कम बारिश का खतरा, लेकिन सरकार तैयार: शिवराज सिंह

अल नीनो की आशंका के बीच केंद्र अलर्ट, 315 जिलों के लिए विशेष कृषि रणनीति तैयार!

नई दिल्ली, 23 जून। अल नीनो और कमजोर मानसून की संभावित स्थिति को देखते हुए केंद्र सरकार ने खरीफ 2026 के लिए व्यापक आकस्मिक योजना लागू करने की तैयारी तेज कर दी है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को राज्यों के कृषि मंत्रियों, वरिष्ठ अधिकारियों, जिला कलेक्टरों और कृषि वैज्ञानिकों के साथ उच्चस्तरीय वर्चुअल बैठक कर तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि किसानों को किसी भी स्थिति में अकेला नहीं छोड़ा जाएगा और केंद्र-राज्य सरकारें मिलकर हरसंभव सहायता उपलब्ध कराएंगी।

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अब तक 43 प्रतिशत कम बारिश, खरीफ पर बढ़ी चिंता

बैठक के बाद आयोजित प्रेस वार्ता में कृषि मंत्री ने बताया कि इस वर्ष मानसून की प्रगति सामान्य से धीमी है और अब तक देश में लगभग 43 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है। मौसम विभाग के अनुसार जुलाई के पहले सप्ताह तक भी वर्षा सामान्य से कम रहने की आशंका है। ऐसे में वर्षा आधारित खेती वाले क्षेत्रों में खरीफ फसलों पर दबाव बढ़ सकता है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने संभावित जोखिमों का पूर्व आकलन कर तैयारी शुरू कर दी है ताकि कृषि उत्पादन और किसानों की आय पर न्यूनतम प्रभाव पड़े।

315 जिलों की पहचान, 111 जिले सबसे संवेदनशील

कृषि मंत्रालय और आईसीएआर द्वारा किए गए विश्लेषण के आधार पर देश के 315 जिलों को संभावित रूप से प्रभावित श्रेणी में रखा गया है।

111 जिले उच्च प्राथमिकता श्रेणी में हैं, जहां सिंचाई कवरेज 25 प्रतिशत से कम है।

76 जिले मध्यम प्राथमिकता श्रेणी में हैं, जहां सिंचाई सुविधा 25 से 50 प्रतिशत तक है।

128 जिले अपेक्षाकृत बेहतर सिंचाई वाले क्षेत्रों में हैं।

इन जिलों का बड़ा हिस्सा मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, कर्नाटक, बिहार, झारखंड, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और ओडिशा में स्थित है।

जिला कृषि आकस्मिकता योजनाएं होंगी लागू

कम वर्षा की स्थिति से निपटने के लिए आईसीएआर और आईसीएआर-CRIDA ने सभी जिलों के लिए District Agriculture Contingency Plans (DACP) तैयार किए हैं। इन योजनाओं में वैकल्पिक फसलें, फसल परिवर्तन, जल प्रबंधन और जोखिम कम करने की रणनीतियां शामिल हैं।

कृषि मंत्री ने राज्यों को निर्देश दिया कि इन योजनाओं को केवल दस्तावेज तक सीमित न रखा जाए, बल्कि स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार अपडेट कर तत्काल लागू करने योग्य बनाया जाए।

जल संरक्षण बनेगा सबसे बड़ा हथियार

कमजोर मानसून की आशंका को देखते हुए सरकार ने जल संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। तालाबों, जलाशयों, चेक डैम, स्टॉप डैम, खेत-तालाब और अन्य जल संरचनाओं की मरम्मत तथा क्षमता वृद्धि के निर्देश दिए गए हैं।

मनरेगा और ग्रामीण विकास योजनाओं के माध्यम से जल संचयन कार्यों को बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे रोजगार सृजन के साथ-साथ जल भंडारण क्षमता में भी वृद्धि होगी। संवेदनशील क्षेत्रों में पेयजल उपलब्धता सुनिश्चित करने पर भी विशेष जोर दिया गया है।

कम पानी वाली फसलों पर रहेगा फोकस

कृषि मंत्रालय ने राज्यों को सलाह दी है कि वे कम अवधि में तैयार होने वाली और कम पानी की आवश्यकता वाली फसलों को बढ़ावा दें। दलहन, तिलहन और मोटे अनाज (श्री अन्न) को प्राथमिकता देने की रणनीति बनाई गई है।

