महिला किसान सशक्तिकरण से सतत कृषि को मिलेगी नई दिशा

जलवायु अनुकूलन में महिला किसानों की भूमिका होगी निर्णायक, सतत कृषि के लिए सशक्तिकरण जरूरी: सूर्य प्रताप शाही

लखनऊ। जलवायु परिवर्तन की बढ़ती चुनौतियों के बीच महिला किसानों को तकनीक, प्रशिक्षण और संसाधनों से जोड़ना खेती को टिकाऊ एवं लाभकारी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इसी उद्देश्य से लखनऊ के क्लार्क अवध होटल में “जलवायु अनुकूलन उपायों के लिए महिला किसानों को सशक्त बनाने” विषय पर आयोजित राज्य स्तरीय कार्यशाला में उत्तर प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने किसानों, विशेषज्ञों और कृषि अधिकारियों को संबोधित किया।

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महिला किसान बनेंगी जलवायु परिवर्तन से मुकाबले की अग्रिम पंक्ति

कार्यशाला को संबोधित करते हुए कृषि मंत्री ने कहा कि जलवायु परिवर्तन का प्रभाव सीधे कृषि उत्पादन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। ऐसे समय में महिला किसानों की भागीदारी और नेतृत्व को बढ़ावा देना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि सरकार और समाज को मिलकर महिला किसानों तक आधुनिक कृषि तकनीक, वैज्ञानिक प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और आवश्यक संसाधनों की पहुंच सुनिश्चित करनी होगी।

उन्होंने कहा कि महिला किसान केवल कृषि कार्यों में सहयोगी नहीं बल्कि कृषि नवाचार, पोषण सुरक्षा और प्राकृतिक संसाधन संरक्षण की महत्वपूर्ण वाहक हैं। उनके सशक्तिकरण से जलवायु-स्मार्ट कृषि को नई दिशा मिलेगी।

विशेषज्ञों ने साझा किए जलवायु अनुकूलन के अनुभव

कार्यशाला में कृषि क्षेत्र के राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों ने भी अपने विचार रखे। कार्यक्रम में प्रमुख सचिव कृषि रविंद्र, गेट्स फाउंडेशन की निदेशक (अनुकूली एवं न्यायसंगत खाद्य प्रणाली) डॉ. अना मारिया लोबोग्रेरियो, भारत सरकार के पूर्व कृषि सचिव देवेश चतुर्वेदी, पूर्व आईएएस अधिकारी अमित मोहन प्रसाद, नाबार्ड के मुख्य महाप्रबंधक पंकज कुमार, कृषि निदेशक पंकज त्रिपाठी तथा अपर कृषि निदेशक (कृषि रक्षा) डॉ. आशुतोष कुमार मिश्र सहित अनेक विशेषज्ञ मौजूद रहे।

किसानों के हित में जून माह के लिए कृषि विभाग का विशेष कार्ययोजना कैलेंडर तैयार

लखनऊ में कृषि मंत्री ने अपने सरकारी आवास पर विभागीय अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक कर जून माह में किसानों के लिए संचालित होने वाले विभिन्न कार्यक्रमों की विस्तृत समीक्षा की तथा आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए।

14 से 16 जून तक सभी जिलों में कृषि एवं आरोग्य मेले

बैठक में निर्णय लिया गया कि 14 से 16 जून तक प्रदेश के सभी जनपदों में “कृषि मेला एवं आरोग्य मेला” आयोजित किए जाएंगे। इन मेलों में किसानों को नवीन कृषि तकनीकों, सरकारी योजनाओं, बीज, उर्वरक प्रबंधन, स्वास्थ्य सेवाओं तथा कृषि यंत्रों की जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी।

प्राकृतिक खेती पर दो दिवसीय विशेष कार्यशाला

17 एवं 18 जून को प्रदेशभर में प्राकृतिक खेती विषयक दो दिवसीय कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य किसानों को रसायन-मुक्त खेती, जैविक विकल्पों और प्राकृतिक कृषि पद्धतियों के प्रति जागरूक करना है ताकि उत्पादन लागत कम हो और मिट्टी की उर्वरता बनी रहे।

