खाद्य प्रसंस्करण से बढ़ेगी किसानों की कमाई!

परभणी में उन्नत कॉमन इन्क्यूबेशन सेंटर का उद्घाटन, खाद्य प्रसंस्करण से किसानों की आय बढ़ाने पर केंद्र का फोकस

परभणी, 1 जुलाई। कृषि उत्पादों के मूल्यवर्धन, ग्रामीण उद्यमिता और किसानों की आय में वृद्धि को नई दिशा देने के उद्देश्य से केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री चिराग पासवान ने महाराष्ट्र के परभणी स्थित वसंतराव नाइक मराठवाड़ा कृषि विद्यापीठ में स्थापित अत्याधुनिक कॉमन इन्क्यूबेशन सेंटर (सीआईसी) का उद्घाटन किया। यह केंद्र खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार की वित्तीय सहायता तथा महाराष्ट्र सरकार के कृषि विभाग के सहयोग से स्थापित किया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह केंद्र क्षेत्र के किसानों, स्टार्टअप्स, महिला स्वयं सहायता समूहों और युवा उद्यमियों के लिए खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में नए अवसरों के द्वार खोलेगा।

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संवाद सत्र में छात्रों, किसानों और उद्यमियों से किया सीधा संवाद

उद्घाटन के बाद विश्वविद्यालय के स्वर्ण जयंती दीक्षांत समारोह हॉल में एक विशेष संवाद एवं मार्गदर्शन कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में छात्र, शोधार्थी, किसान, कृषि वैज्ञानिक और उद्यमी शामिल हुए। कार्यक्रम में महाराष्ट्र सरकार की राज्य मंत्री मेघना ताई बोरदिकर सहित कई जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी और कृषि क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञ उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति प्रो. (डॉ.) इंद्र मणि ने की।

चिराग पासवान ने उपस्थित प्रतिभागियों के उत्साह की सराहना करते हुए कहा कि विकसित भारत के निर्माण में युवाओं, किसानों और उद्यमियों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि देश के प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है कि वह अपनी क्षमता के अनुसार राष्ट्र निर्माण में योगदान दे।

कृषि उत्पादन से आगे बढ़कर मूल्यवर्धन पर देना होगा जोर

अपने संबोधन में केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत लंबे समय से कृषि प्रधान देश रहा है और आज भी करोड़ों लोगों की आजीविका कृषि पर निर्भर है। पिछले वर्षों में देश ने कृषि उत्पादन बढ़ाने में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है और कई कृषि उत्पादों का निर्यात भी बढ़ा है। लेकिन अब समय आ गया है कि केवल उत्पादन बढ़ाने तक सीमित न रहकर कृषि उत्पादों के मूल्यवर्धन पर विशेष ध्यान दिया जाए।

उन्होंने कहा कि फल, सब्जियां, अनाज, दलहन और अन्य कृषि उत्पादों को प्रसंस्कृत कर अधिक मूल्य वाले उत्पादों में बदला जा सकता है। इससे किसानों को बेहतर मूल्य मिलेगा और कृषि क्षेत्र की लाभप्रदता भी बढ़ेगी। उनके अनुसार खाद्य प्रसंस्करण कृषि और उद्योग के बीच एक मजबूत कड़ी का कार्य करता है।

पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक तकनीक का समन्वय जरूरी

चिराग पासवान ने कहा कि भारतीय परिवार सदियों से दही, अचार, पापड़, मुरब्बा और अन्य खाद्य उत्पादों का प्रसंस्करण करते रहे हैं। यह हमारी पारंपरिक खाद्य संस्कृति का हिस्सा है। अब आवश्यकता है कि इसी अनुभव को आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक मानकों और बेहतर पैकेजिंग के साथ जोड़कर बड़े स्तर पर व्यावसायिक अवसरों में बदला जाए।

उन्होंने कहा कि कॉमन इन्क्यूबेशन सेंटर जैसे संस्थान किसानों और युवाओं को आधुनिक मशीनरी, प्रशिक्षण, परीक्षण सुविधाएं और व्यवसायिक मार्गदर्शन प्रदान करेंगे, जिससे वे अपने उत्पादों को बाजार की मांग के अनुरूप विकसित कर सकेंगे।

छोटे किसानों की आय बढ़ाने में मददगार होगा प्रसंस्करण क्षेत्र

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि देश के अधिकांश किसान छोटे और सीमांत वर्ग से संबंधित हैं। सीमित भूमि जोत और बढ़ती आर्थिक जरूरतों के बीच किसानों को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। पर्याप्त भंडारण सुविधाओं के अभाव में उन्हें कई बार अपनी उपज तुरंत बेचनी पड़ती है, जिससे उचित मूल्य नहीं मिल पाता।

उन्होंने कहा कि यदि किसानों को भंडारण, प्रसंस्करण और पैकेजिंग की सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं तो वे अपनी उपज का बेहतर उपयोग कर सकते हैं। इससे कृषि उत्पादों की शेल्फ लाइफ बढ़ेगी, नुकसान कम होगा और किसानों को अतिरिक्त आय प्राप्त होगी। उन्होंने कहा कि किसानों को केवल उत्पादक नहीं बल्कि कृषि उद्यमी बनाने की दिशा में काम करना होगा।