इसके साथ ही मिश्रित खेती, अंतरवर्ती फसल प्रणाली (इंटरक्रॉपिंग) और फसल विविधीकरण को प्रोत्साहित किया जाएगा ताकि किसानों का जोखिम कम हो और आय के स्रोत बढ़ सकें।

बीज और उर्वरकों का अतिरिक्त भंडार तैयार

केंद्र सरकार ने संभावित प्रभावित जिलों के लिए अतिरिक्त बीज भंडार सुरक्षित रखा है। पुनर्बुवाई की स्थिति को देखते हुए लगभग एक प्रतिशत अतिरिक्त बीज आरक्षित किए गए हैं।

सरकार के अनुसार यूरिया, डीएपी, एमओपी, एनपीके और एसएसपी सहित सभी प्रमुख उर्वरकों की उपलब्धता संतोषजनक है। कमजोर मानसून वाले क्षेत्रों में इनपुट की समय पर आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए विशेष निगरानी की जा रही है।

वैज्ञानिक सलाह के बाद ही करें बुवाई

कृषि मंत्री ने किसानों से अपील की कि वे पर्याप्त वर्षा और मिट्टी में नमी बनने के बाद ही बुवाई करें। उन्होंने कहा कि 75 से 100 मिलीमीटर संचयी वर्षा होने के बाद बोनी करना अधिक सुरक्षित रहेगा। जल्दबाजी में की गई बुवाई से बीज खराब होने और दोबारा बुवाई की नौबत आ सकती है।

731 कृषि विज्ञान केंद्र किसानों तक पहुंचाएंगे सलाह

देशभर के 731 कृषि विज्ञान केंद्रों (KVK) को अल नीनो और कमजोर मानसून की स्थिति में किसानों तक वैज्ञानिक सलाह पहुंचाने की जिम्मेदारी दी गई है। एसएमएस, व्हाट्सऐप, कॉल सेंटर, रेडियो, टीवी और सोशल मीडिया के माध्यम से किसानों को मौसम आधारित सलाह दी जाएगी।

पशुधन और चारा सुरक्षा की भी तैयारी

सरकार ने संभावित चारा संकट को देखते हुए अग्रिम योजना तैयार की है। जिन राज्यों में चारे की पर्याप्त उपलब्धता है, वहां से कमी वाले क्षेत्रों तक आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। साथ ही जमाखोरी और कालाबाजारी रोकने के लिए निगरानी तंत्र मजबूत किया जाएगा।

PMFBY, KCC और PM-किसान बनेंगे सुरक्षा कवच

कृषि मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY), किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) और प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-Kisan) किसानों की वित्तीय सुरक्षा के तीन प्रमुख स्तंभ हैं। प्रभावित क्षेत्रों में फसल बीमा कवरेज बढ़ाने और नए किसान क्रेडिट कार्ड जारी करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

अल नीनो मॉनिटरिंग सेल करेगा रियल-टाइम निगरानी

दिल्ली में विशेष “अल नीनो मॉनिटरिंग सेल” और “क्रॉप वेदर वॉच ग्रुप” गठित किए गए हैं, जो मानसून की प्रगति, बुवाई, फसल स्थिति, उर्वरक उपलब्धता और बाजार संकेतकों की लगातार निगरानी करेंगे। राज्यों को भी कंट्रोल रूम स्थापित कर नोडल अधिकारी नियुक्त करने के निर्देश दिए गए हैं।

खाद्य सुरक्षा पर तत्काल कोई खतरा नहीं

कृषि मंत्रालय के अनुसार देश में चावल और गेहूं का बफर स्टॉक पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। खरीफ 2026 के लिए लगभग 176 मिलियन टन खाद्यान्न उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। सरकार का मानना है कि प्रभावी रणनीति और समयबद्ध हस्तक्षेप से उत्पादन लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।

किसानों से अपील

कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किसानों से घबराने के बजाय वैज्ञानिक सलाह का पालन करने और स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण, फसल विविधीकरण, आधुनिक तकनीक और सरकारी योजनाओं के समन्वित उपयोग से अल नीनो जैसी चुनौती का सफलतापूर्वक सामना किया जा सकता है।