21 जून को कृषि फार्मों पर मनाया जाएगा योग दिवस

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर 21 जून को सभी कृषि फार्मों एवं कृषि विभाग के कार्यालयों में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिनमें योग एवं स्वास्थ्य जागरूकता गतिविधियों का आयोजन होगा।

प्रदेशभर में जारी है ‘खेत बचाओ अभियान’

कृषि मंत्री ने बताया कि 1 जून से 30 जून तक प्रदेश के सभी राजकीय कृषि फार्मों पर “खेत बचाओ अभियान” संचालित किया जा रहा है। अभियान के तहत मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, जल प्रबंधन, फसल विविधीकरण तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

गन्ना आधारित इंटरक्रॉपिंग से बढ़ेगी किसानों की आय

बैठक में गन्ना किसानों की आय बढ़ाने के लिए गन्ना आधारित इंटरक्रॉपिंग मॉडल को व्यापक स्तर पर अपनाने पर बल दिया गया। इसके अंतर्गत गन्ने के साथ मूंगफली, उड़द, मूंग, लोबिया, सरसों और भिंडी जैसी फसलों की सह-फसली खेती के प्रदर्शन प्लॉट स्थापित किए गए हैं।

इसके साथ ही मृदा सुधार और जैविक कार्बन बढ़ाने के उद्देश्य से ढैंचा की विभिन्न प्रजातियों के प्रदर्शन भी किए जा रहे हैं। अधिकारियों को RATDS प्रक्षेत्र को मॉडल फार्म के रूप में विकसित करने के निर्देश दिए गए।

धान बीज वितरण और कृषि यंत्रों की बुकिंग पर जोर

बैठक में धान बीज वितरण कार्य में लगे बीटीएम एवं एटीएम कर्मियों को मानदेय भुगतान शीघ्र सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। साथ ही कृषि शिक्षा का सब-मॉड्यूल तैयार कर मुख्यालय भेजने तथा कृषि यंत्रों की बुकिंग पुनः प्रारंभ करने के निर्देश भी जारी किए गए।

दलहन-तिलहन क्षेत्रफल में वृद्धि, सुपर एल-नीनो को लेकर किसानों को सलाह

समीक्षा बैठक में बताया गया कि इस वर्ष उड़द, मूंग, सोयाबीन और तिल जैसी दलहन एवं तिलहन फसलों के क्षेत्रफल में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। संभावित सुपर एल-नीनो की स्थिति को देखते हुए किसानों को जल संरक्षण और जलवायु अनुकूल कृषि पद्धतियां अपनाने की सलाह दी गई।

कृषि मंत्री ने किसानों से खेतों की मेड़ों पर वृक्षारोपण करने तथा मेड़ों पर अरहर की खेती अपनाने का आह्वान किया। इसके अलावा बैंगन, मक्का, लोबिया और लौकी जैसी सब्जी फसलों के विस्तार को भी प्रोत्साहित करने पर बल दिया गया।

सतत कृषि और किसानों की आय वृद्धि के लिए प्रतिबद्ध सरकार

कृषि मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार किसानों की आय बढ़ाने, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने के लिए सतत कृषि मॉडल को बढ़ावा देने हेतु पूरी तरह प्रतिबद्ध है। आधुनिक तकनीक, फसल विविधीकरण, प्राकृतिक खेती और महिला किसान सशक्तिकरण के माध्यम से कृषि क्षेत्र को अधिक मजबूत एवं आत्मनिर्भर बनाया जाएगा।

बैठक में प्रमुख सचिव कृषि रविंद्र, कृषि सचिव इन्द्र विक्रम सिंह, कृषि निदेशक पंकज त्रिपाठी, उत्तर प्रदेश बीज विकास निगम के निदेशक टी.एम. त्रिपाठी, उत्तर प्रदेश बीज प्रमाणीकरण के निदेशक टी.पी. चौधरी, अपर कृषि निदेशक आशुतोष मिश्र, संयुक्त कृषि निदेशक (ब्यूरो) अखिलेश कुमार सिंह सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।