सारण में मखाना खेती की नई शुरुआत, किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम!
छपरा (सारण)। बिहार के सारण जिले के जलालपुर प्रखंड में पहली बार मखाना की खेती का सफल आगाज़ हुआ है। कृषि विभाग की पहल से शुरू हुई यह खेती क्षेत्र में फसल विविधीकरण, जल संसाधनों के बेहतर उपयोग और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। अब तक उत्तर बिहार के सीमित जिलों तक सिमटी मखाना खेती का विस्तार सारण जैसे नए क्षेत्रों में होने से किसानों के लिए लाभकारी कृषि विकल्पों के द्वार खुल रहे हैं।
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मखाना देश और विदेश दोनों बाजारों में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। उच्च पोषण मूल्य, औषधीय गुणों और स्वास्थ्यवर्धक खाद्य पदार्थ के रूप में इसकी बढ़ती पहचान ने इसे वैश्विक स्तर पर “सुपर फूड” का दर्जा दिलाया है। विशेषज्ञों के अनुसार वैश्विक मांग लगातार बढ़ रही है, जबकि उत्पादन अभी भी सीमित क्षेत्रों में केंद्रित है। ऐसे में मखाना किसानों के लिए नकदी फसल के रूप में उभर रहा है।
जलभराव वाले क्षेत्रों के लिए वरदान
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि मखाना की खेती उन क्षेत्रों में भी सफलतापूर्वक की जा सकती है जहां जलभराव की समस्या रहती है। तालाबों और स्थिर जल क्षेत्रों में उगाई जाने वाली यह फसल ऐसे भूभागों को भी उत्पादक बना सकती है, जो पारंपरिक खेती के लिए कम उपयुक्त माने जाते हैं। इससे जल संसाधनों का बेहतर उपयोग होने के साथ-साथ टिकाऊ कृषि प्रणाली को भी बढ़ावा मिलता है।
आधुनिक तकनीक से बढ़ेगा पैदावार
कृषि विभाग किसानों को मखाना उत्पादन की वैज्ञानिक तकनीकों, पौध प्रबंधन, फसल संरक्षण और विपणन संबंधी प्रशिक्षण उपलब्ध करा रहा है। विभाग का लक्ष्य आने वाले वर्षों में जिले के अधिक किसानों को इस खेती से जोड़कर मखाना उत्पादन का रकबा बढ़ाना है, ताकि स्थानीय स्तर पर एक नया कृषि-आधारित आर्थिक मॉडल विकसित किया जा सके।
ऐसे होती है मखाना की खेती
मखाना एक जलज फसल है, जिसकी खेती मुख्य रूप से तालाबों और स्थिर जल क्षेत्रों में की जाती है। इसकी खेती की प्रक्रिया दिसंबर माह में नर्सरी तैयार करने से शुरू होती है। सामान्यतः एक हेक्टेयर क्षेत्र के लिए लगभग 500 वर्गमीटर में नर्सरी तैयार की जाती है। फरवरी-मार्च में पौधों को मुख्य खेत या तालाब में लगभग 1.25 मीटर की दूरी पर रोपित किया जाता है। जुलाई-अगस्त तक फसल तैयार हो जाती है। इसके बाद मखाना के बीजों को पानी से निकालकर सुखाया जाता है तथा विशेष प्रक्रिया के तहत भूनकर तैयार किया जाता है।
बिहार बना मखाना उत्पादन का ग्लोबल केंद्र
बिहार देश के कुल मखाना उत्पादन का सबसे बड़ा केंद्र है। दरभंगा और मधुबनी को लंबे समय से “मखाना की वैश्विक राजधानी” के रूप में पहचान मिली हुई है। इसके अलावा मधेपुरा, सहरसा, कटिहार, पूर्णिया, किशनगंज, अररिया और सीतामढ़ी सहित कई जिलों में भी इसकी खेती बड़े पैमाने पर की जाती है। बिहार के मखाना को प्राप्त जीआई टैग ने इसकी अंतरराष्ट्रीय पहचान को और मजबूत किया है।
किसानों के लिए नए अवसर
विशेषज्ञों का मानना है कि सारण में मखाना खेती की शुरुआत केवल एक नई फसल का विस्तार नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। यदि किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन, प्रसंस्करण सुविधाएं और बेहतर बाजार उपलब्ध कराया जाए, तो मखाना आने वाले वर्षों में सारण जिले के लिए आय और रोजगार का बड़ा स्रोत बन सकता है।
कुल मिलाकर, जलालपुर में मखाना खेती की यह नई पहल किसानों को पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर उच्च मूल्य वाली फसलों की ओर आकर्षित करेगी और सारण को कृषि नवाचार के नए केंद्र के रूप में स्थापित करने में मददगार साबित हो सकती है।
चित्र: सौजन्य सोशल मीडिया
