दोनों ही ऐसी फसलें हैं जिनमें उत्पादन के साथ-साथ पोषण, प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन की बड़ी संभावनाएं हैं। विशेषज्ञता, बेहतर जर्मप्लाज्म और आधुनिक ब्रीडिंग तकनीक को भारतीय कृषि अनुसंधान प्रणाली से जोड़ने पर नई किस्मों के विकास की गति बढ़ सकती है।
जलवायु परिवर्तन के दौर में ऐसी किस्मों का विकास भी महत्वपूर्ण है जो गर्मी, सूखा, बदलते रोग-कीट दबाव और अन्य जलवायु चुनौतियों का बेहतर सामना कर सकें। आगरा में प्रस्तावित क्षेत्रीय केंद्र इस दृष्टि से भारत और दक्षिण एशिया के लिए महत्वपूर्ण वैज्ञानिक आधार बन सकता है।
बैठक में वरिष्ठ अधिकारी रहे मौजूद
बैठक में केंद्रीय बागवानी आयुक्त डॉ. प्रभात कुमार, राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड के प्रबंध निदेशक कपिल मीणा, CIP-चाइना सेंटर फॉर एशिया एंड द पैसिफिक के निदेशक यानमिन शी, CIP अफ्रीका की क्षेत्रीय निदेशक जॉयस मारू, लैटिन अमेरिका के क्षेत्रीय निदेशक वियन पोलर और भारत के कंट्री मैनेजर नीरज शर्मा सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
बैठक से यह संकेत मिलता है कि भारत आलू और शकरकंद अनुसंधान को केवल उत्पादन बढ़ाने तक सीमित रखने के बजाय उन्नत आनुवंशिक संसाधन, पोषण सुरक्षा, जलवायु अनुकूल कृषि, प्रसंस्करण और किसानों की आय से जोड़कर आगे बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रहा है। आगरा में विकसित हो रहा CSARC केंद्र इस व्यापक रणनीति में एक महत्वपूर्ण कड़ी बन सकता है।

























