केवल खेती नहीं, पशुपालन भी बढ़ाएगा किसानों की आमदनी!

वैज्ञानिक पशुपालन और प्रशिक्षण से बढ़ेगी किसानों की आय: शिवराज सिंह चौहान

झांसी। किसानों की आय बढ़ाने, दुग्ध उत्पादन में सुधार और पशुपालन को अधिक लाभकारी बनाने के उद्देश्य से रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, झांसी में आयोजित किसानों एवं पशुपालकों के तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन हुआ। समापन सत्र को केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने वर्चुअल माध्यम से संबोधित किया।

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कृषि विश्वविद्यालयों की भूमिका केवल शिक्षा तक सीमित नहीं

कार्यक्रम में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के महानिदेशक एवं डेयर सचिव डॉ. एम.एल. जाट, विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. ए.के. सिंह, वैज्ञानिकों, शिक्षकों तथा विभिन्न राज्यों से जुड़े किसान एवं पशुपालक शामिल हुए।

अपने संबोधन में शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि कृषि क्षेत्र में केवल सैद्धांतिक शिक्षा पर्याप्त नहीं है, बल्कि किसानों को व्यावहारिक प्रशिक्षण और आधुनिक तकनीकों की जानकारी उपलब्ध कराना समय की आवश्यकता है। उन्होंने रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि देश के सभी कृषि विश्वविद्यालयों और अनुसंधान संस्थानों को नियमित रूप से ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने चाहिए।

प्रशिक्षण का उद्देश्य व्यवहार में बदलाव लाना

केंद्रीय मंत्री ने प्रशिक्षण प्राप्त किसानों से आह्वान किया कि वे प्रशिक्षण के दौरान सीखी गई वैज्ञानिक तकनीकों को अपने खेतों और पशुपालन गतिविधियों में लागू करें। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण का वास्तविक लाभ तभी मिलेगा जब किसान प्राप्त ज्ञान को अपने दैनिक कार्यों का हिस्सा बनाएंगे।

स्वस्थ पशु और वैज्ञानिक प्रबंधन से बढ़ेगा लाभ

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि स्वस्थ एवं उच्च उत्पादकता वाले पशुओं का चयन, संतुलित पोषण, रोग प्रबंधन, वैज्ञानिक प्रजनन तकनीक और आधुनिक डेयरी प्रबंधन किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों को बेहतर प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराकर पशुपालन क्षेत्र को और अधिक सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।

केवल फसल उत्पादन से नहीं बढ़ेगी पर्याप्त आय

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में केवल अनाज उत्पादन के माध्यम से किसानों की आय में अपेक्षित वृद्धि हासिल करना चुनौतीपूर्ण है। इसके लिए पशुपालन, डेयरी, बागवानी, मधुमक्खी पालन और अन्य कृषि आधारित गतिविधियों को खेती के साथ जोड़ना आवश्यक है। इससे किसानों को अतिरिक्त आय के स्रोत प्राप्त होंगे और कृषि जोखिम भी कम होगा।

एकीकृत कृषि प्रणाली समय की जरूरत

आईसीएआर के महानिदेशक एवं डेयर सचिव डॉ. एम.एल. जाट ने कहा कि किसानों की आय में तेजी से वृद्धि और पर्यावरण संरक्षण के लिए एकीकृत कृषि प्रणाली (इंटीग्रेटेड फार्मिंग सिस्टम) सबसे प्रभावी मॉडल बनकर उभर रही है। उन्होंने कहा कि फसल उत्पादन, पशुपालन, मत्स्य पालन और बागवानी जैसी गतिविधियों को एक साथ जोड़कर किसान अधिक लाभ प्राप्त कर सकते हैं।

डेयरी को कृषि प्रणाली का अभिन्न हिस्सा बनाने पर जोर

डॉ. जाट ने कहा कि डेयरी क्षेत्र को एकीकृत कृषि प्रणाली का अभिन्न हिस्सा मानते हुए आगे बढ़ाना होगा। वैज्ञानिक पशुपालन किसानों को नियमित नकद आय प्रदान करता है, जबकि पशुओं से प्राप्त गोबर और अन्य जैविक संसाधन खेती की लागत कम करने में मदद करते हैं।

किसानों तक पहुंचेगी आधुनिक तकनीक

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि कृषि शिक्षण संस्थानों में इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम लगातार आयोजित किए जाते रहेंगे, जिससे वैज्ञानिक तकनीकों का लाभ सीधे किसानों तक पहुंचेगा और कृषि क्षेत्र अधिक उत्पादक एवं टिकाऊ बन सकेगा।

किसानों ने साझा किए अपने अनुभव

कार्यक्रम के दौरान प्रशिक्षण प्राप्त किसानों और पशुपालकों ने अपने अनुभव साझा किए। प्रतिभागियों ने बताया कि उन्हें पशु स्वास्थ्य, पोषण प्रबंधन, दुग्ध उत्पादन तकनीकों और आधुनिक डेयरी संचालन के बारे में उपयोगी जानकारी प्राप्त हुई, जो भविष्य में उनकी आय बढ़ाने में सहायक सिद्ध होगी।

दुग्ध उत्पादन बढ़ाने की अपार संभावनाएं

विशेषज्ञों के अनुसार प्रति पशु उत्पादकता बढ़ाने की अभी भी व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं। आधुनिक तकनीकों, बेहतर नस्ल प्रबंधन और वैज्ञानिक प्रशिक्षण के माध्यम से दुग्ध उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि की जा सकती है, जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।