ICAR का 98वां स्थापना दिवस: 386 जलवायु-अनुकूल किस्में विकसित, विकसित भारत 2047 के लिए कृषि अनुसंधान का नया रोडमैप
98 वर्षों की कृषि वैज्ञानिक विरासत का उत्सव
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (भाकृअनुप/ICAR) ने नई दिल्ली में अपना 98वां स्थापना दिवस मनाते हुए विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को हासिल करने के लिए विज्ञान-आधारित, जलवायु-अनुकूल और किसान-केंद्रित कृषि विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। वर्ष 1928 में स्थापित परिषद ने पिछले नौ दशकों से अधिक समय में देश की कृषि अनुसंधान, शिक्षा और विस्तार प्रणाली को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाई है।
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भारत को खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने से लेकर बागवानी, डेयरी और मत्स्य क्षेत्र में रिकॉर्ड उपलब्धियां हासिल करने तक, भाकृअनुप के वैज्ञानिक अनुसंधान और तकनीकी नवाचारों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है।
कृषि विकास में वैज्ञानिकों की भूमिका पर जोर
समारोह को संबोधित करते हुए केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि कृषि वैज्ञानिकों और किसानों की साझेदारी ही भारत की कृषि शक्ति का आधार है। उन्होंने कहा कि पिछले एक वर्ष में भाकृअनुप ने 44 फसलों की 386 उन्नत किस्में विकसित की हैं, जिनमें 94 प्रतिशत जलवायु-अनुकूल तथा 29 जैव-सुदृढ़ीकृत (बायोफोर्टिफाइड) किस्में शामिल हैं।
उन्होंने मांग-आधारित अनुसंधान, जलवायु परिवर्तन के अनुरूप खेती, दलहन एवं तिलहन में आत्मनिर्भरता, गुणवत्तापूर्ण कृषि शिक्षा तथा कृषि विज्ञान केंद्रों (KVK) के माध्यम से तकनीकों के व्यापक प्रसार की आवश्यकता पर बल दिया।
केवीके नेटवर्क से किसानों तक पहुंचेगी तकनीक
मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी तथा पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह ने कहा कि कृषि विज्ञान केंद्रों के नेटवर्क को और मजबूत बनाकर प्रयोगशालाओं में विकसित तकनीकों को किसानों, पशुपालकों और मत्स्य पालकों तक तेजी से पहुंचाया जाना चाहिए। उन्होंने पशुपालन एवं डेयरी विभाग और भाकृअनुप के बीच हुए समझौता ज्ञापन को ग्रामीण समृद्धि की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
खाद्य सुरक्षा से आत्मनिर्भरता तक की यात्रा
कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी ने कहा कि भारत की खाद्य संकट से खाद्य आत्मनिर्भरता तक की यात्रा वैज्ञानिकों और किसानों के संयुक्त प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने प्राकृतिक खेती, विज्ञान-आधारित अनुसंधान और किसान-केंद्रित नवाचारों को जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने का प्रभावी माध्यम बताया।
राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने कहा कि कृषि और डेयरी क्षेत्रों में देश की उपलब्धियां ग्रामीण विकास और किसान कल्याण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं। वहीं प्रो. एस.पी. सिंह बघेल ने विकसित भारत@2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए आधुनिक कृषि तकनीकों, कृत्रिम गर्भाधान, सेक्स-सॉर्टेड सीमेन, सूक्ष्म सिंचाई, प्राकृतिक खेती और नैनो उर्वरकों के व्यापक उपयोग पर जोर दिया।
एक वर्ष में 1.70 लाख करोड़ रुपये का अतिरिक्त आर्थिक मूल्य
कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (DARE) के सचिव एवं भाकृअनुप के महानिदेशक डॉ. एम.एल. जाट ने “365 दिनों की उपलब्धियां: विकसित भारत 2047 के लिए कृषि की पुनर्कल्पना” विषय पर परिषद की वार्षिक उपलब्धियां प्रस्तुत कीं।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2025-26 के दौरान फसल, बागवानी, पशुधन और मत्स्य क्षेत्रों में उत्पादन वृद्धि के कारण लगभग 1.70 लाख करोड़ रुपये का अतिरिक्त आर्थिक मूल्य सृजित हुआ, जिसमें कृषि अनुसंधान का अनुमानित योगदान 55 हजार करोड़ रुपये रहा। यह कृषि विज्ञान में निवेश के उच्च प्रतिफल का स्पष्ट संकेत है।
एक करोड़ किसानों तक पहुंचीं नई तकनीकें
डॉ. जाट के अनुसार, भाकृअनुप की वैज्ञानिक तकनीकें प्रत्यक्ष रूप से लगभग एक करोड़ किसानों तक पहुंचीं, जबकि मीडिया और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों के माध्यम से पांच करोड़ से अधिक किसानों को लाभ मिला। इसके अलावा 18 अंतरराष्ट्रीय समझौता ज्ञापनों के माध्यम से परिषद ने वैश्विक कृषि सहयोग को भी नई मजबूती प्रदान की।
43 नई किस्में और 17 अत्याधुनिक तकनीकों का विमोचन
स्थापना दिवस के अवसर पर 43 उन्नत फसल किस्मों, 17 नई कृषि प्रौद्योगिकियों और 14 प्रकाशनों का विमोचन किया गया। इनमें जलवायु-अनुकूल बासमती और लवणीय भूमि में उगाई जा सकने वाली धान की किस्में, निर्यातोन्मुख आम उत्पादन तकनीक, भारत का पहला स्वदेशी अफ्रीकी स्वाइन फीवर टीका, डिजिटल स्वाइन रोग एटलस तथा छोटे किसानों के लिए किफायती कसावा हार्वेस्टर प्रमुख आकर्षण रहे।
उद्योग जगत के साथ बढ़ी साझेदारी
कृषि प्रौद्योगिकियों के व्यावसायीकरण और किसानों तक उनकी तेज पहुंच सुनिश्चित करने के लिए 51 उद्योग साझेदारों के साथ 72 समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए। इससे भाकृअनुप की प्रयोगशालाओं में विकसित तकनीकों का तेजी से व्यावसायिक उपयोग और किसानों तक विस्तार संभव होगा।
इसके अलावा 150 अस्थायी दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को नियुक्ति पत्र प्रदान कर उनकी सेवाओं का नियमितीकरण भी किया गया।
विकसित भारत के लिए कृषि अनुसंधान का नया रोडमैप
स्थापना दिवस समारोह में कृषि विश्वविद्यालयों के कुलपति, वैज्ञानिक, उद्योग प्रतिनिधि, किसान संगठन, नवप्रवर्तक और छात्र-छात्राओं की व्यापक भागीदारी रही। कार्यक्रम में यह स्पष्ट संदेश दिया गया कि विकसित भारत 2047 का लक्ष्य केवल कृषि क्षेत्र में नवाचार, वैज्ञानिक अनुसंधान, जलवायु-अनुकूल तकनीकों और किसान-केंद्रित विकास मॉडल के माध्यम से ही हासिल किया जा सकता है।
भाकृअनुप ने अत्याधुनिक अनुसंधान, रणनीतिक साझेदारियों और तकनीकी नवाचारों के जरिए भारत की कृषि को अधिक टिकाऊ, प्रतिस्पर्धी और लाभकारी बनाने की दिशा में अपने संकल्प को दोहराया।

