फर्जी उर्वरक पर वार, गन्ना किसानों को मिलेगा असली अधिकार!

गन्ना किसानों के लिए बड़ी राहत: अब चीनी मिलें देंगी केवल प्रमाणित कृषि निवेश, फर्जी और घटिया उत्पादों पर सख्त कार्रवाई

किसानों के हित में गन्ना आयुक्त का बड़ा फैसला

लखनऊ, 10 जुलाई 2026। उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों के हितों की रक्षा और खेती को अधिक वैज्ञानिक बनाने के लिए गन्ना एवं चीनी उद्योग विभाग ने बड़ा कदम उठाया है। गन्ना आयुक्त ने प्रदेश की सभी चीनी मिलों के लिए नए दिशा-निर्देश जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि अब किसानों को केवल गुणवत्ता परीक्षण के बाद प्रमाणित उर्वरक, जैव उर्वरक, सूक्ष्म पोषक तत्व और कीटनाशक ही उपलब्ध कराए जाएंगे। अधोमानक या फर्जी कृषि निवेशों के वितरण पर पूरी तरह रोक लगाई जाएगी।

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इस निर्णय का उद्देश्य किसानों को बेहतर कृषि सामग्री उपलब्ध कराना, उत्पादन बढ़ाना, खेती की लागत कम करना और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना है।

गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं, हर बैच की होगी जांच

नए निर्देशों के तहत चीनी मिलों द्वारा वितरित किए जाने वाले प्रत्येक बैच के उर्वरक, जैव उर्वरक, सूक्ष्म पोषक तत्व और कीटनाशकों का NABL मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं में गुणवत्ता परीक्षण अनिवार्य किया गया है।

केवल वही कृषि निवेश किसानों तक पहुंचेंगे जो उर्वरक नियंत्रण आदेश, कीटनाशी अधिनियम और अन्य वैधानिक मानकों के अनुरूप पाए जाएंगे। इसके साथ ही भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR), उत्तर प्रदेश गन्ना शोध परिषद तथा कृषि विश्वविद्यालयों के वैज्ञानिकों द्वारा अनुशंसित उत्पादों को प्राथमिकता दी जाएगी।

प्रतिबंधित कीटनाशकों पर पूरी तरह रोक

गन्ना आयुक्त ने स्पष्ट किया है कि केंद्र सरकार द्वारा प्रतिबंधित कीटनाशकों का वितरण किसी भी परिस्थिति में नहीं किया जाएगा। किसानों को सुरक्षित और प्रभावी कृषि निवेश उपलब्ध कराने के लिए चीनी मिलों को इफको, कृभको, यूपीसीएसआर और आईआईएसआर जैसी प्रतिष्ठित संस्थाओं से उत्पाद खरीदने के लिए प्रोत्साहित किया गया है।

साथ ही समान सक्रिय तत्व वाले उत्पादों को यथासंभव उचित और समान मूल्य पर उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाएगी।

किसान की सहमति के बिना नहीं होगा वितरण

नई व्यवस्था के अनुसार किसी भी किसान को उसकी मांग और स्पष्ट सहमति के बिना कोई कृषि निवेश नहीं दिया जाएगा। कृषि निवेशों का वितरण केवल किसान की वास्तविक जरूरत, गन्ना क्षेत्रफल और वैज्ञानिक अनुशंसाओं के आधार पर किया जाएगा।

विभाग ने स्पष्ट किया है कि व्यावसायिक लाभ के लिए लक्ष्य तय कर किसानों पर कृषि निवेश थोपने की प्रवृत्ति पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी। इससे अनावश्यक रासायनिक उपयोग पर रोक लगेगी और किसानों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं बढ़ेगा।

दोषी चीनी मिलों पर होगी कठोर कार्रवाई

गुणवत्ता और वितरण की पूरी जिम्मेदारी संबंधित चीनी मिल की होगी, चाहे वितरण सीधे किया जाए या किसी एजेंसी के माध्यम से। उप गन्ना आयुक्त और जिला गन्ना अधिकारी नियमित निरीक्षण और निगरानी करेंगे।

यदि किसी मिल द्वारा किसान की सहमति के बिना या अधोमानक कृषि निवेशों का वितरण किया जाता है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। ऐसी स्थिति में गन्ना मूल्य से कृषि निवेश की राशि समायोजित करने की सुविधा तत्काल समाप्त कर दी जाएगी। जरूरत पड़ने पर संबंधित चीनी मिल की बैंक गारंटी भी जब्त की जा सकेगी।

बाजार में कीटनाशकों की होगी नियमित सैंपलिंग

कृषि विभाग के सहयोग से बाजार में उपलब्ध कीटनाशकों और पेस्टीसाइड्स की नियमित सैंपलिंग, गुणवत्ता परीक्षण और सघन निरीक्षण कराया जाएगा। सोशल मीडिया या अन्य माध्यमों से भ्रामक प्रचार करने वाले विक्रेताओं के खिलाफ भी कीटनाशी अधिनियम के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

गन्ना खेती में पारदर्शिता और उत्पादकता बढ़ाने की पहल

विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला प्रदेश में गन्ना खेती को अधिक पारदर्शी, वैज्ञानिक और किसान-केंद्रित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। गुणवत्तायुक्त कृषि निवेश मिलने से फसल की उत्पादकता बढ़ेगी, खेती की लागत नियंत्रित रहेगी और किसानों की आय में सुधार होगा।

इसके साथ ही मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, रासायनिक उपयोग में संतुलन और पर्यावरण सुरक्षा को भी मजबूती मिलेगी। सरकार का यह कदम गन्ना किसानों का भरोसा बढ़ाने के साथ-साथ प्रदेश के चीनी उद्योग को भी नई मजबूती प्रदान करेगा।

चित्र: प्रतीकात्मक