युवाओं को रोजगार मांगने वाला नहीं, रोजगार देने वाला बनना होगा

अपने संबोधन में चिराग पासवान ने युवाओं को आत्मनिर्भरता और उद्यमिता का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि आज भारत में खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र तेजी से विकसित हो रहा है और इसमें रोजगार तथा निवेश की अपार संभावनाएं मौजूद हैं।

उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे नौकरी पाने तक सीमित सोच न रखें बल्कि ऐसे उद्यम स्थापित करें जो अन्य लोगों को भी रोजगार उपलब्ध करा सकें। मंत्रालय की विभिन्न योजनाएं नए उद्यमों को तकनीकी, वित्तीय और प्रशिक्षण सहायता प्रदान कर रही हैं, जिनका लाभ उठाकर युवा सफल व्यवसाय खड़ा कर सकते हैं।

खाद्य अपशिष्ट कम करने का सबसे प्रभावी उपाय है प्रसंस्करण

कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री ने खाद्य अपशिष्ट की समस्या को भी गंभीर चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि देश में हर वर्ष बड़ी मात्रा में फल, सब्जियां और अन्य कृषि उत्पाद खराब हो जाते हैं, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।

उन्होंने कहा कि खाद्य प्रसंस्करण इस समस्या का सबसे प्रभावी समाधान है। प्रसंस्करण के माध्यम से कृषि उत्पादों की उपयोग अवधि बढ़ाई जा सकती है तथा उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाया जा सकता है। इससे न केवल किसानों की आय बढ़ेगी बल्कि खाद्य सुरक्षा को भी मजबूती मिलेगी।

पीएमएफएमई योजना में महाराष्ट्र का प्रदर्शन सराहनीय

चिराग पासवान ने प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम औपचारीकरण (पीएमएफएमई) योजना के सफल क्रियान्वयन के लिए महाराष्ट्र सरकार की सराहना की। उन्होंने कहा कि राज्य ने इस योजना के तहत उल्लेखनीय कार्य किया है और देश के अग्रणी राज्यों में अपनी पहचान बनाई है।

उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों के बीच बेहतर समन्वय से खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र को और अधिक गति दी जा सकती है। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और किसानों को नए बाजारों तक पहुंच मिलेगी।

जैविक खेती और गुणवत्ता आधारित उत्पादन पर दिया जोर

केंद्रीय मंत्री ने भारतीय कृषि उत्पादों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए गुणवत्ता आधारित उत्पादन को आवश्यक बताया। उन्होंने कहा कि रासायनिक उर्वरकों के संतुलित उपयोग और जैविक खेती को बढ़ावा देकर बेहतर गुणवत्ता वाले उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं।

उन्होंने कहा कि विश्व बाजार में आज सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण खाद्य उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में भारतीय किसानों के लिए यह एक बड़ा अवसर है, जिसका लाभ उठाकर कृषि निर्यात को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा सकता है।

छात्रों को गुणवत्ता से समझौता न करने की सलाह

छात्रों को संबोधित करते हुए चिराग पासवान ने कहा कि किसी भी क्षेत्र में सफलता प्राप्त करने के लिए गुणवत्ता सबसे महत्वपूर्ण आधार है। उन्होंने कहा कि कई बड़े ब्रांड वर्षों की मेहनत, विश्वास और गुणवत्ता के बल पर स्थापित हुए हैं।

उन्होंने चेतावनी दी कि अल्पकालिक लाभ के लिए गुणवत्ता से किया गया समझौता किसी भी संस्था या उत्पाद की साख को नुकसान पहुंचा सकता है। इसलिए युवाओं को नवाचार के साथ-साथ गुणवत्ता मानकों के प्रति भी प्रतिबद्ध रहना चाहिए।

‘मेड इन इंडिया’ उत्पादों को बनाना होगा वैश्विक पहचान

अपने संबोधन के दौरान केंद्रीय मंत्री ने कहा कि “मेड इन India” केवल एक लेबल नहीं बल्कि गुणवत्ता और भरोसे का प्रतीक बनना चाहिए। भारतीय उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप तैयार कर वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धी बनाना समय की मांग है।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भारतीय किसानों में दुनिया का खाद्य भंडार बनने की क्षमता है और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग इस क्षमता को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

कृषि शिक्षा और अनुसंधान में विश्वविद्यालय की भूमिका सराही

कार्यक्रम के समापन पर चिराग पासवान ने वसंतराव नाइक मराठवाड़ा कृषि विद्यापीठ के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि यह संस्थान कृषि शिक्षा, अनुसंधान, तकनीकी नवाचार और कृषि विस्तार सेवाओं के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने विश्वविद्यालय समुदाय, कृषि वैज्ञानिकों और विद्यार्थियों से कृषि क्षेत्र में नवाचार की इस परंपरा को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।

विशेषज्ञों के अनुसार परभणी में स्थापित यह कॉमन इन्क्यूबेशन सेंटर न केवल खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र को नई गति देगा, बल्कि किसानों, महिला समूहों और ग्रामीण युवाओं को मूल्यवर्धित कृषि आधारित उद्यमों से जोड़कर स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।