समुद्री खाद्य निर्यात को नई उड़ान: 1 लाख करोड़ रुपये के लक्ष्य पर केंद्रित राष्ट्रीय कार्यशाला संपन्न !!
विशाखापत्तनम/ नईदिल्ली। -भारत को वैश्विक समुद्री खाद्य निर्यात महाशक्ति बनाने और मत्स्य पालन मूल्य श्रृंखला को मजबूत करने के उद्देश्य से आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में 5-6 जून 2026 को दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। मत्स्य पालन विभाग, मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय ने वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय तथा आंध्र प्रदेश सरकार के सहयोग से आयोजित इस कार्यशाला में समुद्री खाद्य निर्यात को 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक तक पहुंचाने की रणनीति पर व्यापक मंथन किया गया। कार्यशाला में समुद्री खाद्य क्षेत्र में ट्रेसिबिलिटी (पता लगाने की क्षमता), सतत प्रमाणीकरण, मूल्यवर्धन, निर्यात विविधीकरण, कोल्ड चेन अवसंरचना और गहरे समुद्र के उच्च मूल्य संसाधनों के दोहन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने माना कि केवल निर्यात की मात्रा बढ़ाने के बजाय अब भारत को उच्च गुणवत्ता और मूल्यवर्धित उत्पादों पर ध्यान केंद्रित करना होगा।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!
शीर्ष नेतृत्व ने रखा समुद्री खाद्य निर्यात का रोडमैप !! 
कार्यशाला के उद्घाटन सत्र में आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री , केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री , केंद्रीय मत्स्य पालन मंत्री , केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री तथा केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री ने भाग लिया। मंत्रियों ने इस बात पर जोर दिया कि भारत के समुद्री खाद्य निर्यात को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए उत्पादन, प्रसंस्करण, गुणवत्ता नियंत्रण, लॉजिस्टिक्स और बाजार विस्तार को एकीकृत दृष्टिकोण के साथ विकसित करना होगा।
मूल्यवर्धित उत्पादों पर रहेगा फोकस !!
विचार-विमर्श के दौरान विशेषज्ञों ने कहा कि भारत अभी भी बड़े पैमाने पर कच्चे या कम मूल्यवर्धित समुद्री उत्पादों का निर्यात करता है। यदि रेडी-टू-ईट, रेडी-टू-कुक और ब्रांडेड समुद्री खाद्य उत्पादों को बढ़ावा दिया जाए तो निर्यात मूल्य में कई गुना वृद्धि संभव है। इसके लिए आधुनिक प्रसंस्करण इकाइयों, कोल्ड स्टोरेज, एयर कार्गो सुविधाओं और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप गुणवत्ता नियंत्रण तंत्र को मजबूत करने की आवश्यकता बताई गई।
अंतर्देशीय मत्स्य पालन में छिपी है बड़ी संभावना !!
कार्यशाला में यह भी रेखांकित किया गया कि भारत का अंतर्देशीय मत्स्य पालन क्षेत्र निर्यात में अपेक्षाकृत कम योगदान देता है, जबकि इसमें अपार संभावनाएं मौजूद हैं। विशेषज्ञों ने पिंजरा पालन, जलाशय आधारित मत्स्य पालन, मोती संवर्धन और उच्च मूल्य वाली प्रजातियों के उत्पादन को बढ़ावा देने की सिफारिश की। मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों ने अंतर्देशीय मत्स्य पालन आधारित निर्यात बढ़ाने के सफल मॉडल प्रस्तुत किए।
ट्रेसिबिलिटी और प्रमाणन बनेगा सफलता का आधार !!
पहले तकनीकी सत्र में निर्यात बाजारों की बदलती आवश्यकताओं को देखते हुए डिजिटल ट्रेसिबिलिटी सिस्टम, सतत प्रमाणीकरण और जिम्मेदार मत्स्य उत्पादन पद्धतियों पर विशेष बल दिया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि यूरोप, अमेरिका और अन्य विकसित देशों में भारतीय समुद्री उत्पादों की पहुंच बढ़ाने के लिए उत्पादन से लेकर निर्यात तक प्रत्येक चरण का डिजिटल रिकॉर्ड और अंतरराष्ट्रीय प्रमाणन आवश्यक होता जा रहा है।
स्टार्टअप और एमएसएमई निभाएंगे बड़ी भूमिका !!
दूसरे तकनीकी सत्र में समुद्री खाद्य निर्यात को गति देने में स्टार्टअप्स और एमएसएमई की भूमिका पर चर्चा हुई। प्रतिभागियों ने समुद्री शैवाल खेती, सजावटी मत्स्य पालन, ठंडे पानी की मत्स्य पालन प्रणालियों, टूना जैसी गहरे समुद्री प्रजातियों और समुद्री अवयव आधारित उत्पादों में नए अवसरों की पहचान की। विशेषज्ञों ने कहा कि नवाचार, ब्रांडिंग, तकनीकी उन्नयन और बाजार संपर्क बढ़ाकर स्टार्टअप्स भारत के समुद्री खाद्य निर्यात को नई दिशा दे सकते हैं।
चुनौतियां भी आईं सामने !!
हितधारकों ने रोग प्रबंधन, गुणवत्तापूर्ण बीजों की कमी, बढ़ती उत्पादन लागत, अपर्याप्त कोल्ड चेन नेटवर्क, सीमित क्वारंटाइन सुविधाओं तथा कठोर अंतरराष्ट्रीय प्रमाणन मानकों को प्रमुख चुनौतियों के रूप में चिह्नित किया।
इसके अलावा एंटीबायोटिक अवशेषों के अनुपालन, गुणवत्ता नियंत्रण और निर्यात बाजारों में विविधता लाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया।
भारत को ग्लोबल समुद्री खाद्य हब बनाने की दिशा में कदम !!
कार्यशाला के समापन पर केंद्र और राज्य सरकारों, उद्योग संगठनों, निर्यातकों, अनुसंधान संस्थानों और उद्यमियों ने मिलकर भारत के समुद्री खाद्य निर्यात तंत्र को अधिक प्रतिस्पर्धी, टिकाऊ और भविष्य के लिए तैयार बनाने की प्रतिबद्धता जताई। विशेषज्ञों का मानना है कि कार्यशाला से प्राप्त सुझावों के आधार पर तैयार की जाने वाली नीतियां भारत को 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक के समुद्री खाद्य निर्यात लक्ष्य तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। इससे लाखों मछुआरों, मत्स्य किसानों, प्रसंस्करण इकाइयों, स्टार्टअप्स और एमएसएमई को नए अवसर मिलेंगे तथा भारत की पहचान वैश्विक बाजार में उच्च गुणवत्ता वाले और टिकाऊ समुद्री खाद्य उत्पादों के विश्वसनीय आपूर्तिकर्ता के रूप में और मजबूत होगी।

