आईसीएआर-आईआईआरआर की पहल, अब मिट्टी बताएगी कितनी खाद चाहिए!

आईसीएआर-आईआईआरआर का ‘खेत बचाओ अभियान’ तेज, किसानों और एफपीओ को संतुलित उर्वरक उपयोग का दिया प्रशिक्षण!

विकाराबाद/हैदराबाद,। मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, उर्वरक लागत में कमी और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आईसीएआर-भारतीय धान अनुसंधान संस्थान (ICAR-IIRR) ने सोमवार को तेलंगाना के विकाराबाद जिले के पुडूर मंडल स्थित कंकल गांव में ‘खेत बचाओ अभियान’ के तहत व्यापक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया। इस दौरान किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग, मृदा परीक्षण और वैज्ञानिक खेती की आधुनिक तकनीकों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।

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कार्यक्रम में वैज्ञानिकों ने किसानों को बताया कि फसलों की बेहतर वृद्धि और उच्च उत्पादकता के लिए केवल नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश जैसे प्रमुख पोषक तत्व ही नहीं, बल्कि जिंक, बोरॉन, आयरन और सल्फर जैसे सूक्ष्म पोषक तत्व भी समान रूप से महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि उर्वरकों का अंधाधुंध और असंतुलित प्रयोग मृदा की उर्वरता को नुकसान पहुंचाता है तथा लंबे समय में उत्पादन क्षमता को प्रभावित करता है।

रैपिड सॉइल टेस्टिंग किट का किया गया प्रदर्शन

अभियान के तहत किसानों को रैपिड सॉइल टेस्टिंग किट का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया गया। वैज्ञानिकों ने खेत में ही मिट्टी के स्वास्थ्य और पोषक तत्वों की स्थिति का परीक्षण करने की प्रक्रिया समझाई। किसानों को बताया गया कि मृदा परीक्षण आधारित उर्वरक प्रबंधन से अनावश्यक खर्च कम किया जा सकता है और फसल उत्पादन में सुधार लाया जा सकता है।

इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य किसानों को ऐसी तकनीकी जानकारी प्रदान करना था, जिससे वे वास्तविक समय में उर्वरक उपयोग संबंधी निर्णय ले सकें और लागत को नियंत्रित करते हुए बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकें।

जनप्रतिनिधियों और किसानों की सक्रिय भागीदारी

कार्यक्रम में कंकल गांव के सरपंच मंचनपल्ली वीरेश, उप-सरपंच पल्लेकुर्वा मल्लेश, कृषि विस्तार अधिकारी (AEO) राजकुमार सहित कई स्थानीय प्रतिनिधि उपस्थित रहे। अभियान में कुल 67 किसानों ने भाग लिया, जिनमें 47 पुरुष किसान और 20 महिला किसान शामिल थीं।

आईसीएआर-आईआईआरआर के वैज्ञानिकों डॉ. बंडेप्पा, डॉ. जागृति रोहित, डॉ. राघवेंद्र और डॉ. जसुदासु ने तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान किया। उन्होंने किसानों की जिज्ञासाओं का समाधान किया और संवादात्मक सत्रों के माध्यम से अनुशंसित कृषि तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित किया।

आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के एफपीओ को भी दिया गया प्रशिक्षण

इसी क्रम में आईसीएआर-आईआईआरआर ने आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) के लिए भी ‘खेत बचाओ अभियान’ के तहत विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया। कार्यक्रम में एफपीओ प्रतिनिधियों को संतुलित उर्वरक उपयोग, मृदा परीक्षण आधारित पोषक तत्व प्रबंधन तथा टिकाऊ कृषि पद्धतियों के महत्व से अवगत कराया गया।

वैज्ञानिकों ने उर्वरकों के अनियंत्रित उपयोग से होने वाले दुष्प्रभावों पर प्रकाश डालते हुए आवश्यकता आधारित उर्वरक प्रबंधन की सलाह दी। कार्यक्रम के दौरान रैपिड सॉइल टेस्टिंग किट का प्रशिक्षण, साथ ही RAISE और NAPSRI डिजिटल एप्लिकेशन का प्रदर्शन भी किया गया। इन डिजिटल प्लेटफॉर्मों के माध्यम से किसानों और एफपीओ को वैज्ञानिक सलाह एवं मृदा प्रबंधन संबंधी जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी।

इस कार्यक्रम का समन्वयन डॉ. ब्रजेंद्र, डॉ. बी. सैलजा, डॉ. पापा राव और डॉ. जागृति द्वारा किया गया।

टिकाऊ कृषि की दिशा में महत्वपूर्ण पहल

विशेषज्ञों का मानना है कि मृदा परीक्षण आधारित उर्वरक प्रबंधन और डिजिटल कृषि तकनीकों का उपयोग किसानों की लागत घटाने, मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने तथा जलवायु-अनुकूल कृषि को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। ‘खेत बचाओ अभियान’ इसी दिशा में किसानों और एफपीओ को वैज्ञानिक खेती से जोड़ने का एक प्रभावी प्रयास साबित हो रहा है।

चित्र: सौजन्य सोशल मीडिया ICAR-IIRR