नए EU नियमों में भारत शामिल, कृषि और समुद्री निर्यात को मिलेगा बढ़ावा!

यूरोपीय संघ ने भारत को दी बड़ी राहत, 2026 के बाद भी जारी रहेगा जलीय कृषि और शहद का निर्यात

नई दिल्ली। भारत को कृषि एवं समुद्री उत्पाद निर्यात के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण सफलता मिली है। यूरोपीय संघ (ईयू) ने अपने संशोधित नियामक ढांचे के तहत भारत को उन अधिकृत देशों की सूची में शामिल रखा है, जिन्हें सितंबर 2026 के बाद भी जलीय कृषि उत्पाद (एक्वाकल्चर), शहद, अंडे और पशु आंतों का निर्यात करने की अनुमति होगी। इस निर्णय से भारतीय निर्यातकों को यूरोप के बड़े और लाभकारी बाजार तक निर्बाध पहुंच सुनिश्चित होगी।

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यूरोपीय संघ ने रोगाणुरोधी प्रतिरोध (Antimicrobial Resistance-AMR) से जुड़ी बढ़ती वैश्विक चिंताओं को ध्यान में रखते हुए आयोग कार्यान्वयन विनियमन 2026/1189 के माध्यम से अपने नियमों में संशोधन किया है। यह नया ढांचा सितंबर 2026 से लागू होगा और पशु-उत्पत्ति वाले उत्पादों के निर्यात के लिए अतिरिक्त गुणवत्ता एवं सुरक्षा मानदंड निर्धारित करेगा।

भारत का इस सूची में शामिल होना विशेष रूप से मत्स्य क्षेत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वर्तमान में भारत यूरोपीय संघ को लगभग 1.59 अरब अमेरिकी डॉलर मूल्य के मछली एवं मत्स्य उत्पादों का निर्यात करता है। ऐसे में नए नियमों के बावजूद निर्यात जारी रहने से लाखों मछुआरों, जलीय कृषि उत्पादकों और निर्यातकों को बड़ा लाभ मिलेगा।

वाणिज्य विभाग और ईआईसी के प्रयासों का मिला परिणाम

इस उपलब्धि के पीछे वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के वाणिज्य विभाग, निर्यात निरीक्षण परिषद (EIC) तथा अन्य संबंधित संस्थाओं के समन्वित प्रयासों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। वाणिज्य विभाग ने यूरोपीय आयोग के साथ लगातार संवाद बनाए रखा और बाजार पहुंच से जुड़े नियामकीय मुद्दों के समाधान के लिए सक्रिय पहल की।

वहीं, निर्यात निरीक्षण परिषद ने यूरोपीय संघ के मानकों के अनुरूप निरीक्षण, परीक्षण और प्रमाणन व्यवस्था को मजबूत किया। इससे भारत की आधिकारिक नियंत्रण प्रणाली को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विश्वसनीयता मिली और यूरोपीय संघ की नई शर्तों का अनुपालन सुनिश्चित हो सका।

निर्यातकों के लिए खुलेंगे नए अवसर

विशेषज्ञों का मानना है कि इस निर्णय से भारतीय समुद्री खाद्य, शहद और पोल्ट्री उत्पादों के निर्यात में स्थिरता आएगी। यूरोप जैसे उच्च मूल्य वाले बाजार में निरंतर पहुंच मिलने से निर्यातकों को नए व्यावसायिक अवसर प्राप्त होंगे और विदेशी मुद्रा आय में भी वृद्धि हो सकती है।

समुद्री उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (MPEDA), निर्यात निरीक्षण परिषद और अन्य हितधारक संस्थाएं यूरोपीय संघ द्वारा अनुमोदित प्रतिष्ठानों एवं नियामक एजेंसियों के साथ मिलकर आगे भी काम करती रहेंगी ताकि खाद्य सुरक्षा और गुणवत्ता के उच्च मानक बनाए रखे जा सकें।

निर्यात वृद्धि को मिलेगा नया बल

केंद्र सरकार का कहना है कि वह निर्यात संवर्धन, संस्थागत क्षमता निर्माण और प्रमुख व्यापारिक साझेदारों के साथ आर्थिक सहयोग को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। यूरोपीय संघ के संशोधित नियमों में भारत का शामिल होना न केवल व्यापारिक विश्वास का प्रतीक है, बल्कि यह वैश्विक बाजार में भारतीय कृषि एवं समुद्री उत्पादों की बढ़ती स्वीकार्यता को भी दर्शाता है।

इस फैसले से भारत के समुद्री खाद्य, शहद और पोल्ट्री क्षेत्र को दीर्घकालिक स्थिरता मिलने के साथ-साथ निर्यात वृद्धि और रोजगार सृजन की संभावनाएं भी मजबूत होंगी।

चित्र:ग्राफिक्स